केटेगरी : लघु कथा

बस का सफर

बात तब की है जब मीरा नयी -नयी मुंबई में आयी थी अपनी आगे की पढाई पूरी करने के लिए ,नयी थी शहर में तो शुरू -शुरू में अकेले रहना अख़रता था , भाई रहता उसके साथ पर उसका होना न होना मायने नहीं रखता था ,उसे घर के सारे काम करना , कॉलेज...

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मुझे भी हक है ख्वाब देखने का !

खुद के लिए आवाज नहीं उठा सकी थी रिया, पर आज उसने अपने बेटी के लिए आवाज उठा दी थी और पूरे घर की खिलाफ़त कर उसे कॉलेज के होने वाली नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी थी, और आज वार्षिकोत्सव के दिन अकेले ही अपनी बेटी के कॉलेज...

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चाय पकौड़े की साजिश

एक तरफ एफ एम पे बजता हुआ गाना, “हमें जब से मोहब्बत हो गयी है, ये दुनिया…., दूसरी तरफ रिमझिम बूंदे सोचिए दिल को ठंडक पहुंचाता हुआ कितना खुशगवार मौसम पर जाने क्यों मेरा मन चिढ़ा हुआ था, शायद इस चिढ़ की वजह सुबह से हमसफर...

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उड़ान भरने दीजिए

और कॉलेज कैसा चल रहा है?जी ठीक पापा |एक्जाम कब से शुरू हैं?अगले महीने से पापा | और लाइब्रेरी जा रही हो न रेगुलर, पढ़ने से दिमाग तेज होता है |जी पापा,पापा वो आपसे एक बात कहनी थी, हाँ कहो बेटापापा...

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आलू के गुलाबजामुन

माँ को आज अपने हाथ से गुलाबजामुन खिलाते हुए असीम तृप्ति का अनुभव हो रहा था, और मन अतीत के गलियारे में भटक रहा था | अम्मा ए अम्मा हमें भी खाने को गुलाबजामुन चाहिए, पैसे दो हम खरीद कर लाते हैं |बिट्टू रसगुल्ला खाने की हमरी...

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बिदाई की बेला

शादी में बस कुछ महीने का वक़्त बाकी था , मन में खुशियों और उमंगों का सागर था और साथ ही घर छूटने का दुःख। बाजार से बारीख़ी से जांच परखकर खरीदी गयी एक एक चीज़ ,घर से दूर होने के गम को धुंधला कर देती। तो कभी रात को माँ पापा के सोने...

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मामी आज खाने में क्या है ?

नानी नाना के घर की जीवित कहानियाँ हम सबको याद रहती हैं। खासकर की मई जून का महीना जैसे ननिहाल के लिए ही होता है। दादा दादी का साथ बहुत जल्दी छूट गया। उनका लाड प्यार कैसा होता है , इसकी ज़रा भी अनुभूति नहीं। मगर ईश्वर इतना निर्दयी...

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माँ मुझे माफ़ करना ! (लघु कथा )

माँ आज इस छोटे से खत में तुमसे माफ़ी माँगना चाहती हूँ। जानती हूँ ,तुम सोचोगी की माफ़ी क्यों ? हर सुबह जब मेरे स्कूल के लिए तुम लंच बॉक्स पैक करतीं थी ,तुम्हारे हाथ के बने वो नरम नरम पराठों की कीमत तब ना समझ पाने के लिए मुझे माफ़...

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