आखिरी सांस तक

सच्ची दोस्ती वह खूबसूरत गहना है, जो हर किसी को मुश्किल से ही नसीब होता है। अगर किसी को मिल भी जाता है ,तो आप पर खूब सजे, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। क्योंकि ऐसे गहने पहनने का क्या फायदा जो आपको चुभन दें।

आखिरी सांस तक

सच्ची दोस्ती वह खूबसूरत गहना है, जो हर किसी को मुश्किल से ही नसीब होता है। अगर किसी को मिल भी जाता है ,तो आप पर खूब सजे, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। क्योंकि ऐसे गहने पहनने का क्या फायदा जो आपको चुभन दें।
ऐसी ही अनमोल दोस्ती थी अजय और विजय की।दोनों का एक दूसरे के बिना एक पल भी रहना बड़ा मुश्किल था। बचपन से साथ -साथ पढ़े , साथ ही कॉलेज खत्म किया और फिर दोनों की शादी हुई। अजय के दो बच्चे थे, एक बेटा, एक बेटी और विजय के दो बेटे थे।
अजय की उम्र 50 वर्ष की थी तो उसे अचानक एक गंभीर बीमारी ने घेर लिया ,जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। इधर अजय की बेटी शादी के लायक हो गई ।अजय की पत्नी सीमा ,अपनी बेटी के लिए कितने ही रिश्ते देखतीं, लेकिन हर लड़के वाला यह कहकर रिश्ता ठुकरा देता ,कि बिन बाप की बच्ची से हम अपने बेटे का विवाह नहीं कर सकते। 
यह बात सीमा के अंतर्मन को पूरी तरह से हिला देती थी। उसका मनोबल कमजोर पड़ जाता था, कि इस तरह मेरी बेटी का विवाह कैसे होगा। सीमा के इस मुश्किल घड़ी में आखिरकर विजय ने ही साथ दिया, उसने कहा -भाभी! आपकी बेटी आज से मेरी बहू हुई। अजय के साथ मैं अपने किए हुए वादे को नहीं भूल सकता ।क्योंकि मैंने उसका साथ ताउम्र निभाने का वादा किया था। क्या अगर आज वह दुनिया में नहीं है, तो उसकी जिम्मेदारियों को मैं भूल जाऊं? मैं अपनी आखिरी सांस तक अपनेे मित्र को दिए गए वचन का पालन करूंगा।
विजय की इन बातों को सुनकर ,सीमा की आंखों से आंसू झड़ने लगे ।वह बोली- भैया! आपने यह कहकर मेरी सारी दुविधा को दूर कर दिया।
वास्तव में भगवान विजय जैसा दोस्त सबको दे। क्योंकि उसने अपने दोस्त की अनुपस्थिति में भी ,अपनी सच्ची दोस्ती का प्रमाण प्रस्तुत कर ,समाज के लिए एक मिसाल तैयार कर दी।
#हर एक फ्रेंड जरूरी होता है
#द पिंक कॉमरेड
#द ब्लॉगिंग कॉन्टेस्ट
पारुल हर्ष बंसल

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