करोना को खत्म करना है

सब कह रहे हैं कोरोना को खत्म करना है।
एक अहम सवाल! लेकिन कैसे?
क्या इसका कोई जवाब है किसी के पास, क्या कोई नेता, कोई वरिष्ठ अधिकारी, कोई समाज के उच्च पदासीन माननीय मंत्री या मुख्यमंत्री या आदरणीय प्रधानमंत्री जी के पास है इसका जवाब??
आप सब ये पढ़कर सोच रहे होंगे कि क्या बेतुका सवाल है, सभी कोशिश कर तो रहे हैं इस महामारी से लड़ने की , इस विषय परिस्थिति से उबरने की, सभी उच्च अधिकारी एवं आम जनता सभी चाहते हैं कि इस महामारी का विनाश हो।
मगर क्या सही मायने में सही कोशिश की जा रही है?
यदि हां तो फिर ये महामारी और अधिक और क्यों फैलती जा रहीं है?
दरअसल कोशिश हर इन्सान कर रहा है, लेकिन ग़लत।
इस समय देश के जो हालात हैं, क्या हालात में कुंभ जैसे महामेले को रोकना सही नहीं?
इस समय जो देश की परिस्थिति है क्या ऐसे में चुनाव स्थगित करना सही नहीं?
इस समय देश को जो करोना नाम का सर्प डस गया है क्या उनके उपचार के लिए उस ज़हर को निकालने के लिए सोशल - डिस्टेंस सह नहीं?
क्या आवश्यकता है इतनी भारी-भरकम तादात में लोगों को जमा कर के रैलियां करने की। माना चुनाव भी आवश्यक होते हैं, अगर वोट देने वाले ही नहीं होंगे तो चुनाव कैसे लड़ोगे? जब प्रजा नहीं होगी तो राजा राज किस पे करेगा?
बीते एक वर्ष में इस कोरोना ने बहुत कुछ दिखाया और सिखाया है इन्सान को, हर इन्सान एक - दूसरे की मदद के लिए हर पल तत्पर रहने लगा है, क्योंकि इन्सान को आभास हो गया है, कि इन्सान अकेले ज़िंदगी नहीं काट सकता, परिवार, समाज की अहमियत समझ गया है इन्सान। ये सब हुकुमुरान को सोचना चाहिए, अगर देश के कोश में वैक्सीन के लिए धन पर्याप्त नहीं है, तो जनता से मदद ली जा सकती है, जिस तरह पिछले साल मोदी जी ताली-थाली, दिए जलाना, या संपूर्ण लाॅक डाऊन के लिए कहा, और सबने बात मानी, तो क्या आदरणीय मोदी जी अगर अब भी कोई कदम उठाते या जनता से मदद करने के लिए कहते, तो जनता बढ़-चढ़कर मदद करती। जहां पिछले साल इतनी वस्तुएं महंगी की, तो क्या जनता ने नहीं खरीदी, जनता की ही भलाई के लिए अगर थोड़ी और मंहगाई करनी पड़ती तो भी जनता कोई रोष प्रकट ना करती, मदद के लिए हज़ारों हाथ आगे आते।
जहां लोग मन्दिर- मस्जिद में हज़ारों - लाखों का दान दें सकते हैं, वो इन्सान के जीवन के लिए दिया जाता, मन्दिरों- मस्जिदों में बेअंत धन है, क्या उसे जनता की भलाई के लिए प्रयोग करने से इश्वर मना कर देंगे?
इस समय अस्पतालों में बहुत बुरा हाल है, 10 बैड हैं और पेशेंट 15-16 हैं, आक्सीजन की कमी है, ज़रूरत 10 को है और आक्सीजन किट 4 हैं, तो बाकी कहां जाएं। वैक्सीन नहीं मिल रही किसी को, तो कोई आक्सीजन की कमी से मर रहा है। कुछ तो जानबूझकर अपनी बीमारी को छुपा रहे हैं, जब कोई इश्वर को प्यारा हो जाता है, तब पता चलता है कि फलां पोसिटिव था, उन्हें अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जाता, अस्पताल की खराब दशा के चलते। श्मशानघाट का इससे भी बुरा हाल हो रहा है, मौतें इतनी ज्यादा हो रही हैं कि जलाने के लिए स्थान नहीं है। लाशों पर लाशें पड़ी कहीं सड़ रही है, तो कहीं जल रही है।??
मेरे देश के सभी सम्मानित नागरिक आगे आए और मेरे देश को इस तरह से मरने से बचाएं

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

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