आखिर यह मज़ाक क्यों??

आखिर यह मज़ाक क्यों??

मानव सभ्यता का एक सबसे सभ्य प्राणी माना जाता है। उसे अन्य प्राणियों से अधिक विकसित दिमाग वह शरीर प्राप्त है। पर कोई भी इंसान अपने में पूर्ण नहीं होता है, अगर हमने पौराणिक कथाएं पढ़ी या सुनी, देखी हो तो उसमें ईश्वर माने जाने वाली शक्ति में भी पूर्णता नहीं दिखाई देती है। ईश्वर द्वारा बनाया क्या हुआ प्राणी अपने आप में पूर्ण कैसे हो सकता है? और हम दूसरों की अपूर्णता का मज़ाक बनाकर उसे एक अपराधिक बोध कराए बिना नहीं मानते। आदि काल से ही शारीरिक , मानसिक कमजोरियों को आधार बनाकर दूसरे लोगों की जाने या अनजाने में मज़ाक उड़ाते आ रहे हैं। शरीर के रंग, आकार आदि के आधार पर व्यक्ति विशेष को हीन भावना से ग्रसित किए बिना नहीं रहे हैं।

आधुनिक युग में इस शारीरिक मज़ाक को एक शब्द मिल गया है जिसे "बॉडी शेमिंग "कहा जा रहा है। जब कोई व्यक्ति किसी की शारीरिक विशेषताओं या बनावट का मज़ाक उड़ाता है तो उसे बॉडी शेमिंग कहते हैं। एक सामान्य व्यक्ति से लेकर सेलिब्रिटी तक बॉडी शेमिंग का शिकार हो रहे हैं। लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शरीर के रंग, शरीर के आकार, गंजेपन, चर्म रोग से ग्रसित व्यक्तियों का मज़ाक बनाए बिना नहीं मानते ,मानों उन्हें दूसरों को मानसिक रूप से परेशान करने में आनंद मिलता हो पर वह यह भूल जाते हैं कि उनमें भी कई कमियां हैं। कोई व्यक्ति अगर मोटा, अत्यधिक पतला, काला,  सांवला हो ,तो उसे एक आपराधिक बोध कराए बिना समाज के कुछ लोग चैन से नहीं बैठते। उसके  गुणों की अनदेखी कर उन्हें समाज में मज़ाक का पात्र बना देते हैं। आजकल लोक सोशल मीडिया के साधनों का उपयोग बॉडी शेमिंग के लिए खुलेआम प्रयोग में ला रहे हैं। एक सामान्य व्यक्ति से लेकर सेलिब्रिटी तक को बॉडी शेमिंग का शिकार होना पड़ रहा है। सोशल मीडिया में आजकल एक शब्द बहुत प्रचलित है वह है "ट्रोल"। आए दिन कोई ना कोई व्यक्ति या फिर सेलिब्रिटी को उनके कपड़ों, शारीरिक बनावट आदि को लेकर ट्रोल करते रहते हैं। बॉडी शेमिंग रोज की बातचीत में मस्ती मज़ाक, चुटकुलों, निंदनीय टिप्पणी, अवांछित सलाह के रूप में शामिल होती जा रही है। अगर कोई व्यक्ति मोटा है तो उसे चाहे अनचाहे लोग अनगिनत सलाह वजन कम करने की दिये बिना नहीं मानते, वहअपनी पसंद के कपड़े, व फैशन भी नहीं कर सकता उसी प्रकार अगर कोई व्यक्ति सांवला या काले रंग का है तो लोग उसे कुछ चुनिंदा रंगों के कपड़ों का उपयोग  करने की सलाह  देते हैं, हम लोग अपनी बौद्धिक कुशलता के कारण चांद में बसने की सोच रहे हैं वहीं दूसरी ओर हमारी सोच व्यक्तियों की शारीरिक व मानसिक कमजोरी को लेकर अभी तक नहीं बदली है। हमें किसी भी व्यक्ति को उसके रंग -रूप, मोटे -पतले  को मापदंड बनाकर उसके गुणों की अनदेखी कर बैठते हैं। जिससे वह व्यक्ति विशेष मानसिक रूप से बहुत आहत होता है। हर एक व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से संबंधित बातों का, दूसरों से ज्यादा ख्याल रखता है, अवांछित सलाह उसके मानसिक व शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। बॉडी शेमिंग के शिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हानि पहुंचती है। आत्मसम्मान कम होता है, चिंता, अवसाद की भावना के कारण कई मानसिक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है, बॉडी शेमिंग के आधार पर किया जाने वाले अभद्र मजाक  डिप्रेशन में डाल देते हैं। जो व्यक्ति स्वयं किसी योग्य नहीं होते वह सामने वाले व्यक्ति के  गुणों का सामना करने योग्य नहीं होते तो उन्हे नीचा दिखाने के लिए उनकी शारीरिक व मानसिक कमजोरी ढूंढ कर, दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें नीचा दिखाने के लिए बॉडी शेमिंग का उपयोग करते हैं। दूसरों की मज़ाक उड़ाने  वाले व्यक्ति स्वयं मानसिक रूप से बीमार होते हैं अपनी अपूर्णता को छुपाने के लिए वह दूसरों की खामियों को ढूंढते हैं ,वह यह भूल जाते हैं कि कल जिंदगी उनके साथ ऐसा कुछ कर सकती है कि वह स्वयं मज़ाक का परिचायक बन सकते हैं। अगर हर व्यक्ति इस तरह की सोच रख ले कि अगर हम किसी की मज़ाक उड़ाते हैं तो कल कोई हमारी भी मज़ाक उड़ा सकता है तो शायद बॉडी शेमिंग जैसी कुरीति से समाज को मुक्ति मिल सकती है। बॉडी शमिंग के शिकार व्यक्तियों में भी आत्मविश्वास की कभी कमी नहीं होनी चाहिए उन्हें सामने वाले को बहुत बहादुरी से जवाब देना आना चाहिए। अपनी क्षमताओं को समझ कर उन्हें इतना उभार देना चाहिए कि उनकी शारीरिक कमजोरी उनकी सबसे बड़ी शक्ति बन जाए। अपने अंदर कभी भी किसी भी तरह की हीन भावना पैदा नहीं होने देनी चाहिए अपने गुणों का बखान करना भी आना चाहिए, हर व्यक्ति  का अपनी एक विशेष शारीरिक, मानसिक विशेषता व योग्यता होती है जो कोई दूसरा नहीं ले सकता। बॉडी शेमिंग करने वालों के सामने मानसिक व शारीरिक रूप से इतने मजबूत हो जाए कि वह खुद ही शर्मिंदा होकर पानी पानी हो जाए। हम अपनी जीवनशैली बदल कर एक स्वस्थ शरीर के साथ उच्च कोटि का मानसिक स्तर प्राप्त कर सकते हैं। और बॉडी शेमिंग करने वाले व्यक्तियों के लिए कई आपराधिक कानूनी धाराएं भी लगाई जा सकती हैं। इन सबसे अच्छा एक ही उपाय है कि हम अपनी मानसिकता को बदलें तथा समाज के हर व्यक्ति विशेष को उनके गुणों के आधार पर आंके ना कि उनकी शारीरिक बनावट के। इस जगह से हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहायक हो सकते हैं।

#NoMoreBodyShaming

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