चंडीगढ़ करे आशिकी -मनोरंजन के साथ रूढ़ियों को तोड़ती फिल्म

चंडीगढ़ करे आशिकी -मनोरंजन के साथ रूढ़ियों को तोड़ती फिल्म

कहते हैं मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।

बॉलीवुड के कूल एक्टर माने जाने वाले आयुष्मान खुराना कुछ ऐसा काम करते हैं. अक्सर उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ एक खास सोशल मैसेज होता है. छोटे शहरों और कस्बों की दिलचस्प कहानी में उनके दमदार अभिनय का तड़का मनोरंजन का स्वाद चोखा कर देता है. कुछ ऐसा ही उनकी नई रिलीज फिल्म 'चंडीगढ़ करे आश‍िकी' में भी देखने को मिल रहा है, फिल्म 'काई पो चे' और 'रॉक ऑऩ' फेम डायरेक्टर अभिषेक कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म को समीक्षकों द्वारा जबरदस्त पॉजिटिव रिएक्शन मिल रहा है।

इसे एक बेहतरीन फिल्म बताया जा रहा है, जो कोरोना काल में आई अबतक की सबसे शानदार फिल्म मानी जा रही है, ये फिल्म रूढ़िवाद की बेड़‍ियों को तोड़ती नहीं, लेकिन झकझोरने का काम जरूर करती है.

काम की बात करें तो मनविंदर मुंजाल उर्फ मनु (आयुष्मान खुराना) बॉडी बिल्डर है, जो चंडीगढ़ में जिम चलाता है. जो कुछ बनने की चाह है, जिसके लिए वह जिम में पसीने बहाता है मनु के घरवाले उसकी शादी के लिए उस पर दबाव डालते है.

इसी दौरान पटियाला से मानवी (वाणी कपूर) जुम्बा की ट्रेनिंग देने आती है,दोनों के बीच प्यार हो जाता है यह प्यार बहुत जल्द परवान चढ़ता है,लेकिन जब मनु के सामने मानवी अपने अतीत का खुलासा करते हुए बताती है कि वह ट्रांस गर्ल है, तब मनु के पैरों तले धरती खिसक जाती है. इसके बाद दोनों के जीवन और परिवार में जो भूचाल आता है, वह देखने काबिल है. क्या मानवी को मनु और उसका परिवार अपना पाएगा? बॉडी बिल्डर करियर का अब क्या होगा? इन तमाम सवालों का जवाब जानने का मजा थिएटर में ही आएगा।

आयुष्मान जबरदस्त कलाकार हैं और चंडीगढ़ करे आशिकी में यह बात वे एक बार फिर साबित करते है. जिस तरह से उन्होंने इस रोल के लिए बॉडी बनाई है वो काबिल-ए-तारीफ है, साथ ही जो एटीट्यूड उन्होंने पकड़ा है वो कमाल का है. बिलकुल अपने किरदार में घुस गए है, वाणी कपूर इस फिल्म का सरप्राइज है. उन्हें कई इमोशनल सीन मिले जिसमें उन्होंने अपनी टैलेंट दिखाया है बाकी सभी एक्टर्स का भी सपोर्ट उम्दा है।
 
चंडीगढ़ करे आशिकी मनोरंजन करने के साथ-साथ रूढ़ियों की बेड़ियों को तोड़ती है आयुष्मान जैसी हिम्मत कम एक्टर ही दिखाते है, अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर एक गंभीर मुद्दे को सामने लाने की चुनौती भी बहुत कम लोग स्वीकार कर पाते हैं. वाणी कपूर ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. उनके अभिनय की तारीफ होनी चाहिए।

फिल्म जिस थीम पर आधारित है, उसके लिए हां कहने की हिम्मत हर नायिका में नहीं हो सकती. एक तरह से कहा जाए तो एक एक्टर के रूप में वाणी का 'पुनर्जन्म' हुआ है. 'काईपोचे' और 'रॉक ऑऩ' जैसी फिल्मों के निर्देशन के बाद 'चंडीगढ़ करे आश‍िकी' में भी अभिषेक कपूर ने अपने बेहतरीन परफॉर्मेंस को दोहराया है. वह बेहद संवेदनशीलता के साथ विषय को संभालते हैं. सेकंड हाफ में छोटी-छोटी गलतियां जरूर हुई हैं, लेकिन फिल्म अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रही है।

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0