अरे अब तो सोच बदलो

अरे अब तो सोच बदलो

आज हम इक्कीसवीं सदी में हैं जहाँ से एक नई सोच शुरू होती है।सोच आधुनिककरण की,सोच आधुनिकता की,सोच मशीनरी की और सोच विश्व मेंं ताकतवर बनने की।यह तो वह सोच है जो बस एक दूसरे का मुकाबला कर साम,दाम,दंड,भेद से येन प्रकारेण आगे बढ़ने की होड़। तो वहीं दूसरी ओर वह सोच कि यह लड़की काली है,नहीं इसकी लंबाई मेरे से कम है,अरे ये तो बुलडोजर के जैसी है कौन करेगा ऐसी बड़े दाँतों वाली लड़की से शादी।यह सिर्फ हमारे देश की सोच नहीं है।इसके साथ-साथ विश्व के सभी देश शामिल हैं जहाँ रंग-भेद को बड़े जोर शोर से हो रहा है।

एक व्यक्ति दो सोच...यह आज के समय सही चरितार्थ हो रही है।अरे कब तब ऐसी दोहरी सोच में जियोगे।सबसे ज्यादा हॉट टॉपिक होता है एक लड़की का लड़के से बात करना...इसमें सबसे ज्यादा निंदा रस का मजा लेते हैं जो आपके अपने करीबी बनने की कोशिश करते हैं।वो कहते हैं न आधी-अधूरी जानकारी खतराए-जान।अब इस दुनिया में ही दो ही बुद्धिजीवी हैं-एक स्त्री दूसरा पुरूष।अब जमाना बदला है महिलाएं भी पढ़ रही हैं,नौकरी कर रही हैं।पुरुषों से कंधे से कंधा मिला रहीं हैं....दो चार बात क्या कर ली बतंगड़ ही बन जाता है।समझो इश्क ही हो गया।

एक महिला को झुकाने में पूरा-पूरा सहयोग करती है उसकी परिचित या करीबी महिला।एक सास अपने बेटे के लिए पत्नी नहीं कोई रोबोट ढूँढने की कोशिश करती है जिसके कंधोंं पर अपने जीवन का कार्यभार डाल सकें और फिर बाद में अच्छे से दूसरों के सामने बुराई कर सकें।

आखिर कब तक लड़कियों को लंबाई-चौड़ाई,गोरी-काली से नापा जायेगा?अगर आप किसी को जज कर रहें तो क्या आप इस दुनिया में सम्पूर्ण हैं मतलब कि ऐंटिक पीस हैं।क्या सब आपसे खुश हैं या आप सबसे खुश हैं?नहीं न तो फिर!

अगर कोई लड़की काली है या मोटी या छोटी,,यह उसको प्रकृति प्रदत्त है और सबसे बड़ी बात वह खुुुद शारीरिक कमियों से परिचित है।अरे उसे आगे बढ़ने केे लिए दो शब्द न बोल सको तो गिराने की मत सोचो।

माना इंग्लिश इंटरनेशनल लैंग्वेज है और अगर आपकी दोस्त, पत्नी, मां,बहन या किसी परिचित को नहीं आती और आप इंग्लिश के मास्टर हैं और आप उन्हें कटाक्ष कर रहे हैं तो एक बात बताइए क्या आपको फ्रेंच आती है या आप चाइनीश बोल लेंगे।नहीं न!क्या हुआ अगर माँ अपनी गाँव की भाषा को बोल रही हैं क्या आप उनके प्यार को तौल पाओगे?

अगर किसी लड़की की सगाई या शादी होते होते रह गई या किन्हीं कारणों से तलाक हो गया तो उसकी जिम्मेदारी लड़की ही क्यों?क्या हम उसके घर देखने गए थे या उसने हमसे राय माँगी।नहीं न फिर हम कौन उसे जज करने वाले।

हालत ये हो गई है जनाब अपने घर क्या हो रहा है?हम कैसे हैं?उससे मतलब नहीं पर हमें झांकना तो सिर्फ़ दूसरे घर है।अरे देश के कर्णधारों क्यों किसी लड़की का मजाक बना रहे हो।अरे वह तो तुम्हें नजरंदाज़ करके कबका आगे बढ़ गई और तुम वहीं का वहीं रह गए।

(यह पोस्ट व्यंग्यात्मक शैली में लिखी गई है।इस शैली में मेरा यह प्रथम प्रयास है।इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं अपितु निरंतर आगे बढ़ने के उद्देश्य से लिखी गई है।लड़कियों रंग, लंबाई, जात,धर्म से ऊपर उठने और सोचने के लिए लिखी है।)

धन्यवाद

राधा गुप्ता 'वृन्दावनी'

#NoMoreBodyShaming

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