बिछिये और पायल चाँदी की ही क्यों ?

परंपराओं की दृष्टि से तो इनके महत्व रोचक हैं।लेकिन क्या आप जानते है कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। 

बिछिये और पायल चाँदी की ही क्यों  ?

हिंदू धर्म में एक चीज सबसे अलग है वो है किसी महिला का सोलह श्रृंगार। जो पूरी दुनिया में भी फेमस है। इस सोलह श्रृंगार में माथे की बिंदी से लेकर पांव में पहनी जाने वाली बिछिया तक होता है। हर एक चीज का अपना एक महत्व है। परंपराओं की दृष्टि से तो इनके महत्व रोचक हैं।लेकिन क्या आप जानते है कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। 

शायद ही आपको यह बात पता हो कि इसे पहनने का सीधा संबंध उनके गर्भाशय से है। विज्ञान में माना जाता है कि पैरों के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में एक विशेष नस होती है जो गर्भाशय से जुड़ी होती है। यह गर्भाशय को नियंत्रित करती है और रक्तचाप को संतुलित कर इसे स्वस्थ रखती है।

प्राचीनकाल में स्त्रियों व लड़कियों को पायल एक संकेत मात्र के लिए पहनाया जाता था| जब घर के सदस्य के साथ बैठे होते थे तब यदि पायल पहने स्त्री की आवाज आती थी तो वह पहले से सतर्क हो जाते थे ताकि वह व्यवस्थित रूप से आने वाली उस महिला का स्वागत कर सकें| 

पायल की वजह से ही सभी को यह एहसास हो जाता है कि कोई महिला उनके आसपास है अत: वे शालीन और सभ्य व्यवहार करें। ऐसी सारी बातों को ध्यान में रखते हुए लड़कियों के पायल पहनने की परंपरा लागू की गई।

वास्तु के अनुसार, पायल व बिछिया की आवाज से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम हो जाता है इसके अलावा दैवीय शक्तियां अधिक सक्रिय हो जाती है यह भी इसका एक कारण हो सकता है| इसके अलावा पायल की धातु हमेश पैरों से रगड़ाती रहती है जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद है। इससे उनके पैरों की हड्डी को मजबूती मिलती है। 

बिछिया अपने प्रभाव से धीरे-धीरे महिलाओं के तनाव को कम करती है, जिससे उनका मासिक-चक्र नियमित हो जाता है। साथ ही इसका एक और फायदा है। इसके अनुसार बिछिया महिलाओं के प्रजनन अंग को भी स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। बिछिया महिलाओं के गर्भाधान में भी सहायक होती है।

कहा गया है कि दोनों पैरों में चांदी की बिछिया पहनने से महिलाओं को आने वाली मासिक चक्र नियमित हो जाती है। इससे महिलाओं को गर्भ धारण में आसानी होती है।चांदी विद्युत की अच्छी संवाहक मानी जाती है। धरती से प्राप्त होने वाली ध्रुवीय उर्जा को यह अपने अंदर खींच पूरे शरीर तक पहुंचाती है, जिससे महिलाएं तरोताज़ा महसूस करती हैं।

आपने हमेशा देखा होगा कि पायल या पैरों में उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया चांदी की ही होती है। क्या आपने कभी सोचा कि पैरों में पहने जाने वाले ये आभूषण चांदी के ही क्यों बनते हैं। या फिर पैरों में सोने की पायल क्यों नहीं पहनी जाती?

साइंटिफिक या वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो सर गर्म होता है और पैर ठंडे होते हैं। शरीर के तापमान के बैलेंस को बनाएं रखने के लिए कमर के नीचे चांदी के आभूषण पहने जाते हैं। सोने के गहने गर्म और चांदी के गहने ठंडे होते हैं। इसीलिए कहा गया है कि कमर के नीचे चांदी के आभूषण पहनने से शरीर में गर्मी और शीतलता का संतुलन बना रहता है ।

धार्मिक रूप से देखा जाए तो सोने को एक लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। भगवान विष्णु की भी सबसे प्रिय वस्तु सोना ही है। यही कारण है कि सोने को शरीर के नीचले हिस्सों में नहीं पहना जाता। कहा भी गया है कि लक्ष्मी स्वरूप सोने को पैरों में पहनने से उसका अपमान होता है।

पायल मूल रूप से चांदी की होती है। चांदी चंद्रमा की धातु है, चंद्रमा शरीर में मन का कारक होता है। पाजेब में बजने वाले घुंघरू मन को भटकने से रोकते हैं और पूरे परिवार को एक धागे में पिरोकर रखने का संदेश देते हैं।

अनु गुप्ता


Click Here To See More

What's Your Reaction?

like
2
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0