नवरात्रि से जुडी यह 9 रोचक बातें आपने पहले नहीं सुनी होंगी

नवरात्रि से जुडी यह 9 रोचक बातें आपने पहले नहीं सुनी होंगी

शरद नवरात्रि इस वर्ष 26 सितंबर, सोमवार से पूरे भारत में मनाई जायेगी। हर साल यह त्यौहार बहुत ही धूम-धाम और हर्ष उल्लास से मनाया जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस त्यौहार से जुडी अनगिनत कथाएं, तथ्य और बातें आपने सुनी होंगी। हर राज्य में अलग-अलग तरीके से इसे सेलिब्रेट किया जाता है जैसा कि हमने पिछले आर्टिकल- में आप सभी के साथ साझा किया था। 

इस ब्लॉग में नवरात्रि से जुडी 9 ऐसी रोचक बातें हम आपके लिए लेकर आये हैं जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना हो.

1.नवरात्रि शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है नव और रात्रि, नव का अर्थ है नौ और रात्रि का अर्थ है रात। नवरात्रि उत्सव 9 रातों तक मनाया जाता है इसलिए इसे नवरात्रि कहा गया। यह नवरात्रि साल में 5 बार 9 दिन के लिए आती है। नवरात्रि मानाने के महीने हैं: मार्च/अप्रैल, जून/जुलाई, सितम्बर/अक्टूबर, दिसंबर/जनवरी, जनवरी/फरवरी। इनमें से शरद नवरात्रि जो कि सितम्बर/अक्टूबर माह में मनाई जाती है, वह सबसे प्रमुख होती है।

2. नवरात्रि के दौरान लोग माँ दुर्गा के अनेकों अवतारों की आरधना करते हैं। जिनके नाम हैं: दुर्गा, भद्रकाली,अम्बा, अन्नपूर्णा देवी, सर्वमंगला, भैरवी, चंडिका, ललिता, भवानी, मूकाम्बिका।

3. हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर – असुरों का राजा आधा भैंस और आधा आदमी था। उन्होंने बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान ब्रह्मा की पूजा की और भगवान उनके समर्पण को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और इस प्रकार उन्हें कुछ भी मांगने के लिए कहा। इसलिए महिषासुर ने भगवान ब्रह्मा से उन्हें अमरत्व प्रदान करने के लिए कहा। भगवान ब्रह्मा ने कहा कि कोई भी आदमी उसे मार नहीं सकता।इसलिए महिषासुर सबसे शक्तिशाली और बलवान व्यक्ति बन गया और वह पृथ्वी और स्वर्ग दोनों पर शासन करना चाहता था और जल्द ही देवताओं के साथ युद्ध करना भी शुरू कर दिया।

महिषासुर के अत्याचार से परेशान होकर, सभी देवताओं ने महिषासुर का वध करने के लिए देवी दुर्गा की रचना करने का निश्चय किया। भगवान ब्रह्मा का वरदान था "कोई भी पुरुष महिषासुर को कभी नहीं मार सकता था"। इसका मतलब कि एक शक्तिशाली महिला उसे मार सकती थी। इस प्रकार देवी दुर्गा सभी देवताओं की सभी सर्वोच्च शक्तियों के साथ अवतरित हुईं और  यह मिशन सफल रहा।

4. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर देवी दुर्गा से विवाह करना चाहता था। देवी दुर्गा ने उसका यह प्रस्ताव नकार दिया था। मगर साथ ही देवी दुर्गा ने यह शर्त रखी थी कि यदि युद्ध में महिषसुर उन्हें हरा दे तब वे महिषासुर से विवाह करने कर लेंगी। यही युद्ध पूरे नौ दिन तक चला और अंत में देवी ने महिषासुर का सर धड़ से अलग कर दिया। केरला की एक और मान्यता के अनुसार महिषी-महिषासुर की बहन ने  इस युद्ध को अपने भाई की मृत्यु के बाद भी जारी रखा। 

5. भारत के पूर्वी भाग में मान्यता है कि दक्ष की पुत्री उमा या पार्वती जिन्होंने भगवान शिव से विवाह किया और कैलासा पर्वत पर गईं, हर साल नवरात्रि के दौरान इस धरती/ उनके माता-पिता के घर आती हैं। वह अपने चार बच्चों - लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश के साथ आती हैं। उनके दो सबसे अच्छे दोस्त या सखियां जिन्हें जया और बिजया के नाम से जाना जाता है, भी उनके साथ आती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि को सभी विवाहित महिलाओं के लिए घर वापसी के रूप में भी चिह्नित किया जाता है।

6.नवरात्रि के दौरान की गयी प्रार्थनाएं और भक्ति हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है। एक-दो दिन या फिर पूरे नौ दिन का उपवास हामरे शरीर से ज़हरीले टॉक्सिक को बाहर निकालने और रोगों से लड़ने   में मदद करते हैं। 

7. कुछ प्राचीन ऋषि-मुनियों और विद्वानों ने नवरात्रि को दिव्य शक्तियों का समुचित धन्यवाद करने का एक तरीका बनाया। क्योंकि यह दिव्य या आध्यात्मिक शक्तियां न केवल मानव जाति को शक्तियां प्रदान करती हैं बल्कि पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर घूमने के लिए पर्याप्त ऊर्जा भी देती हैं जो जलवायु में अन्य परिवर्तनों का कारण बनती हैं जिसके परिणामस्वरूप ब्रह्मांड में संतुलन होता है।

8. इन 9 दिनों को आगे तीन दिनों के सेट में विभाजित किया गया है और प्रत्येक सेट का कुछ महत्व है। पहले तीन दिनों के दौरान, देवी दुर्गा को एक शक्तिशाली शक्ति के रूप में बुलाया जाता है। उन्हें दुर्गा के रूप में पूजा जाता है जो सभी अशुद्धियों, बुराइयों और दोषों को नष्ट करने के लिए पृथ्वी पर आती हैं। अगले तीन दिनों में, उन्हें लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है जो धन और आनंद प्रदान करती हैं। पिछले तीन दिनों से, लोग सरस्वती अवतार की पूजा करते हैं जो सभी शिक्षाओं का सर्वोच्च स्रोत है।

9. दशहरा नवरात्रि के अगले दिन मनाया जाता है। इसके पीछे भी एक अलग इतिहास है। भगवान राम ने इस दिन श्रीलंका में राक्षस राजा रावण के खिलाफ युद्ध जीता था। इसलिए, उस जीत को चिह्नित करने के लिए, लोग रावण के बड़े पुतले बनाते हैं और उन्हें जलाते हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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