भगवद् गीता से सीखने योग्य 3 बातें

भगवद् गीता से सीखने योग्य 3 बातें

जैसा कि पहले भी दो भागों में हम आपके साथ भगवद गीता से मिलने वाली सीखों को साँझा कर चुके हैं आज एक बार फिर भगवद गीता से मिलने वाले ज्ञान को इस आखिरी भाग में साँझा किया जा रहा है । श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए ज्ञान को जब भी हम कहीं पढ़ते या सुनते हैं तो ऐसा लगता है कि यह संदेश ना केवल अर्जुन को दिया गया है बल्कि यह संदेश जन-जन के लिए है ।

चलिए-आइए पढ़ते हैं भगवद गीता से मिलने वाली अन्य सीखें-

1-अपने रहस्य किसी को ना बताएँ 

न कोई डर , न ही भावनाएं और न ही धन बल्कि मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलता है उसके रहस्य ।

कोई भी इंसान चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो,  कितना ही शक्तिशाली क्यों ना हो,  आप के रहस्य ही होते हैं जो आपके विनाश की चाबी बनते हैं , इसलिए यदि आपको हमेशा ही सामर्थ्यवान रहना है और हमेशा ही सुखी रहना है तो अपने रहस्य किसी को ना बताएँ , ना ही अपने करीबी दोस्तों को और ना ही आप से ईर्ष्या करने वाले शत्रु को , क्योंकि समय आने पर कौन शत्रु हो जाए ऐसा कहना संभव नहीं। 

यदि मुश्किल समय में आपके अपने ही आपके शत्रु हो जाएँ तो आपकी ही कामयाबी में आपके सारे राज ही आपके खिलाफ हो जाएँगे । जिस प्रकार रामायण में विभीषण ने रावण के अमृत कुंड का रहस्य राम को बताया तो उसी प्रकार आपके जीवन के रहस्य आपके किसी विनाश चाहने वाले व्यक्ति के हाथ लग गए तो रावण की तरह आप का अंत भी निश्चित हो जाता है।  

इसलिए समझदारी इसी में है कि अपने रहस्य अपने तक ही रखें ।आपके रहस्य आपके सुखी जीवन रूपी पतंग की डोर हैं और यदि आपके सुखी जीवन की यह डोर किसी के हाथों में लग गई तो आपके सुखी जीवन की पतंग तो कटी ही कटीअर्थात  डूबी ही डूबी ।

अपने रहस्य अपने मन की तिजोरी में सदा ही कैद रखें क्योंकि इन पर केवल आपका ही हक है । आपका छोटा सा भी कोई राज आपके मुँह से निकला तो मानो आप की बर्बादी का वक्त शुरू हो गया। 

बुद्धिमानी इसी में है कि आप अपने रहस्य अपने मन में ही सँजोए रखें।

2-कामयाबी पाने के लिए नकल ना करें 

हम सब जीवन की परीक्षा में सफल होने और कामयाबी पाने के लिए क्या-क्या नहीं करते । हम परिश्रम करते हैं , दौड़- भाग भी करते हैं- लेकिन कभी-कभी यह सब करने के बाद भी हमारा काम जब नहीं बनता तो हम सब कामयाब व्यक्ति की नकल करने लगते हैं ।

जरा याद करें अपना बचपन और वह अपने बचपन में आप की कक्षा का कमरा। विद्यालय में जब हम परीक्षा देने जाते थे तो हमने न सही, लेकिन कोई ना कोई तो सफल होने के लिए नकल जरूर कर रहा होता था और ऐसा करने वाले सफल भी हो जाते थे लेकिन जीवन की परीक्षा ऐसी नहीं होती । यहाँ नकल करने वाला सफल नहीं हो पाता और ऐसा इसलिए है क्योंकि जिंदगी की परीक्षा हर इंसान के लिए अलग-अलग प्रश्नपत्र लाती है । 

हर इंसान का जीवन अलग-अलग प्रकार की कठिनाइयों से भरा होता है और निश्चित रूप से उन कठिनाइयों से निकलने का तरीका भी अलग -अलग होता है , इसलिए यदि आपको जीवन में सफलता पानी है तो अपनी मुश्किलों के उतार-चढ़ाव खुद ही समझें और देखना सफलता आपकी ही होगी क्योंकि नकल करने से यदि आप किसी समस्या से निकल भी जाएँ तो उस समस्या से मिलने वाली सीख नहीं ले पाएँगे और ऐसा करने पर अगली बार जब आप किसी मुसीबत में होंगे तो न ही नकल काम आएगी और ना ही कोई सीख आपके पास होगी ।

जिंदगी की परीक्षा में यदि आपको सर्वोतम स्थान हासिल करना है तो अकेले चलें , अकेले सीखें और अकेले बढ़ें , क्योंकि नकल करके कभी कामयाबी हाथ नहीं लगती ।

3-कर्म करने से कभी ना बचें 

कोई भी कार्य करने से पहले यदि हम यह सोचते हैं कि हम यह कार्य करें या ना करें तो सफलता और असफलता की आशा हमें आधी-आधी सी नज़र आती है परंतु यदि हम डर कर मन में यह सोच लें कि हम यह कार्य करेंगे ही नहीं तो निष्फलता निश्चित है , इसलिए हमेशा किसी भी कार्य को करने से ना घबराएँ अर्थात कभी भी कोई भी कर्म करने से ना बचें । 

यदि आप किसी कार्य को पूरे दिल और साहस से करते हैं तो निश्चित ही आप उस कार्य में सफल हो जाते हैं । अगर आप सफल नहीं भी होंगे तो असफलता तो अवश्य ही मिलेगी और असफलता तो सफलता से भी ज्यादा सबक देकर जाती है । वह आपके जीवन में दुबारा असफलता के आने के सभी अवसर समाप्त कर सकती है और यदि आप किसी भी कर्म से बचेंगे और किसी कार्य को करने का प्रयास नहीं करेंगे तो निष्फलता निश्चित रूप से आपके सामने खड़ी हो जाएगी । आपका साहस कमजोर पड़ जाएगा , परंतु यह निश्चित है कि आपके विपक्षी का साहस बढ़ जाएगा और साथ ही साथ उसका उत्साह भी बढ़ता रहेगा और जो निरंतर आपको और कमज़ोर करता चला जाएगा।

अपने कर्तव्य से भागना उचित नहीं है आत्मिक  शांति दोस्तों या परिवार के सदस्य दूर होकर प्राप्त नहीं की जा सकती हालांकि इस भौतिक संसार में रहते हुए अपने कर्तव्य से बचना संभव ही नहीं होता । इसलिए अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करते रहें । 

लगातार भटकते हुए मन को नियंत्रित कार्य करके किया जा सकता है , त्याग करके नहीं।  इसलिए हमें अपने सभी कार्यों को मन से करने का प्रयास करना चाहिए।

उम्मीद करती हूँ आप भगवद गीता से मिलने वाले इस ज्ञान से अपने जीवन में अवश्य ही परिवर्तन लाने में कामयाब हो सकेंगे ।

धन्यवाद

Madhu Dhiman

Pink Columnist- Haryana

What's Your Reaction?

like
5
dislike
0
love
1
funny
0
angry
0
sad
0
wow
1