आत्म हत्या एक लड़ाई अपने आप से

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ---अपने अंर्तमन से लड़ नहीं पाये।और आत्म -हत्या कर ली।जिंदगी की परतें उधेड़ती ,एक सुपरिचित सच्चाई ,जहां परिस्थितियां बड़ी और जिंदगी छोटी हो जाती है।आत्म-हत्या एक लड़ाई है,अपने आप से।यह जीवन से निराशा की चरम अभिव्यक्ति है।अपने अंर्तमन से लड़ते हुये हार जाना ही आत्महत्या का अंतिम रुप है।

आत्म हत्या एक लड़ाई अपने आप से

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ---अपने अंर्तमन से लड़ नहीं पाये।और आत्म -हत्या कर ली।जिंदगी की परतें उधेड़ती ,एक सुपरिचित सच्चाई ,जहां परिस्थितियां बड़ी और जिंदगी छोटी हो जाती है।आत्म-हत्या एक लड़ाई है,अपने आप से।यह जीवन से निराशा की चरम अभिव्यक्ति है।अपने अंर्तमन से लड़ते हुये हार जाना ही आत्महत्या का अंतिम रुप है।

आत्मघाती पल,उसकी पीड़ा--उसके भीतर लड़ने की ताकत से कहीं अधिक गहरे है।यह लगातार नकारात्मक आत्म विश्लेषण घटनाओं और निराशा की श्रृंखला का दुर्भाग्यपूर्ण तीव्र,लेकिन सोचा-समझा परिणाम है।जिसका सीधा संबंध ,पारस्परिक रिश्तों की उपेक्षाओ,अपेक्षाओं और जीवन में मिली,असफलता,अवसाद आदि विषयो से है।

जीवन के अंत का विचार आमतौर पर जिंदगी की थकी-हारी परिस्थितियो में ही आता है--जहां आप दर्द से मुक्ति के लिये ये कदम उठाना चाहते है---वहां थोड़ी देर के लिये अपने आप से दूरी बना लीजिये।और सकारात्मक लोगों से जुड़िये,जो जीवन के प्रति आशावान है।अपने संकट के वक्त को अकेले मत काटिये।उसे दूसरो के साथ बाँटिये।हो सकता है।

ऐसा करते वक्त आपको अपनी लड़ाई में वह अतिरिक्त साधन मिल जाये जो आपके संतुलन,आपकी ऊर्जा,आपकी इच्छा शक्ति को पुनः निर्माण कर दे।अपनी अतृप्त इच्छाओ को उद्देश्यो से मिलाओ,उम्मीदें आकाश हो जाती है,अगर आकाश के रंग जिंदगी में मिला लो।मौजूदा पलो से निकल कर बचपन के उन गलियारों में चले जाओं जहां बरसात का पानी और कागज की नाव थी--पर फिर भी नाव के तैरकर निकल जाने की अथाह खुशी थी--

फिर क्यूं आज जब किसी ने तोड़ा तुम्हारे विश्वास का आईना-हर टुकड़ा संभाल कर रखा है तुमने-जब कभी सुने आक्षेप ,हर इल्जाम को सहेजा तुमने--बीतते वक्त की नब्ज नहीं छोड़ी तुमने। 

चाहे हर खूबसूरत पल सिसकियां लेता रहा,काश की तुम जमा कर पाते,हर उस क्षण' का हिसाब,जब मौत ने तुमसे जिंदगी मांगी थी,लम्हों की नाराजगियों में एक मंत्र तुमने सीखा हाेता। ये वक्त भी गुजर जायेगा--जिंदगी फिर तुम्हें जिंदा नजर आने लगती----

समर्पित- 

सुशांत सिंग राजपूत my favorite

मंजु श्रीवास्तव

What's Your Reaction?

like
2
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
1
wow
0