अब मैं अपने लिए जीऊँगी

जैसे ही अमन ने कहा कि क्या जरूरत है तुम्हें नौकरी करने की , तुम नौकरी नहीं करोगी । कोई क्या कहेगा कि इतने बड़े घर की बहू और यह छोटी-मोटी नौकरी कर रही है- यह सब सुनकर रूचि के पैरों तले जमीन खिसक गई।  

अब मैं अपने लिए जीऊँगी

जैसे ही अमन ने कहा कि क्या जरूरत है तुम्हें नौकरी करने की , तुम नौकरी नहीं करोगी । कोई क्या कहेगा कि इतने बड़े घर की बहू और यह छोटी-मोटी नौकरी कर रही है- यह सब सुनकर रूचि के पैरों तले जमीन खिसक गई।  

वह सोच रही थी क्या यह वही अमन है जो शादी से पहले उसके लिए कुछ भी करने को तैयार था । उसकी हर छोटी- बड़ी इच्छा का भी ध्यान रखता था ।

यह सब सोचते-सोचते वह नीचे बैठ गई और पहुँच गई अतीत की यादों में । ये वो यादें थीं जहाँ सिर्फ प्यार-विश्वास और मस्तियाँ ही थीं। 

माँ-बाप की इकलौती-लाडली बेटी रुचि देखने में बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। खूबसूरत ऐसी कि एक बार कोई देखे तो बस देखता ही रह जाए । साथ ही वह पढ़ाई में भी बहुत होशियार थी । माँ-बाबा को भी रुचि पर बहुत गर्व था। होता भी क्यों ना , आखिर ऐसी होनहार बेटी बहुत भाग्य से मिलती है ।

रुचि एम.एस.सी. कमिस्ट्री पूरी कर चुकी थी और अब बी.एड. में एडमिशन ले रखा था । रुचि के माँ-बाबा जब भी कभी अपने परिवार में उसकी शादी की बात करते तो रिश्तेदार यही कह देते कि इतनी खूबसूरत लड़की के लिए भला लड़कों की कमी है क्या, इसे तो कोई भी देखते ही पसंद कर लेगा। 

रुचि की बी.एड.तकरीबन-तकरीबन पूरी होने वाली थी । इस दौरान उसने प्राध्यापक योग्यता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर लिए थी। उसे पूरी उम्मीद थी कि वह स्क्रीनिंग और इंटरव्यू भी बड़ी ही आसानी से क्लियर कर लेगी। 

इसी बीच क्यों ना दिल्ली वाली मासी की बेटी की शादी का बुलावा आ जाता है । रुचि की भी मासी की बेटी के साथ खूब बनती थी । इसलिए उसको शादी में जाना जरूरी लग रहा था । 

शादी वाले दिन रूचि दुल्हन के साथ-साथ ही थी । दूल्हे का एक खास दोस्त जिसकी नजरें लगातार रुचि पर ही टिकी हुई थी । विदाई के समय वह रूचि को धीरे से कह गया कि हम फिर दोबारा जरूर मिलेंगे । रुचि सोच में पड़ गई कि वह ऐसा क्यों कह रहा है पर उसने इन सब को इग्नोर करना ही बेहतर समझा ।

अभी तो उन्हें शादी से आए केवल दो ही दिन हुए थे कि मासी जी का फोन आ जाता है और वह दूल्हे के उसी दोस्त 'अमन' के लिए उसका हाथ माँगती है ।

माँ-बाप यह सोचकर हाँ कर देते हैं कि अमन एक पढ़ा-लिखा लड़का है और साथ ही बड़े व्यापारी का बेटा होने के कारण पैसे की भी कोई कमी नहीं थी और रिश्ता माँग कर रहे थे तो ना का कोई कारण भी नहीं था।

रुचि भी जब अमन से.मिली तो उसे वह अपने सपनों का राजकुमार लगा। उसने आगे पढ़ने और नौकरी करने की इच्छा भी अमन के आगे रख दी थी।अमन ने भारत यह कह कर विश्वास दिलाया था कि हम दोनों मिलकर एक दूसरे के सपने पूरे करेंगे ।

शादी के बाद सब कुछ अच्छा ही चल रहा था । स्टेटस लैवल में अंतर होने के कारण रुचि को थोड़ा कंफर्टेबल महसूस तो नहीं होता था , पर वह अपने मन के भावों को छुपाने और एडजस्टमेन्ट करने की कोशिश करती रहती थी।  

नौकर-चाकर होने के कारण उसे घर का कोई काम नहीं करना पड़ता था । उसका तो बस एक ही काम था सबको खुश रखना । 

कभी अमन उसे कहता कि आज पार्टी में जाना है , वन पीस पहनकर अच्छी तरह तैयार हो जाना। 

कभी सासू माँ के साथ किट्टी जाना है तो बढ़िया साड़ी पहनकर अच्छे से तैयार होना ।

कभी छोटी ननद के साथ कहीं जाना है तो स्कर्ट वगैरह पहन कर अच्छी तरह तैयार होना।

शायद वह अपने लिए अपने अनुसार तैयार होना भूल ही गई थी।

लेकिन अब जब रुचि का प्राध्यापक इंटरव्यू कॉल लेटर आता है तो वह अमन का बदला रूप देखकर हैरान हो जाती है । कहाँ गए अमन के सारे वादे….यही सोच रही थी कि उसे अमन की आवाज़ आती है।

तभी वह अतीत की किताब बंद कर वर्तमान में वापिस आती है।

और तभी वह खड़ी हो जाती है और अलमारी का दरवाज़ा खोलकर अपने सर्टिफिकेट्स फाइल बाहर निकालती है । अमन- क्या कर रही हो ???

रुचि- इंटरव्यू के लिए तैयारी कर रही हूँ। 

अमन - मैंने तुम्हें कह दिया कि तुम नौकरी नहीं करोगी। हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है ।

रुचि (दृढ़ शब्दों के साथ) हाँ , मैं जानती हूँ कि हमारे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन मैं अपने मन की खुशी के लिए इंटरव्यू देने जाऊँगी और यह कहकर वह अपनी फाइल को सहेजने लग जाती है ।

वह मन ही मन यह सोच चुकी होती है कि यह मेरा जीवन है और अब इसे मैं अपने ढंग से जीऊँगी । मैं अपना जीवन अपने लिए जीना चाहती हूँ ।

Madhu Dhiman

Pink Columnist - Haryana

#Mylifemychoices

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