केटेगरी : पिंक क्रोनिकल्स

सास-बहू की खट्टी-मीठी नोंक झोंक

सास बहू की खट्टी-मीठी नोंक-झोंकहास्य-व्यंग्यनई-नई बहू है घर में आई, सास को चिंता सताई,लगता है अब तो हमने अपनी हुकूमत गंवाई।लगी वो प्लान बनाने, कैसे लगाए सबको अपने-अपने ठिकाने,पहले ही दिन बहू...

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करती हूं याद वो पल

करती हूं याद वो पलकरती हूं आज भी याद वो पल, जब मां अपने हाथों से कौर खिलाया करती थी, ना खाने पर कभी-कभी डांट भी लगाया करती थी। हर‌ बात को बड़े प्यार से समझाया करती थी, अच्छा क्या है, बुरा...

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प्रेम की सार्थकता

मिलन और जुदाई के एहसास के बीच,पास होने या न होने के बीच,पूर्णता और अपूर्णता के बीच,पाने और खोने के बीचदेह और मन से होते हुए रूह के बीच,प्रेम सदा ही तीव्रतम रहा हैकल्पनाओं में।प्रेम की गहराई...

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बनोगे मेरे वैलेन्टाइन

"बनोगे मेरे वैलेन्टाइन"मेरे कदमों की आहट महसूस करो मैं चूमती हूँ तुम्हारे पथ की रज को,मांगने आई हूँ तुमको तुमसे मेरी गुज़ारिश को कबूल करो..मेरी यात्रा का हिस्सा बनों अपने अनुराग को मेरी आकांक्षाओं में मलकर,तुम...

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जब स्त्री प्रेम में होती है

जब कोई स्त्री प्रेम में होती हैभूल कर खुद का वजूद प्रियतम से समां जाती है, हो जाती है न्योछावर उस पर जब कोई स्त्री प्रेम में होती है।जब पाती है सान्निध्य वो अपने प्रीतम का, खिल के कली सी बहार हो...

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साक्षात संगीत को श्रद्धांजलि

"साक्षात संगीत को श्रद्धांजलि" बरसों पहले भारत की भूमि पर जन्मी एक स्वर लहरी थी, जिनके गले में खुद माँ सरस्वती ने विराजमान होते जगह अपनी बनाई थी.. सरगम की परिभाषा अपनी आवाज़ को बनाए लता मंगेशकर क्या गाती थी,...

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बेटी

एहसास एक बेटी होने का क्या जानोगे तुम नेमत बनकर आई हूँ मैं क्या पहचानोगे तुम मुझे इस धरा पर घर नहीं मेरा पर अंबर को छूने आई हूँ मैं दिलों पर राज करने आई हूँ हर दर्द की दवा बन कर आई हूँ संघर्षों...

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नग्मों की साँसें रुक गई आज सरगम देखो अनाथ हो गई!

"विलक्षण प्रतिभा लता जी को शत-शत नमन सह श्रद्धांजलि" "गूँजती थी हर दिल में जो धड़कन बनकर वो शांत...

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सरस्वती वंदना

श्वेतवसना पद्यमासना तू ज्ञान का विस्तार दे,अज्ञानता का तिमिर गहरा तू सदा उबार दे।अभिमान मन में न कोई आये,पार कर लूँ मैं जीवन बाधाएं,मेरी लेखनी को सशक्त कर,इससे ही हर मुश्किल मिटायें।हंसासिनी...

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क्यूं रहते हो खामोश

क्यों रहते हो खामोश क्यों रहते हो खामोश तुम सदा, यही खामोशी तुम्हारी मुझे अखरती है, कभी तो कहो कुछ, कभी तो मुखर हो जाओ तुम, केवल सुनो ना मुझे,कभी तो अपनी बात कह जाओ तुम।ग़र नहीं कोई गलती...

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