बड़े होने का राजपर्व

बड़े होने का राजपर्व

"अरे पिंकी, तुम्हारी बहन रिंकू नहीं दिख रही है कई दिनों से? छुट्टी से आई नहीं गांव से.. स्कूल तो शुरू हो गए हैं ना?"

"अरे भाभी! वो बड़ी हो गई है ना.. तो त्यौहार है उसका" राजपर्व ", माँ भी रह गई साथ में "

"अरे धीरे बोलो" 

मेरे लिए ये बात थोड़ी अजीब थी। इस बारे में तो हम शादी के बाद भी खुल कर बात नहीं करते और ये लड़किया चिल्ला चिल्ला कर बता रही है अपना पीरियड। और तो और ये त्यौहार मना रहे हैं, हमारे यहां तो किसी को पता भी नहीं चलना चाहिए था।
नई नवेली दुल्हन मैं ऐसे खुल्ले विचार वाली पड़ोसी ल़डकियों को देख कर हैरान थी।

अगले दिन वो घर आई तो मुझसे रहा ना गया। उत्सुकता वश पूछा " क्या तुम लोगों को अजीब सा मतलब शर्म जैसा नहीं लगता.. जब सब को पता रहता है?"

" अरे भाभी हम उड़ीसा से है और हमारे यहां तो इसे उत्सव जैसे मनाते है, देवताओं का आशीर्वाद है जो हमे पूर्ण बनाता है। पूरे चार दिन तक त्यौहार मनाते है हम। मेरा दो साल पहले हो चुका है ना तो मुझे मालूम है, गांव भर से रजस्वला स्त्रिया लड़किया आती है। नृत्य गीत, भोज सब होता है। पहला दिन यानी पहिली रजो, दूसरा दिन मिथुन संक्राति, तीसरा दिन भूदाहा, और आखिर दिन वासुमति स्नान.. कभी आना हमारे गांव बहुत मजा आता है, शादी जैसा माहौल, स्पेशल फिलिंग। "

पिंकी की बाते मुझे बहुत खुशी दे रही थी मतलब देश में अब भी मासिक धर्म को लेकर अच्छी सोच वाली प्रथा भी है। जिसके नाम में ही धर्म हो भला वो बुरी चीज़ कैसे हो सकती है। जरूरी है बस जागरूक होने की।

-सुषमा तिवारी

#ThePinkComrade

#MyFirstPeriod

#Maymonthcontest

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