केटेगरी : पिंक क्रोनिकल्स

तेरी तस्वीर

चुराई थी मैने कभी तेरी एक तस्वीर  ,याद आती है तब कर लेती हूँ दीदार,तुमने बना नज़रे मिलाना बंद कर दिया, बना ली क्यूँ रिश्तों...

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"ए धरा तू इतनी अशांत क्यों है "

ऐ धरा, तू इतनी अशांत क्यों है,ऐ धरा, तू इतनी अशांत क्यों है,हाँ मानती हूँ कितना कष्ट है तेरे कण कण में,हाँ विष घुल गया है तेरी हर धड़कन में,ना जाने इतना बदल गया इंसान क्यों है बता ना धरती माँ तू इतनी...

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रूपा उन्नीकृष्णन का प्रेरणादायी सफर

यह ब्लॉग वे लोग ज़रूर पढ़ें जिन्हें आज भी महिलाओं की काबिलियत पर संदेह रहता है! आज भी भारतीय समाज में ज़्यादातर प्रतिशत लोगों का ये मानना है कि महिलाओं की जगह तो घर, गृहस्थी, बच्चों के लालन-पालन...

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फिर कभी

"फिर कभी"आज थोड़ा जी भरकर देखना है तुमको शेष कभी शाम ढ़ले मिल लूँगी फिर कभी, आज तेरी गहरी सी आँखों में डूब जाऊँ चाहत की चाशनी में नहाऊँगी फिर कभी..करनी है गुफ़्तगु चंद ज़रा लफ़्ज़ों में ढ़ेर सारी बातों में खो...

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कह दो न चाँद मुबारक

"कह दो न चाँद मुबारक"ईद के दिन, रात की ठोड़ी पर बैठी स्याह शाम अकेले कोई कैसे बिताएं? सूनी है दिल की अंजुमन, खामोश निगाहें रस्ता तेरा निहारे,सूने झरोखे में मेरा चाँद नज़र आए तो उदास मन में रौनक-ए-बहार आ जाए..आज...

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चेहरे

रोज आँखों से गुजरते हैं कुछ जाने अनजाने चेहरे,कुछ पर गम के बादल ,कुछ पर खुशी के पहरे।कुछ पर मुस्कान तारी है,कुछ हँसी की फुलवारी है,कुछ अनुभवों से पगे होते,कुछ दिल को लगे प्यारी है।रोज आँखों...

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अभी-अभी

"अभी-अभी"जश्न बन गई बेरंगी सी ज़िस्त मेरी किया जो इज़हार-ए-इश्क तुमने मुस्कुराते महबूब अभी-अभी..सिहरन सी दौड़ गई सनम मेरे तन के पिंजर में आँखों से छुआ जो तुमने कुछ यूँ अभी-अभी.. अंग-अंग से बिखरी है संदली...

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गुफ़्तगु

"जीवन संगीत है, बोल साँसें है, रिश्ता दीया है गुफ़्तगु तेल है, संवाद ज़रिया है रिश्ते को जोड़ने का" तुम्हारी चुप्पी मेरी खुशियों की कातिल है, खुशहाल दांपत्य की नींव है गुफ़्तगु, कुछ बोलिए ना, मौन रिश्ते जल्दी रीस...

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रात अभी बाकी है

"रात अभी बाकी है" (श्रृंगार रस)चलो अनकही को मुखर कर लें, आधी रात अभी बाकी है, मेरे सीने पर सर रख दो मुलाकात शेष बाकी है..हल्की-सी रोशनी में एक छुअन से झनझनाती ऊँगलियों को शिद्दत से जोड़ कर एक गलती करते, चार...

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तेरा दायरा बेमिसाल है

\"तेरा दायरा बेमिसाल है\"विस्तृत है तेरी सोच का आसमान विरांगना सी छटा धर नारी तू भी कुछ कम नहीं तेरी शक्ति अपरंपार है..तूने जीवन देखा है तुझ बिन संसार अधूरा है ध्वनियों का सार है तू खास है तू सारी खासियत तेरा...

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