बड़ी कहानी कहती छोटी सी कहानी : बावर्ची 1972

साल 1972 में  हृषिकेश मुख़र्जी द्वारा प्रस्तुत बावर्ची , बॉलीवुड की क्लासिक्स में यु ही नहीं गिनी जाती | जिंदगी जीने की कला ,ख़ुशी बाँटने की जरुरत और कई सारे और छोटे छोटे सबक सिखाती ये फिल्म मेरी सबसे पसंदीदा फिल्मो में एक हैं | गुलज़ार

बड़ी कहानी कहती छोटी सी कहानी : बावर्ची 1972

साल 1972 में  हृषिकेश मुख़र्जी द्वारा प्रस्तुत बावर्ची , बॉलीवुड की क्लासिक्स में यु ही नहीं गिनी जाती | जिंदगी जीने की कला ,ख़ुशी बाँटने की जरुरत और कई सारे और छोटे छोटे सबक सिखाती ये फिल्म मेरी सबसे पसंदीदा फिल्मो में एक हैं | गुलज़ार साब द्वारा लिखे गए इस फिल्म के संवाद , आधुनिक जीवन में मदद करने वाली कई बाते हमें बड़ी आसानी से बताते हैं | ये लेख बावर्ची फिल्म के उन 5 संवादों को बताता हैं जो खास थे और हमेशा खास रहेंगे :

१- जिसमे इंसान की भलाई हो वो काम कभी बुरा नहीं होता : सही गलत , नैतिक और अनैतिक , झूठ और सच, ऐसे कितने चुनाव हमें अपनी आम जिंदगी मैं रोज करने पड़ते हैं लेकिन सभी सूत्रों का एक निचोड़ बताता ये संवाद , एक कसौटी का काम करता हैं | 

२-लोग जिंदगी का सबसे छोटा , सबसे कीमती शब्द भूल गए हैं ..... प्यार  : कभी आखरी बार आपने अपने पिता , माँ , भाई, बहन या किसी  दोस्त से सुकून से बैठ कर दो बाते करी थी ? यदि आपको इस सवाल का जवाब देने के लिए थोड़ा भी सोचना पड़े तो समझ लीजिये आपकी प्राथमिकताये सही नहीं हैं | 


३-It is so simple to be happy ... but it is so difficult to be simple: हम जीवन में सब कुछ होना चाहते हो बस जीवन को जीवन की तरह सरल और आसान नहीं रखना चाहते हैं | मेरी बात का यकीन मानिये सारा बोझ ख्वाहिशो का हैं वरना जिंदगी हमेशा से हलकी थी | 


४- ख़ुशी के गाने तो फुलझरी की तरह हैं , जलते है और भुझ जाते हैं , लेकिन उदासी अगरबत्ती की तरह जलती हैं देर तक और भुझने के बाद भी महकती रहती हैं : उदासी की सुंदरता हम लोग हमेशा से झुठलाते आये हैं, क्युकी ख़ुशी के अलावा हम और कुछ नहीं चाहते हैं | हमारी जायदातर समस्याओ की वजह हैं ये सोच | याद रखिये , रही मनवा दुःख की चिंता क्यों सताती हैं , दुःख तो अपना साथी हैं , सुख हैं  एक छाँव  , ढलती आती हैं, जाती हैं | गले लगाइये जो राह पड़े | 


५-किसी बड़ी ख़ुशी के इंतजार में हम यह छोटे छोटे खुशियों के मौके खो देते हैं: नंबर ५ पर रखा ये संवाद सबसे बड़ी बात करता हैं | अपने दिन की वो साड़ी नेमत गिनिए जो ऊपर वाले ने बिना मांगे आपको दी हैं | आप पेट खाली नहीं हैं , आपके तन पर कपडे हैं | हम सभी के पास ऊपर वाले का शुकुरिया कहने को कई मौके और काकारण हैं लेकिन हम चुनते हैं बड़ी वजह जो शायद कभी आये या न आये | छोटी खुशियों को भी सम्हिलए दोस्तों | 

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