एक पाती 2020 के नाम

एक पाती 2020 के नाम

प्रिय अप्रत्याशित वर्ष 2020,                दिःनांकः 02/12/2020

सर्वप्रथम तेजी से गुज़रते हुए इस अप्रत्याशित वर्ष 2020 का मैं अपने ह्रदयतल से आभार व्यक्त करना चाहती हूँ। निश्चित तौर पर यह वर्ष, मेरे अब तक बीते जीवन के अन्य वर्षो की तुलना में काफी अप्रत्याशित रहा है। मगर अपने तमाम कड़वे अनुभवों के साथ, ये वर्ष हमें कभी ना भूलने वाली एक गहन सीख भी दे गया है।निश्चित तौर पर इस वर्ष  ने हमें मानवता, सकारात्मक सोच, नि:स्वार्थ प्रेम और आपसी सौहार्द का पाठ भी पढ़ाया। समय के इस कभी ना भूल सकने वाले अनुभव ने कहीं ना कहीं हमें एक बेहतर इंसान बनने में भी मदद की है।

लगभग, साल 2020 की शुरुआत में कोरोना नाम के इस एक वायरस ने ना सिर्फ हमें, बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। शुरुआत में हम सभी को यह भ्रम था कि,  दूसरे देशों में शुरू हुई इस आपदा का हमें तो दूर-दूर तक कोई खतरा नहीं है। मगर कोई ये नहीं जानता था कि धीरे-धीरे ये वायरस सम्पूर्ण विश्व को अपनी चपेट में ले लेगा।

 गुजरते वक्त के साथ इस वायरस ने पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मचा दी। काॅविड-19 के प्रकोप से कही भी, कोई भी नहीं बच पाया। जिस प्रकृति को हम लोगों ने अपने निजी स्वार्थ की खातिर, एक खिलोना मात्र बना दिया था, और अपने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी,उसी प्रकृति ने एक निमित मात्र वायरस से हम सभी को यह बतला दिया, कि अपने स्वार्थ और ताकत के नशे में कहीं ना कहीं हम स्वयं अपने ही सर्वनाश को आमंत्रित कर रहे हैं।

लॉकडाउन के कारण जहां प्रकृति ने खुलकर सांस ली,  वही हम सब ने भी ये सीखा कि, बिना लग्ज़री के सिर्फ आधारभूत सुविधाओं के सहारे भी सादा-सरल जीवनयापन सँभव है।

इस बीते वर्ष मे हम 'फ्रंटलाइन काॅविड वाॅरियर' के सबसे ज्यादा शुक्रगुजार है। उनकी निस्वार्थ सेवा ने मानवता का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया । कही ना कही इस वायरस ने आम इंसान को भी इंसानियत का पाठ पढ़ा कर पहले से ज्यादा संवेदनशील बनाया हैं। हमें अपने रिश्तों, समाज के प्रति कर्त्तव्यों और पर्यावरण के प्रति पहलें से कही ज्यादा जागरूक और जिम्मेदार बना दिया।

हालांकि कई लोगों ने इस वर्ष में इस आपदा के कारण अपने अपनों को,अपने सपनों को, नौकरियों और व्यापार को और अपने जीवन तक को भी खो दिया है। मगर जिस तरह हर काली रात के बाद एक नया सूर्योदय होता है और नया सवेरा गहरे से गहरे अँधेरे को हर लेता है, हमें पूरा यकीन है, इस भयावह वायरस का अंत भी नज़दीक ही है, और इसके अंत के साथ ही सकारात्मकता,प्रेम, एकता, सदभाव और विकास का उजाला चारों ओर फैलगा और संपूर्ण विश्व मे फिर से वसुधैव-कुटुंबकम की नीति वाली नई सुबह का आगाज़ होगा।

 इसी सकारात्मक सोच के साथ तेज़ी से बीत रहे, इस गुज़रते वर्ष को, उसकी दी हुई अभूतपूर्व सीख के लिए कोटि-कोटि नमन।

एक बेहतर खूबसूरत आने वाले वर्ष के इंतज़ार मे,

आपकी,

सकीना साबुनवाला।

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