बुलबुल....एक बार समझी जानी बहुत ज़रूरी है।

बुलबुल....एक बार समझी जानी बहुत ज़रूरी है।

बुलबुल, जो भले ही बार-बार देखी न जा सके पर एक बार समझी जानी बहुत ज़रूरी है।

बुलबुल हमें एक बहुत छोटी सी बात बताती है कि औरत को शादी के बाद बिछुए इसलिए पहनाए जाते हैं कि वो ‘उड़’ न सके. वो हाथ से न निकल जाए. बुलबुल हमें ये भी बताती है कि भारतीय औरत को हर हाल में अपने पति को परमेश्वर मानना होगा, फिर चाहें वो नीम पागल हो या सनकी बुड्ढा. बुलबुल एक और गहरी बात सिखाती है, जिसे समझना सबसे ज़रूरी है कि औरत को सबसे पहले साथी औरत का सगा होना होगा। आदमी के जुल्म-ओ-सितम या पितृसत्ता से बाहर निकलने के लिए   एक नारी को दुसरी नारी की भावनाओं को समझना होगा। 

बुलबुल हमें ये भी बताती है कि औरत का किसी से बात करना भी उसे ‘कलमुही’ घोषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।बुलबुल' की कहानी की पृष्ठभूमि में 19वीं सदी के अंत का बंगाली समाज और उस दौर की वो सब बुराइयां हैं, जिन्हें ख़त्म करने के लिए ईश्वर चंद्र विद्या सागर जैसे कई महान समाज सुधारकों ने सालों आंदोलन चलाए थे। मसलन, बाल विवाह, पुरुषवादी सोच और इसकी वजह से महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और उन अत्याचारों को अपनी क़िस्मत मानने लेने की स्त्री की मजबूरी।
 

'बुलबुल' इन सब सामाजिक बुराइयों से जूझती एक लड़की के अंदर फूटे गुस्से की परिणीति है। 'बुलबुल' का बाल विवाह एक ज़मींदार घराने में अपने से कई साल बड़े इंद्रनील से होता है। इंद्रनील का छोटा भाई सत्या बुलबुल का लगभग हमउम्र है। उसी के साथ खेलते हुए वो बड़ी होती है। बचपन की चंचलता और लगाव जवानी में आकर्षण में बदल जाता है। बुलबुल मन ही मन सत्या को चाहने लगती है।

इंद्रनील को अपने जुड़वां मंदबुद्धि भाई महेंद्र की पत्नी बिनोदिनी के ज़रिए इसका आभास होता है। ज़मींदारी ख़ून में उबाल मारती है और इंद्रनील सत्या को लंदन भेज देता है। सत्या से बिछड़ना बुलबुल के लिए यातना से कम नहीं होता। सत्या के जाने के बाद एक रात इंद्रनील नशे की हालत में बुलबुल को पीटकर अधमरा कर देता है।उसके पैरों को बुरी तरह ज़ख़्मी कर देता है। इसके बाद इंद्रनील घर छोड़कर चला जाता है। मंदबुद्धि महेंद्र ज़ख़्मी बुलबुल का यौन उत्पीड़न करता है। गांव का ही एक डॉक्टर सुदीप बुलबुल का इलाज करता है। 

इंद्रनील के जाने के बाद बड़ी बहू होने के नाते बुलबुल घर की मुखिया बन जाती है। महेंद्र की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। बिनोदिनी मानती है, उसे चुड़ैल ने मारा है।सत्या लंदन से लौटता है। बुलबुल ख़ुश होती है, मगर उसके अंदर कुछ बदल चुका होता है। उसकी बातों और मुस्कान में अब रहस्य की परत रहती है।

उधर, गांव में पुरुषों के क़त्ल होने लगते हैं। चर्चा है कि जंगल में उल्टे पैर वाली एक चुड़ैल है, जो मर्दों की जान ले रही है।लंदन रिटर्न सत्या को यह सब बकवास लगता है और वो स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर सच्चाई जानने के अभियान पर निकल पड़ता है। इस बीच डॉक्टर सुदीप के साथ बुलबुल को घुलते-मिलते देख सत्या को पहले जलन होती है, फिर ज़मींदारी अहंकार जागता है और वो बुलबुल को उसके मायके भेजने का फ़ैसला करता है। 

सत्या की जांच के दौरान ऐसे  घटनाक्रम होते हैं कि कहानी फिर मोड़ लेती है और कई राज़ खुलते हैं। चुड़ैल के उल्टे पैरों का भी।

अनु गुप्ता

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