आओ स्वच्छंद पंछी सा जीवन जी लें

आओ स्वच्छंद पंछी सा जीवन जी लें

वो मीठे पल

आओ सखियों, जिम्मेदारियों के इस खूबसूरत शिकंजे से, 

कुछ क्षण के लिए स्वच्छंद पंछी सा जीवन फिर से जी लें।

मीठी यादों और सुंदर ख्वाबों के पल स्मरण करते हुए 

कभी भूत में और कभी भविष्य में विचरण कर लें।

याद कर लें उन हँसी-ठिठोलियों को 

कॉलेज से आते, राह में चलते … जो बस यूँ ही बिखेरी थी

कभी कुल्फ़ी का मज़ा लेते हुए और 

कभी किसी की चमकती आँखों को देखकर 

आओ सब मिलकर कुछ पल जी लें 

कभी गर्मागर्म समोसों तो कभी सहेलियों के घर याद कर लें।

 

एक दूसरे की छतों पर चढ़कर माँ की डाँट से बेखबर 

कभी किताबों में घंटों बिताकर भी कुछ समझ ना आना

रामलीला मैदान में रावण जल जाने के बाद भी 

किसी राम के आने का इंतजार करना 

आओ सब मिलकर कुछ पल जी लें 

माँ और भाई की अनसुनी डाँट को अपने सीनों में सी लें। 

परीक्षाओं में भी हम सब का जरूरी सामान घर में भूलना

फ्लाइंग के आ जाने पर पर्ची की जगह मेकअप का सामान मिलना 

फिर भी ना घबराना , ना शर्माना और 

फिर ऑफिसर का भी हमारी बातों में फँस जाना 

आओ सब मिलकर कुछ पल जी लें 

कभी पसंदीदा प्रोफ़ेसर-कभी किसी खडूस को याद कर लें।

 

कभी किसी छोटे-किसी मोटे तो 

कभी किसी बदसूरत से क्लास मेट का तारीफ़ करना

उससे भी खुद में हेमा-रेखा और माधुरी की फील ले लेना

कभी किसी डरावने ख्याल से डरना तो 

कभी किसी राजकुमार के सपने लेना

आओ सब मिलकर कुछ पल जीलें 

कभी किसी अंजाने तो कभी किसी अपने को याद कर लें ।

आओ सखियों, जिम्मेदारियों के इस खूबसूरत शिकंजे से ,

कुछ क्षण के लिए स्वच्छंद पंछी सा जीवन फिर से जी लें।

मधु धीमान

पिंक कॉलमनिस्ट-हरियाणा

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