बहते आँसू .... हँसते होंठ !!!!

बहते आँसू .... हँसते होंठ !!!!

उसकी आँखो से निकलते हुए आँसू उसके दर्द को बयां कर रहे थे । बस होंठों को ये हक़ कहा दिया की दर्द को ज़बान से बयां करे । आज सोहना 
शुभम से सब बता देना चाहती थी ।
 लेकिन चुप थी बस आँसू ही साथ दे रहे थे । दर्द गहरा था । आज शुभम के पास बैठे बैठे सोहना को सारे वो पल याद आ रहे थे । जब उसने शुभम के प्यार को स्वीकार किया था । शुभम उसकी ख़ूबसूरती पर मरता था ।  शादी करना चाहता था । चार बहनो में सबसे बड़ी सोहना कभी खुलकर अपने पिता से बात भी नही कर पाई थी । बस माँ से इतना बोली थी माँ मैं शुभम से प्यार करती हूँ ... माँ ने कहा था "ये नही हो सकता दूसरे जात में तेरी शादी होगी फ़िर तेरे पीछे जो तेरी तीन बहने हैं वो कुँवारी रह जायेंगी समझी। हमारे समाज में कोई ब्याह नही करेगा उनसे  " अब 
चुप चाप वँही शादी कर लो जँहा तुम्हारे पिता जी कह रहे हैं । जवानी में सबको प्यार व्यार हुआ करता हैं अब सब भूल कर ब्याह कर लो बस हम सब की भलाई इसी में हैं । माँ की बात मान कर शादी तो कर ली थी नवीन से ।पर प्यार कँहा कर पाई थी । नवीन एक कमजोर बीमार व्यक्ति  छल से शादी हो गई साल भर दुःख में ही बीता सोहना का ना घर परिवार अच्छा था ना पति ... पर शिकायत कभी नही की .. अपने आँसू रोक लेती थी पर अधरों पर मुस्कान ही रहती थी । पर ईश्वर को वो भी मंज़ूर ना हुआ   ...  एक साल के बाद ही नवीन चल बसा । ससुराल में पहले ही जीना मुश्किल था अब तो और नरक हो गई ज़िंदगी । उस दिन माँ ने देखा जब रसोई में सासु माँ सोहना को झिड़क रही थी । कैसे माँ बाप हैं तेरे तुझे ले क्यूँ नही जा रहे अपने साथ .. तुझ मनहूस को अब मेरे घर में रहने की ज़रूरत ना हैं ।फ़िर भी उसने कुछ ना बोला उसी नरक में उसने दो साल और निकाले सुंदर सी सोहना अब बस यूँही जी रही थी । जब उसके पिता जी छोटी बहन की शादी के लिए उसे लेने गए थे । उसे देख कर रो पड़े । इस बार उन्होंने कह दिया अब ना जायेगी तू ससुराल । अब वो वापस मायके में आ गई जीना सीखने लगी । माँ अपने आँसू उससे छुपा कर आँचल से पोंछ लेती । अब तीनो छोटी बहनों की शादी हो गई सब अपने घर में खुश थी । बस नैनो में सोहना के ही तो आँसू थे । जो सजा उसने भुगती थी वो बिना अपराध ही उसे मिले थे । माँ ने शुभम का पता लगवाया था ।
शुभम अपने प्यार को खुश देखना चाहता था । वो शहर क्या देश ही छोड़ गया था । माँ उसको दुखी देख खुद को उसका दोषी मानती रही , और जी ना पाई थी ।  वक्त बीते कितना कुछ सहा सोहना ने । पर आज अचानक शुभम से मुलाक़ात ने फ़िर से सारे ज़ख़्मो को हवा मिल गई थी । 
"खुश हो तुम " 

"हाँ" 
 "तुम कैसे हो ? 
मैं भी बिलकुल ठीक हूँ अकेला ही हूँ बस फ़ोटोग्राफ़ी जो कभी हॉबी थी अब उसे को प्रोफ़ेशन बना लिया देश विदेश घूमता रहता हूँ । हाँ तन्हाई ज़िंदगी से गईं नही तुम्हारे सिवाय दिल को कभी कोई अच्छी लगी ही नही । बस करो शुभम अब क्या उम्र रह गई जो हम ये याद करे  छोड़ो उन बातों को पिता जी सुन लेंगे तो क्या सोचेंगे उन्हें कुछ पता भी नही । 
ओह सौरी  सोहना  बस ! अब एक बार अपने लिये भी सोच लो  । अब तो सब बहनो की भी शादी हो गईं उनके बच्चे भी बड़े हो गये बस हम दोनो ही अकेले अकेले रह गये ।

अब उम्र के इस पड़ाव पर सच स्वीकार लो ना की मुझे प्यार करती हो ? 
बोलो ना .. ज़ोर से शुभम बोला था । 
बहुत रोई थी सोहना शुभम एक विधवा को ये सब सोचने का हक़ नही है  
ठीक हैं  !अपना दुःख बाँटने का हक़ तो हैं ना  ?
खैर अभी मैं इसी शहर में हूँ दो चार दिन कभी मन हो तो मिलने आ जाना । उस रात सिर पे पिता जी का हाथ सोई नही थी हड़बड़ा कर उठी क्या हुआ पिताजी ?? 
सोई तो नही थी ??ना  
नही पिताजी ? बेटा आज जो तुम्हारे कौलेज का साथी आया था वो शुभम था क्या ?? हाँ पिताजी  तुम्हारी माँ ने मुझे मरते वक्त सब बता दिया था । कब तक अपनी ख़ुशियों की बली चढ़ाएगी ??  हम सब के वास्ते 
जा उसे हाँ बोल मैं तुम्हारी शादी उसी से कराऊँगा । पिताजी ! सोहना आज पिता से लिपट कर अपने सारे ग़म आँसुओ में बहा देना चाहती थी । आज पहली बार  वो जी भर कर रो ली । 

मंदिर  में शादी हुई शुभम से पिताजी बहुत खुश थे । आशीर्वाद देते हुए बोले बस बेटा तेरी ख़ुशियों का ही इंतज़ार था । तेरे हँसते होंठों ने कभी तेरे दुखो का आभास ही ना कराया था । आज अपनी ख़ुशियों के साथ सोहना घर से विदा हुई थी !!!!!!


ज़िंदगी के साथ ख़ुशियाँ  भी आयेंगी 
कभी लफ़्ज़ों से हाले दिल बयां करके तो देखो !!!!  
ये मेरे विचार हैं  
आपकी 
अल्पना !!!

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