केटेगरी : मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा

और कुछ दिनों बाद हम मनाएंगे महिला दिवस

आज भी कहाँ कुछ बदला है कुछ महिलाओं के लिए। भूखे भेड़िये बन गए है लोग, दहेज की लालच में कितनी बेटीयाँ कुर्बानी देती रहेगी। सुनकर खून खौल उठता है। शर्मसार होना चाहिए समाज को, गुजरात के अहमदाबाद में आयशा ने यह कहकर अपनी जान दे दी...

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महिलाएँ कैसे कर सकती हैं स्वयं की सुरक्षा...

अक्सर हम लड़कियों के साथ होने वाले अनहोनी वारदातों के बारे में पढ़ते-सुनते आए हैं । जब भी हम किसी ऐसी घटना के बारे में पढ़ते हैं तो हम दुखी हो जाते हैं और सोचने लग जाते हैं कि काश ऐसा न होता या ऐसा...

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महिला सशक्तिकरण में मीडिया का योगदान

वैसे तो 21वीं सदी में कुछ महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय अब तो ख़त्म ही होने चाहिए, पर शायद अभी कुछ सदियाँ और इंतज़ार करना पड़ेगा उस सुबह का जो हर महिला के लिए आज़ादी की किरणें उजागर करें, आज महिलासशक्तिकरण के लिए हर कोई...

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नशा आदतन या मजबूरी भाग - 2

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि , कैसे धीरे-धीरे अविनाश बीतते वक्त के बाद अपनी ही बनाई हुई काल्पनिक दुनिया में खोने लगता है और अविनाश का बदलता हुआ स्वाभाव मां की समझ से परे था | ऐसे ही मां ने एक दिन निश्चय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए...

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नशा आदतन या मजबूरी भाग -1

कहते हैं नशा बहुत बुरी चीज होता है जिसने आज हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जंजीरों में कैद करके रखा है पर क्या नशा करने वाला व्यक्ति कभी नशा छोड़ सकता है ? शायद हां या नहीं भी ? कहते हैं यदि अंदर से दृढ़ संकल्प या इच्छाशक्ति मजबूत हो...

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डायरी एक प्यारा दोस्त

कभी-कभी जुबाँ लड़खड़ा जाती है, नैंनो के पैमाने छलक जाते है तब मौन के शोर को दफ़न कर दो डायरी की कब्र में एहसासों का सुकून सभर बिस्तर होते है डायरी के पन्नें "आमतौर पर हमारी आदतों में एक आदत डायरी लिखने की भी होनी चाहिए" निजी जीवन...

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संयम और सहनशीलता खुद के ही विरुद्ध युद्ध

संयम ओर सहनशीलता का मतलब ? "खुद के ही विरुद्ध युद्ध"  कभी कभी संयम और सहनशीलता को कमज़ोरी की श्रेणी में रख दिया जाता है। हमारे मौन का मतलब लोग कुछ ओर ही निकाल लेते है और हमारे अस्तित्व के उपर प्रश्नार्थ लगा लेते है। ...

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तुमने सारे हक खो दिये हैं !

मान जाओ जरा ! रूक भी जाओ |अब यह सब कैसे कहूं मैं और अब किस रिश्ते से कहूं मैं ? तुमने तो एक ही पल में सब कुछ खत्म कर दिया अब ! शायद तुमने मुझे कमजोर समझ लिया पर , मैं कमजोर नहीं ! तुम्हारी जुदाई से मैं टूटने वाली नहीं | इतना सोचकर...

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आज खुश तो बहुत होगे तुम

दीवार फिल्म में अमिताभ बच्चन के द्वारा कहा गया या डायलॉग बहुत प्रसिद्ध हुआ और आज भी है। वे भगवान के सामने अपनी बात रखते हैं और कहते हैं । क्या हम भी यह बात आज किसी से कह सकते हैं ?क्या कोई सही में अब खुश है? सभी अपने ही गम और तनाव...

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कहीं वो कंट्रोलिंग रिलेशनशिप में तो नहीं है ?

नीता की शादी को पूरे सात साल हो चुके थे पर अब भी वो विनय के स्वभाव से परे थी | उसे विनय का स्वभाव समझ नहीं आ रहा था | यूं तो विनय , नीता को प्यार बहुत करता था पर कभी कभी विनय का रवैया नीता को चौंका देता अचानक ही विनय , नीता के...

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