ब्रज की जन्माष्टमी

ब्रज की जन्माष्टमी

'वृन्दावन के वृक्ष को, मरम न जाने कोए,

डाल-डाल और पात-पात में राधे राधे होए।'

वृन्दावन में यूँ तो 365 दिन ही त्यौहार होते हैं।ब्रज में यह कहावत भी प्रचलित है यहां प्रत्येक दिन उत्सव होते हैं।वृन्दावन में सभी त्यौहार धूमधाम से मनाए जाते हैं चाहें वह दिवाली हो या नवरात्र या फिर होली। ब्रजक्षेत्र के अंतर्गत मथुरा,वृन्दावन,गोकुल,बरसाना,नंदगाँव, गोवर्धन आदि आते हैं।सम्पूर्ण ब्रज चौरासी कोस में फैला हुआ है।

आज में आपको ब्रज की जन्माष्टमी की ओर ले चलते हैं। जितने उमंग व उल्लास से जन्माष्टमी ब्रज में मनाते हैं उतनी कहीं और नहीं।ब्रज में जन्माष्टमी की तैयारियाँ महीने भर पहले से होने लगती है।इस दिन सम्पूर्ण ब्रज को रंग-बिरंगी झालरों,आम पल्लव,फूलों से सजाया जाता है।ठाकुर जी उनकी प्रसिद्ध माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।

इस दिन मथुरा के प्रसिद्ध कृष्ण जन्मभूमि में रात्रि बारह बजे ठाकुर जी पंचामृत से अभिषेक किया जाता है और उनको जन्मोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ वृन्दावन के प्रसिद्ध ठाकुर बाँके बिहारी मंदिर में वर्ष में सिर्फ आज के दिन ही रात्रि डेढ़ बजे मंगला आरती होती है,जिसे दर्शन करने के लिए दूर-दराज के देशी-विदेशी भक्त आते हैं।

वृन्दावन के ही ठाकुर राधा रमण लाल,ठाकुर राधा दामोदर मंदिर, इस्कॉन मंदिर,प्रेम मंदिर आदि अन्य मंदिरों तथा प्रत्येक घर में लाला के जन्मोत्सव की धूम रहती है।प्रसाद के रूप में पंचामृत, पंजीरी,फल,मिठाई का वितरण व सेवन किया जाता है।

अगले दिन नंदोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।इसमें टॉफी, चॉकलेट, लड्डू, खिलौने,कपड़े,बर्तन व रूपये आदि बाँटें जाते हैं।जो भी व्यक्ति इनको प्राप्त करता है वह अपने को भाग्यशाली मानता है।नंदोत्सव में इन सभी वस्तुओं को बाँटने के पीछे यह मान्यता है कि नंद बाबा ने वृद्धावस्था में ठाकुर जी को पुत्र रूप में पाया था तो उन्होंने इस खुशी में बहुत दान दिया था जो कि आज भी वही परंपरा चली आ रही है।नंदोत्सव में सभी भक्त भक्ति में सराबोर होकर झूमझूम के नंद के आनंद भयो जै कन्हैया लाल की गाते जाते हैं और अपने जीवन को धन्य मानते हैं।

बृजवासी जन आज भी ठाकुर जी का जन्म अपने पुत्र की तरह उनका जन्मोत्सव मनाते हैं।आप सभी भी एक बार होली और जन्माष्टमी ब्रज में ठाकुर जी के साथ उनके नगर में मनाइये।सच मानिए यह आपके जीवन की यह सबसे यादगार होली और जन्माष्टमी होगी।

अंत में, आप सभी सखियों को जन्माष्टमी की अग्रिम बधाई हो।????????

धन्यवाद

स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित

✍️राधा गुप्ता 'वृन्दावनी'

#मेरे शहर की पहचान

#अगस्त2020

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