केटेगरी : संस्कृति और शिक्षा

#हिंदी की पुकार #भारत की भाषा हिंदी

सुनो-सुनो ओ हिन्द वालों हिंदी की यही पुकार है,क्यों  धुंधला अस्तित्व है मेरा करती यही सवाल है।भारत के मस्तक पर सजती मैं वो अक्षत, रोली हूँ,भूल गए क्यों तुम सब मुझको मैं हिंदुस्तान की बोली हूँ।जन्म...

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मोबाइल में सिमटता बचपन- Blog post by Sangita Tripathi

एक ज्वेलरी शॉप में, मै साइड के सोफ़े पर बैठी, अपने सामानों के पेमेंट का इंतजार कर रही थी। तभी सामने के सोफ़े पर,...

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मत करो न ये भेदभाव!- Blog post by Maya Shukla

भाषा अपने मन के भावों को प्रकट करने का माध्यम है पर यह एक बहुत बड़ी विडंबना है कि लोग पता नहीं क्यों भाषा के...

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चूरमे के लड्डू

गणपति बाप्पा हमारे घर पधारे हैं और उन्हें तो लड्डू बहुत प्रिय है। आज मैं आप के सामने चूरमे के लड्डू लेकर उपस्थित हुई हूं जो आप सभी को और हमारे गणपति बाप्पा को जरुर पसंद आएंगे।सामग्री:- 500क्ग्...

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पसरा सन्नाटा

कल की घटना के बात माला जी चिंता में रात भर सो नहीं पाई थी। चार बजे जब उनके उठने का समय हुआ तो उनकी आंख लग गई और फिर सुबह देर से ही आंख खुली थी। माला जी की, उठकर "आंगन" में आई.... चारों तरफ़ उदासीनता फैली थी। ना चिड़िया...

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स्वयं से प्रेम

कभी कुछ वक्त तन्हा गुजरा,तो ख्यालों के आंगन में जा पहुंचे ।कभी फुर्सत ना मिली सोचने की,आज खुद को ही सोच डाला।आईना भी कभी ध्यान से ना देखा था,आज तो तरतीब से बैठ के निहारा,सच कह रहे है कि काबिल...

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ऐसे बढ़ेगा बच्चों का बौद्धिक विकास- Blog post by Archana...

अपने बच्चों का दिमाग ज्यादा से ज्यादा तेज हो ऐसी इच्छा हर माँ बाप में होती है परन्तु इसके लिए बहुत से प्रयत्न...

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यह किस पर चला गया? Blog post by Pooja Arora

जहाँ आशीष शहर का नामी वकील था, वहीं उसकी उसकी पत्नि स्नेहा भी कॉलेज में प्रोफेसर थी| जो उनकी जोड़ी को देखता देखता रह जाता किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी | जैसे के घर एक पुत्र हुआ दोनों ने उसका नाम बड़े प्यार से दीपक रखा, आखिर...

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ऑनलाइन पढ़ाई पड़ रही आँखों पर भारी?

जब से महामारी आई पूरी दुनिया भर में जैसे व्यवस्थाएँ ही बदल गई। जिन बच्चों को मोबाइल और लैपटॉप से दूर रखने की सलाह दी जाती थी,उन्हें अब दिन में कई कई घन्टे इनके साथ गुजारने पड़ते हैं। सारी पढ़ाई ही ऑनलाइन हो गई है। परन्तु इससे बच्चों...

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#"आजादी बेबुनियाद सोच और मानसिकता से"

"आजाद हुआ आज के दिन देश हमारा"ये नारा अब न काफी है,आजादी किसको कितनी मिली यक्ष प्रश्न यह बाक़ी है।आज भले ही हम अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से आजाद हो गए है,लेकिन क्या हम अपनी सोच और मानसिकता से आजाद हो पाए...

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