ज़िद्दी बच्चों को समझाएं कुछ इस तरह

अक्सर देखने में आता है कि कुछ बच्चे जिद्दी स्वभाव के होते हैं, एक बार कुछ कह दिया तो बस कह दिया । ना किसी की  सुनते हैं ना ही मानते हैं। ऐसे में माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी समझ नहीं पाते कि इन बच्चों को कैसे हैंडल किया जाए। कईं बार इनकी ज़िद्द इतनी बढ़ जाती है कि बेइज्जती का कारण भी बन जाती है।

ज़िद्दी बच्चों को समझाएं कुछ इस तरह

 अक्सर देखने में आता है कि कुछ बच्चे जिद्दी स्वभाव के होते हैं, एक बार कुछ कह दिया तो बस कह दिया । ना किसी की  सुनते हैं ना ही मानते हैं। ऐसे में माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी समझ नहीं पाते कि इन बच्चों को कैसे हैंडल किया जाए। कईं बार इनकी ज़िद्द इतनी बढ़ जाती है कि बेइज्जती का कारण भी बन जाती है।

मै अपने व्यक्तिगत अनुभव से समझती हूँ कि इन बच्चों को सही व्यवहार सीखने के लिए हमे बहुत विशेष प्रयत्न नहीं करने होते बल्कि छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर भी इन्हे ठीक राह पर लाया जा सकता है। आइये देखते हैं कुछ ऐसे ही साधारण तरीके :

सबसे पहले तो अगर बच्चा किसी ज़िद्द पर अड़ गया हैं तो आप बच्चे मत बनिये । अगर बात बहुत बड़ी नहीं हैं तो मान जाइये।

लेकिन जब दूसरी बार वह उसी बात को दोहराये तो उसे बताइये कि "लास्ट टाइम मैंने बात मानी थी तो अबकी बार तुम मानो।"

बच्चे को ज़िद्दी कहकर बुलाना उसकी ज़िद्द को और भी पक्का कर देगा , तो ऐसे कभी मत कीजिये।
हर बार डाँट डपट अच्छी बात नहीं हैं , अपनी बात को प्यार से कहिए।

हर बार कहकर नहीं बल्कि कभी-कभी उदाहरण प्रस्तुत करके अपनी बात बच्चे तक पहुँचाएँ।
 
बच्चे को कभी-कभी उसकी बात पर सीधे-सीधे "नहीं" ना बोलकर बल्कि उसका ध्यान यूँही किसी और बात पर लगाएँ।

उसकी छोटी-छोटी बातों की तारीफ करें।जब कभी भी उसका व्यवहार थोड़ा भी अच्छा हो तो उसकी तारीफ करना ना भूलें।

उसके बुरे व्यवहार पर सबके सामने उसे फटकार ना लगाएँ बल्कि अंदर ले जाकर अकेले में समझाएँ।

उसके व्यवहार को किसी और से तुलना ना करें बल्कि उसका ध्यान उसकी अच्छी बातों की तरफ दिलवाएं।

 
बच्चे को समझाएँ कि आत्मविश्ववास होना अच्छछा है लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं।

बच्चों को घर के छोटे-छोटे कामो में लगाएँ , जैसे कि बड़ो को खाना देना, माँ की रसोई में सहायता करना, अपनी अलमारी खुद व्यवस्थित  करना, स्कूल यूनिफार्म लगाना इत्यादि।  

बस ऐसे ही छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप उसके जिद्दीपन को बिन कहे ही बदल सकते है।

Madhu Dhiman

Pink columnist-Haryana

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