बेटी ने किया मां का कन्यादान

बेटी ने किया मां का कन्यादान

हर किसी की जिंदगी खुबसूरत हो ये ज़रूरी तो नहीं"चारू ने बड़े उदास मन से अपनी मन की बात दीपा को‌ कहीं...

"ऐसी बातें क्यों कर रही हो,माना की जो तेरे साथ हुआ वो बहुत बुरा हुआ। जिंदगी तुम्हें एक मौका दे रही है प्लीज उसे अपना लो ।एक बार कोशिश तो करके देखो प्लीज मेरी खातिर ,अपनी बेटी के खातिर।उस नन्ही सी जान को जिसे एक पिता की जरूरत है.. राहुल को तुम्हारे अतीत से कोई सरोकार नहीं है ।उसका तो यह मानना है कि तुमने जो कुछ भी किया सही किया। तुमने उस इंसान को इसलिए छोड़ा क्योंकि  वो तुम पर अत्याचार करता था ।तुम्हें हर तरह से प्रताड़ित करता था। तुमने उससे अलग होने का फैसला सिर्फ और सिर्फ अपनी बेटी के लिए किया क्योंकि तुम नहीं चाहती थे कि तुम्हारी बेटी उस नरक में जीये ।तुमने सब से बगावत करके  हिम्मत  करके सिर्फ और सिर्फ बेटी रिया के लिए उस इंसान को छोड़ा।"दीपा चारू को समझते हुए...

"वो सब ठीक है पर रिया इन सब बातों को समझने के लिए बहुत छोटी है.….वो अभी महज 13 वर्ष की है... और तुम तो जानती हो कि रिया के पिता (जीवन) की हर वक्त कोशिश होती है मुझसे उससे अलग करने की ।उसे हर वक्त मेरे खिलाफ भड़काते रहना... मेरे चरित्र पर सवाल करते रहना....वो बात और है कि रिया मुझे कुछ नहीं कहती..पर कभी कभी उसकी चुप्पी बहुत चुभती है। उसे क्या बताऊं उसके पापा और दादा-दादी ने मेरे साथ क्या क्या किया... उसके दादा-दादी ही क्यों मेरे मां बाप ने कौन सा साथ दिया... उन्होंने भी मेरी परवाह कहा कि....बस हर वक्त यही समझते रहे पति पत्नी के बीच की बात है.... अपनी नही इस बच्ची के बारे में सोचें वो भी लड़की जात हैं कैसे इसकी परवरिश करोगी...चारू अपनी ये बात कहते कहते रोने लगती है... तभी दीपा उसे शांत करने की कोशिश करती है।

चारू" मैं शायद उस इंसान के साथ अपना पूरा जीवन जी लेती कैसे भी पर जब उसने मेरी बेटी रिया को नुकसान पहुंचाने की कोशिश वो मुझसे बरदाश्त नही हुआ और ना जाने कैसे मैंने हिम्मत की और उस इंसान से  हमेशा के लिए अलग हो गई।पर उस वक्त को जब भी याद करती हु आज भी दिल बैठ जाता है... मेरे माता-पिता ने यह कह दमन छोड़ दिया कि वो हम लोग उनकी जिम्मेदारी नही है.... मैंने सिर्फ इतना कहा मुझे थोड़ा समय दे दिजिए मैं आप लोग पर बोझ नही बनुगीं। और फिर कितनी कठिनाइयों से भरा जीवन मैंने जीया है...पर आखिर में मंजिल मिल गई... एक अच्छी कम्पनी में काम और धीरे धीरे जिंदगी फिर नई राह पर निकल पड़ी.....। उसके पिता से मेरा कोई संबंध नही है पर रिया  का है....वो कहते हैं जब आपके पास पैसे हो जाते हैं तो सब टूटे रिश्ते भी जुड़ जाते है... वही मेरे अपने माता-पिता का और मेरे ex-husband का है... बेटी से कोई प्यार नही है....वो सब दिखावा है...आज मैं जो कुछ भी अपनी मेहनत और लगन की वजह से हु। राहुल तो मेरी जिंदगी में फरिश्ते की तरह है उसकी वजह से मैंने जिंदगी को फिर से जिना सीखी हु...वो रिया को भी बहुत प्यार करता है.... मुझे शादी से नही अपनी बेटी के लिए डर लगता है... पता नही शादी के बाद कहीं रिश्ते बदल ना जाए यही सब सोच कर मैं अपने कदम पीछे कर लेती हुं। मुझे दुनिया समाज में क्या कहेंगे मुझे उन सब की परवाह नही है मुझे सिर्फ मेरी बेटी की परवाह है वहीं मेरी दुनिया है".....

तभी "आपकी यही दुनिया आप से कह रही है राहुल को भी इस दुनिया का हिस्सा बना लेते हैं..... मुझे कोई ऐतराज नहीं है...मैं अपनी मां को खुश देखना चाहती हु और आपको भी खुश होने का हक है"रिया की बात सुनकर चारू और दीपा चौक जाते हैं...

"नही बेटा ऐसा कुछ नही है,मैं खुश हूं तुम मेरे साथ हो.... मुझे किसी और के साथ की जरूरत नहीं है"चारू रिया को समझते हुए.... आपकी और राहुल अंकल की शादी होगी...मैं करवाऊंगी।जब चारू और राहुल के रिश्ते के बारे में उसके माता-पिता और ‌उसके ex-husband को पता चला तो सब ने चारू को‌ बहुत कुछ बोला....पर इस बार चारू ने नही रिया ने सब को जबाव दिया वो भी ऐसा की सब की बोलती बंद हो गई।
उसने अपने नाना नानी को भी वो सब बातें याद दिलाई जो उन्होंने उसकी मां को कही....तब आप लोग को अपनी बेटी की परवाह नही थी।.ये  कहने को मेरे पिता है पर कौन सा पिता होता है जो अपनी ही बेटी को उसके मां के खिलाफ भड़काता है। उसके चारित्र पर हमेशा सवाल करता है।अगर मेरी  मां फिर से अपनी जिंदगी के सफ़र में अपना हमसफ़र चाह रही है तो इसमें गलत क्या है। ये मेरे पिता जो अपनी पत्नी से अलग होते ही दुसरी शादी कर लेते है वो बात और वो शादी टिकी नहीं..... मेरी मां को अपनी जिंदगी जीने का पुरा हक है....मैं शादी करवाऊंगी अपनी मां की मुझे किसी की जरूरत नही है.... खुशी हो तो शादी में आ जाइएगा बाकी आप की मर्जी।

आज ये दुनिया भी देखी मां बेटी का अनोखा रिश्ता....ये बेटी कन्यादान करेगी अपनी मां का.... बहुत धूमधाम से चारु और राहुल की शादी होती है....तब दीपा कहती हैं... रिया को"तुमने एक मिशाल कायम कर दी आज एक बेटी ने कन्यादान किया है मां का.. बहुत ही अटूट और अनोखा रिश्ता है तुम मां बेटी का"मां को अपनी जिंदगी जीने का हक है..आज मैं हूं  कल नही रहुंगी तब वो बहुत अकेली हो जाएगी.. कोई  तो होना चाहिए जीवन के सफर में साथ देने वाला जो हर पल हर लम्हा उनके रहे। बहुत दुख झेले मेरी मां ने अब नही...ये कह कर दीपा रिया को गले लगा लेती है....।

ऐ एक काल्पनिक कहानी है..इसका किसी के जीवन से कोई लेन देन नहीं है???? कृपया कहानी पसंद आए तो अपनी राय हमें जरूर बताएं ????

धन्यवाद
आपकी अपनी
सीमा सिंह ????

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