भाभी क्या केवल काम करने के लिए आएगी

भाभी क्या केवल काम करने के लिए आएगी

"साक्षी! बेटा पूजा का सामान कहाँ है? और अभी तक तुम तैयार क्यों नही हुई??"

"बस मम्मी दो मिनट प्रसाद बना दूँ। और हां पूजा का सामान वो लाल वाले बैग में है। श्रीफल ये रहा और बाकी के फल भी मैंने धोकर रख दिए है।

"सुन ना! बेटा मिठाइयां कहां है?

"अरे मम्मी आप थोड़ी देर आराम से बैठो। मैं हूँ ना मैं सब संभाल लूंगी। बस आप यामी का ध्यान रखना। प्रसाद का हलवा बन गया है। मैं पांच मिनट में तैयार होकर आती हूँ। और मिठाई और दुध लेने भाई गया है।"

"और सुन वो नाश्ते के लिए समोसे......."

"मम्मी....... भाई गया है ना। अब तैयार हो जाऊँ?????

ये साक्षी है महेंद्र सिंह जी की बेटी। महेंद्र जी के दो बच्चे हैं बेटी साक्षी बड़ी है विवाहित है और इसी शहर में रहती है। एक बेटा है अमन किसी बडी कंपनी में मैनेजर है सैलैरी भी अच्छी है, दिखने में भी हैडसम है कुल-मिलाकर यूँ कहे कि विवाह योग्य उत्तम युवक हैं। महेंद्र जी ने सालों की मेहनत के बाद अपना मकान लिया है आज उसी के गृह प्रवेश की तैयारी चल रही है। महेंद्र जी और उनकी पत्नी सुधा जी तो पंडित जी के पास बैठे हैं और हवन की तैयारियों में व्यस्त हैं। बाकी की सारी जिम्मेदारियां साक्षी ने संभाल रखी है। फिर चाहे वो मेहमानों की आवभगत हो या पूजा से संबंधित कोई भी चीज हो या फिर सबके चाय नाश्ते और खाने की व्यवस्था सब कुछ साक्षी ने बखुबी संभाल रखा था। हवन शुरू हुआ और साक्षी ने खीर चढ़ा दी। अब मेहमानों का आना शुरू हो गया था। साक्षी रसोई के साथ साथ मेहमानों की आवभगत में भी लगी हुई थी। जो भी आता साक्षी की तारीफ किए बिना नहीं रह पाता।

"अरे! बुआ जी आप आ गई? कैसी है अब आपकी तबियत?"

"मैं ठीक हूं बिटिया तुम बताओ? बड़ी थकी हुई लग रही हो"

"अरे नहीं बुआजी वो.......

"अब मुझे मत समझा। मैं जानती हूं कितनी सारी तैयारियां करनी पड़ती है ऐसे  प्रोगाम में। भाभी आ गई होती तेरी तो इतना परेशान ना होती तु,  वह सब संभाल लेती अपने आप। इसीलिए तो कहती हूं सुधा भाभी को जल्दी शादी करवा दो बेटे की भी।"

"जी बुआ जी, जल्दी ही वह मौका भी आएगा। आपके मुंह में घी शक्कर।"। "मैं अभी आती हूं बुआ जी सबके लिए चाय बना दुं।"

ये लाजो बुआ जी है थोड़ी सी गोल मटोल है पर खाने की बड़ी शौकीन है इन्हें बेटियों से बड़ा प्यार है चाहे वह अपनी हो या किसी और की,  पर हां बहुए हमेशा काम करती हुई दिखनी चाहिए और बेटियां आराम करते हुए आज भी जब साक्षी को काम में व्यस्त देखा तो परेशान हो गई और बार-बार उससे कहने लगी कि "काश तुम्हारी भी भाभी आ गई होती तो तुम भी आराम से प्रोग्राम इंजॉय कर पाती और तुम्हारी भाभी सारा काम संभाल लेती।" खैर साक्षी अपने हिसाब से सारा काम संभाल रही थी और सब कुछ बहुत ही अच्छे तरीके से हो गया। साक्षी अपना खाना परोस कर लें आई।

"साक्षी!  तू अब खाना खा रही है? पुरी पंगत ने जिम लिया और घर की बेटी अब खाना खा रही है। राम राम राम ! अब तो बहू ले आओ सुधा भाभी,  साक्षी कब तक काम करेगी मायके में आकर।  जब भी आती है हमेशा मैंने काम करते ही देखा है इसे, कभी इसे भी तो आराम करने को मिले।"

"हां जीजी बात तो आप सही कह रही हो जब भी आती है साक्षी हमेशा मेरी हेल्प ही करवाती है कभी दिवाली की सफाई में, कभी मकान शिफ्ट करने में तो कभी किसी और काम में, ऐसे खाली बैठने की आदत बिल्कुल नहीं है इसकी।"

"तभी तो कहती हूं भाभी जल्दी से अब बेटे की शादी करवा दो इसकी भाभी आ जाएगी तो सब काम वह संभाल लेगी इसको आराम मिल जाएगा मायके में।"

साक्षी खाना खाते हुए चुपचाप बुआ जी की बातें सुन रही थी। थोड़ी देर बाद साक्षी अपने बर्तन किचन में रखकर सबके साथ आकर बैठ गई और बोली

"बुआजी!  भाभी तो मेरी बहुत जल्दी आएगी पर एक बात बताइए भाभी क्या केवल काम करने के लिए आएगी? बुआजी ये  उसका ससुराल है और उम्मीद करती हूं कि वह अपना फर्ज बखूबी निभाएगी। लेकिन यह भी गलत है कि वह केवल काम करने के लिए ही आएगी।  घर मे बहू केवल काम करने के लिए नहीं लाते और भी बहुत से उतार-चढ़ाव होते हैं जिंदगी में जिनका साथ निभाने के लिए बहुएं आती है।  मेरी भाभी मेरे भाई का साथ निभाने के लिए आएगी।  इस घर में मेरी कमी पूरी करने के लिए आएगी। जैसे मैं अपनी मम्मी को हर जरूरी सलाह देती हूं मेरे बाद हर सलाह देने के लिए मेरी भाभी आएगी।  मेरे साथ गप्पे लड़ाने के लिए आएगी और हां मेरी ही तरह आपका मुंह मीठा करवाने के लिए लड्डू की प्लेट लेकर आएगी।"

"बिटिया यह सब बातें कहने में अच्छी लगती हैं, ससुराल में तो बहुएं काम करती हुई अच्छी लगती हैं, तू कब तक मायके में आकर काम करती रहेगी।" बुआजी भी अपनी बात पर अड़ी थी।  

अच्छा बुआ जी एक बात बताइए मायके में काम करने से क्या मैं घिस जाऊंगी? क्या हुआ जो अगर मैंने मायके में काम कर लिया आखिर मेरा भी तो घर है मेरे भी मां-बाप है घर का काम पूरा परिवार मिलकर ही करता है फिर चाहे वह बहू हो या बेटी। और रही बात मेरी भाभी के आने के बाद मेरे काम करने की तो मैं तब भी काम करूंगी जानती है क्यों ताकि मेरे आने पर भाभी के सर पर बोझ ना पड़े। अगर पूरा दिन भाभी मेरे आगे पीछे ही घूमती रहेगी तो धीरे-धीरे वह मुझसे परेशान हो जाएंगी। मेरे आने से अगर वह बोझिल हो गई तो हमारे रिश्ते में दरारें पड़ जाएंगी और यह मैं बिल्कुल होने नहीं दूंगी।"

"और बुआ जी मैं तो अपनी भाभी के साथ बराबर काम करवाऊंगी ताकि घर का सारा काम निपट कर हम दोनों ननद भौजाई घूमने जा सके।चाट पताशी खा सकें।"

"सुधा भाभी जरा जल्दी से फ्रेश हो जाओ मैं चाय बना कर आती हूं फिर हम ननद भौजाई भी चलते हैं चाट पताशी खाने, क्यों सही कहा ना साक्षी बिटिया???

साक्षी खुशी से मुस्कुराते हुए अपनी बुआजी के गले लग गई।

भाभी क्या केवल काम करने के लिए ही आती है इस विषय पर आपके विचार कमेंट में जरूर साझा करें, इंतजार रहेगा।

रुचिका खत्री

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