बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए

 "हेलो !शर्मा जी। आपका बेटा अमित पुलिस की हिरासत में है। उसे ड्रग्स लेते हुए पकड़ा गया है ।"
"यह नहीं हो सकता इंस्पेक्टर साहब ।मेरा बेटा तो बहुत शरीफ है और वह तो दिल्ली गया है एग्जाम्स के लिए ।"
"वह कहीं नहीं गया है ।यहीं होटल में रह रहा था और ड्रग्स भेज भी रहा था और ले भी रहा था। आप उससे आकर मिल सकते हैं।" कहकर इंस्पेक्टर  ने फोन रख दिया ।
"अरे !सुनती हो। हमारा बेटा जेल चला गया। इतना बड़ा झूठ बोलना उसने कहाँ से सीखा ?और ड्रग्स कब से लेने लगा वह? उसे नशे की लत कब लग गई। अभी तो बारहवीं की परीक्षा कितनी मुश्किल से पास हुआ था।मैं कितना खुश था कि अब वह सीरियस हो गया है और दिल्ली गया है इंजीनियरिंग का एग्जाम देने। लेकिन वह तो जेल में है ।पूरे खानदान की नाक कटवा दी उसने। अब क्या होगा?" कहते-कहते शर्मा जी हाँफने लगे और सिर पकड़ कर बैठ गए।
" अब क्या होगा कहने से और कुछ करने से ।जब मैं कहती थी कि बिगड़ जाएगा इतनी छूट मत दो तब तो मुझे "हिटलर और आर्मी में भर्ती हो जाओ" जैसी बातें कही गई थी ।"
"यह कोई ताने मारने का वक्त है। वकील को फोन करके उसकी जमानत का इंतजाम करवाता हूँ।"
"जमानत नहीं मिलेगी इतनी जल्दी ।ड्रग्स  का केस है। आपको इतना भी नहीं पता।"
" क्या? ऐसे क्यों बोल रही हो? तुम्हारा बेटा नहीं है क्या?"
" मेरा ही बेटा है पर मैं सच्चाई से नहीं भागती। मैं कहती रह गई आपको और माँ  जी को कि बड़ा हो रहा है ।इतने पैसे मत दो, छूट मत दो। पर मेरी  सुने कौन? तुम्हारा अलग डायलॉग था कि "अरे! यही तो घूमने फिरने की उम्र है" और माँजी का तो पोता पुराण शुरू हो जाता है ।"अरे !मेरा इकलौता पोता। खानदान का चिराग। जितने पैसे चाहिए ले जा। जाकर एक किताब खरीद ले पर कभी माँ  जी ने यह नहीं पूछा कि किताब तो दिखा जो तू खरीद कर लाया है। या कभी नहीं पूछा कि कहाँ गए थे क्यों गए थे? कोई मतलब नहीं। मैं बोलती तो बुरी बन जाती ।आपलोगों  लोगों की देखा देखी उसने मेरी बातों पर भी ध्यान देना छोड़ दिया। अब भुगतो।  जब बबूल का पेड़ बोया तो आम कहाँ से मिलेगा खाने को। बेटे को आवारा बनने के लिए छोड़ दिया और उसके इंजीनियर बनने का ख्वाब संजो रहे थे। पूरी जिंदगी पर उसके दाग लग गया मानो ।जाइए मामला सुलझाने की कोशिश करिए ।"
"तुम सही कह रही। काश मैं माँ को समझा पाता और तुम्हारी बात मानता तो अमित को गलत राह पर जाने से रोक सकता था ।तुमने तो अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। मैं ही पिछड़ गया ।मुझे माफ कर दो।"
" अब माफी वाफी माँगने से कोई फायदा नहीं ।अभी भी समय है हम अमित को सही राह दिखा सकते हैं।"शर्मा जी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे।

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डाॅ मधु कश्यप 

#दादीनानीकी कहावतें मुहावरे 

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