आपकी समझदारी बच्चे बनेंगे सहज

आपकी समझदारी बच्चे बनेंगे सहज

 किशोरावस्था आते-आते बच्चों में शारीरिक बदलाव दिखाई देने लगते हैं।जिसका प्रभाव उनके व्यवहार पर पड़ता है।मनोवैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो सेकेंड्री चेंजेज़ आने पर किशोरउम्र के बच्चों में उत्सुकता-कौतुहल- जिज्ञासा जन्म लेती है वह  शारीरिक  बदलाव के विषय में जानना चाहता है। एेसे में प्रत्येक माता-पिता का दायित्व बनता है कि वह बच्चों के साथ इन  शाकीरिक बदलावों के बारे में खुलकर चर्चा करें और उन्हें इनके बारे समझाएं ताकि बच्चा आसानी से इन परिवर्तन को स्वीकार करे और सहज बना रहे। उसकी प्रत्येक बात को स्वयं भी समझें और समझाएं कि यह सब नॉर्मल है ।उनके साथ दोस्ताना अंदाज़ रखा जाए क्योंकि ये समय पेरेंट्स और बच्चे  दोनों के लिए ही चैलेंजिंग होता है।
 

लड़कियों की बात करें तो मासिक -धर्म  के लिए उनका शरीर विकसित हो चुका होता है ।इसलिए किशोरावस्था के शुरूआत में ही लड़कियों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। मिसेज़ पुरोहित आज 14 साल की बेटी की माँ हैैं। बताती हैं कि मेरी बेटी जब 12 सील की हुई तो मैंने उसकी काउंसलिंग की।तब तक उसे मासिक -धर्म के बारे में कुछ नहीं पता था ।तब मैंने उसे समझाया कि अब तुम बड़ी हो रही हो । तुम्हें लगता है न!जब तुम शीशे में देखती हो तुम पहले से भी ज़्यादा सुंदर होती जा रही हो।
 

अभी तुम्हारे शरीर में कई बदलाव आएेंगे,तब घबराना नहीं।मुझे बताना। फिर मैंने उसे मासिक - धर्म क्यों होता है?कैसे होता हैऔर नारी के लिए ये कितना महत्वपूर्ण है सब कुछ कहानी की तरह बता डाला। उसे समझ आ चुका था। कुछ दिनों बाद स्कूल में वर्कशॉप हुई, किशोरावस्था की लड़कियों को मासिक धर्म के बारे में बताया गया और सेनेट्री नैपकिन दिए गए ।बेटी ने आकर मुझे सब बताया तब में आश्वस्त हो गई कि जब भी उसे पीरियड स्टार्ट होंगे वह घबराएगी नहीं ।

उसके बाद से मैंने उसके स्कूल बैग की हिडेन पॉकेट में पैड रखना भी शुरू कर दिया ।ताकि अचानक ज़रूरत पड़ने पर वह इस्तेमाल कर सके ।हाँ ये बात उसे पहले ही समझा चुकी थी कि यदि स्कूल में पीरियड आ जाए तो क्लास टीचर को शेयर कर मुझे सूचित करा देना  ।फिर मैं मैनेज कर लूंगी।  इस तरह से बेटी को अच्छे से पीरियड के लिए पहले से तैयार करने का मेरा प्लान सफ़ल रहा ।वक़्त ने साथ दिया छुट्टीयों में मेरी बेटी को पहली बार पीरियड हुआ ।उसने मुझे जैसे ही बताया मैंने उसका माथा चूमा।उसके चेहरे पर तनाव  नहीं था,हम दोनों माँ-बेटी सहज महसूस कर रहे थे ।
   

दोस्तों मेरी ये पोस्ट कैसी लगी?अपने सुझाव अवश्य दीजिएगा।
 डॉ यास्मीन अली।

 #myfirstperiod
   

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