बच्चों की किताबों से दोस्ती कैसे कराये

 बच्चों की किताबों से दोस्ती कैसे कराये

बड़े बुजुर्गों ने किताबों को सबसे अच्छा दोस्त माना है। ऐसा दोस्त, जिसके पास हर सवाल का जवाब होता है। जो हर दौर में लोगों का सच्चा साथी बनकर उभरी है ।

आजकल के बच्चों ने इन्हीं  दोस्तों से किनारा कर लिया है। एंटरटेनमेंट के साधन बढ़े तो बच्चे उसी  ओर मुड़ गए। किताबें को अब सिर्फ पढ़ाई का हिस्सा ही मान लिया गया है। जिंदगी में सिनेमा, सोशल मीडिया को शामिल करते करते हमने किताबों से पुरानी वाली दोस्ती कम कर ली।
किताबों से अच्छा दोस्त कोई और नहीं। पर छोटी उम्र से ही यह दोस्ती करवाना आसान काम नहीं है।  किताबों से बच्चों की  दोस्ती करवाएं ऐसा करके आप उसे एक नई दुनिया को खोजने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।  किताबों से दोस्ती ना केवल उसे पढ़ाई में अव्वल बनाती है, बल्कि उसकी रचनात्मक क्षमता को भी बढ़ाती है। 
 टेक्नोलॉजी के अनगिनत विकल्पों के बीच बड़े हो रहे बच्चोंको, किताबों से दोस्ती कैसे करवाएं आइए जाने:

1-कम उम्र में किताबों से दोस्ती कराएं:- बच्चों को छोटी उम्र से ही किताबें पढ़ने के लिए दे छोटे बच्चे को पिक्चर वाली किताबें पढ़ने के लिए दे सकते है ।फिर वे जैसे-जैसे बड़े होते जाये उन्हे उनकी उम्र के हिसाब से किताबें लाकर दे इससे आगे चलकर उनकी आदत बनी रहेगी ।

2-कहानियां पढ़कर सुनाएं:-यह तरीका शायद आपको सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन बच्चों को रचनात्मक बनाने के लिए यह  एक अच्छा उपाय है। रोज रात में सोने से पहले बच्चों को किताबों से कहानियां पढ़कर सुनाएं। हो सकता है कि बच्चा हर दिन आपको एक ही कहानी सुनाने के लिए कहे। बच्चों को एक ही चीज को बार बार सुनना पसंद होता है। कहानी को मजेदार बनाने के लिए आप अलग अलग तरह की आवाजों में भी उसे कहानी सुना सकते हैं। हर दिन कम से कम 10 मिनट का वक्त इस काम के लिए निकालें।

3-पढने लिखने को मजेदार बनाएं: बच्चे को यह अच्छी आदत सिखाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप किताबें पढने को अपनी रूटीन में शामिल कर लें और बच्चे को भी रोजाना इसमें बिजी रखें। इसके लिए बेहतर तरीका यही है कि पढ़ाई लिखाई को बोरिंग न बनाएं बल्कि उसे एक गेम की तरह लें और ऐसे तरीकों को अपनायें जिससे बच्चे का मन लगा रहे और उसे मजा आता रहे। धीरे-धीरे आप पायेंगी कि किताबें पढना आपके बच्चे की आदत में शामिल हो गया है

4-खुद पढ़ें: बच्चों में पढने की आदत डालने के लिए सिर्फ उनके लिए किताबें रखें ही नहीं बल्कि उनके सामने आप खुद किताबें बोल बोल कर पढ़ें जिससे उन्हें पढने का सही तरीका समझ में आये। बच्चे बहुत जल्दी किसी भी चीज की नक़ल करना सीख जाते हैं ऐसे में आपको पढता देख वे भी बोलकर पढने की नक़ल करते हैं और धीरे धीरे यह उनकी आदत में शामिल हो जाता है।

5-पढ़ने की आदत को बनाए रखें;-अक्सर ऐसा होता है कि एक बार अगर बच्चा पढ़ने का शौक पाल लेता है तो हम निश्चित हो  जाते हैं। हम सोचते हैं कि उसकी किताबें पढ़ने की आदत तउम्र बनी रहेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। आपको बच्चे की उम्र के हिसाब से किताबें खरीदनी पड़ेगी, ताकि वह आगे भी कहानियां पढ़कर मजे ले सके।  बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से किताबें खरीद कर दे, ताकी किताबों की कमी के कारण उसके पढ़ने की आदत ना छूटे।

6-दोस्तों और रिश्तेदारों को किताब देने को कहें:-
बहुत से अवसर ऐसे होते हैं, जो दोस्त या रिश्तेदार बच्चों को उपहार देते हैं। ऐसे मौको को हाथ से ना जाने दें। दोस्तों को और रिस्तेदारो को किताबें देने के लिए कहे। बच्चों के पास किताबें होंगी तो धीरे-धीरे उन्हें पढ़ने के प्रति उनकी रूचि भी पैदा होने लगेगी। उम्र को ध्यान में रखते हुए बच्चों के लिए किताबें चुने। 

 किताबों से दोस्ती करने की प्रक्रिया अपने आप में लंबी है। कोशिश करें कि यह प्रक्रिया मजेदार बने, ताकि आप और आपका बच्चा दोनों इस का आनंद ले सके।  आपका काम बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इस प्रक्रिया में किताब पढ़ने के लिए उन पर दबाव ना बनाएं तो अच्छा है। बच्चा जो भी किताब पढ़े, उसके बारे में उससे चर्चा जरुर करे ।

अनु गुप्ता

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