क्यों उठते हैं आखिर ऐसे कदम !

दूर से बहुत छोटा ,सूक्ष्म दिखने वाला कीड़ा जब दिमाग में किसी तरह चला जाता जिसे आप डिप्रेशन कह सकते है , निराशावाद कह सकते हैं ,तो यही सूक्ष्म कीड़ा ब्रेनहेमरेज या आपको पेरलाइज़ कर सकता है। सुशांत अक्सर इंटरव्यू में कहा करते थे की उन्हें "दुःख है की उनकी कामयाबी और खुशियां बांटने के लिए उनकी माँ इस दुनिया में नहीं है और अपनी माँ के ना होने ने उन्हें निराश कर दिया है। 

क्यों उठते हैं आखिर ऐसे कदम !

सुशांत सिंह राजपूत ३४ वर्ष के युवा सफल बॉलीवुड अभिनेता की फांसी लगाकर आत्महत्या करने की खबर ,कुछ कह कर गयी है। इस बारे में लोगों के अलग अलग मत है किसी के लिए बॉलीवुड की चमक धमक इसकी वजह है तो किसी ने कहा अकेलापन उनको निगल गया। आत्महत्या के वाकिये केवल कलाकारों या प्रसिद्ध लोगों के साथ नहीं होते , इसका आंकड़ा आम लोगों के जीवन से ज़्यादा गहरा है। गौर करने वाली बात है स्कूल में पढ़ने वाला एक छोटा बच्चा हो या कॉलेज जाना वाला स्टूडेंट या फिर अभिनेता सुसाइड नाम के इस छोटे बहुत छोटे कीड़े से हार जाते हैं। क्यों ?

दूर से बहुत छोटा ,सूक्ष्म दिखने वाला कीड़ा जब दिमाग में किसी तरह चला जाता जिसे आप डिप्रेशन कह सकते है , निराशावाद कह सकते हैं ,तो यही सूक्ष्म कीड़ा ब्रेनहेमरेज या आपको पेरलाइज़ कर सकता है। सुशांत अक्सर इंटरव्यू में कहा करते थे की उन्हें "दुःख है की उनकी कामयाबी और खुशियां बांटने के लिए उनकी माँ इस दुनिया में नहीं है और अपनी माँ के ना होने ने उन्हें निराश कर दिया है। 

माँ होती तो शायद मैं अलग होता , कोई  भी रिश्ता , दोस्ती मुझे ख़ुशी नहीं देता। इसलिए मैं एक्टिंग में खुद को व्यस्त रखता हूँ , जहाँ मैं एक अलग इंसान होता हूँ।  

ये बातें सुंशांत ने MS DHONI की रिलीज़ पर एक इंटरव्यू में कहीं थी। अगर आप यहाँ एक बात पर गौर करें तो सुशांत बहुत समय से खुद से ही भाग रहे थे। मानसिक अवसाद की स्थिति में जब आपको लगता है की आप कमज़ोर पड़ रहे हैं और सुनने वाला कोई नहीं है ,तब ये अवसाद जीवन खत्म करने लिए दिन रात आपके दिमाग से बातें करता है। क्यूंकि आप तो खुद से रिश्ता तोड़ चुके होते हैं। 

दुःख होता है तो रो लीजिये ,दुनिया और लोग आपको कमज़ोर समझेगें ये सोचकर ना रोने से आपको कुछ हासिल नहीं होगा।

गुस्सा आता है तो गुस्सा निकालिये , इंसान होने की पहचान है की आपको कुछ बातें जब बुरी लगती हैं तो लोगों को दिखाइए की आप नाराज़ हैं !

ख़ुशी का पल है तो ज़ोर से हँसिये ,अक्सर होता ये है ,खुशियों को नज़र लग जाने का डर हमसे हमारी ख़ुशी भी छीन लेता है। अपनी ख़ुशी बाँटिये दोस्तों के साथ , परिवार के साथ और सबसे पहले खुद के साथ !

कुछ अच्छा काम किया है तो खुद की पीठ थपथपाइए। जब तक आप खुद की मदद नहीं करेंगे ,कोई आपकी मदद नहीं कर सकता। 

अपने फ़ोन कम से कम पांच ऐसे लोगों के फ़ोन नंबर स्टार मार्क करके रखिये , जिन्हे बिना सोचे समझे और तोल मोल के आप अपने मन की बात कह पाएं। 

सुनना सीखिए ,अगर कोई मन की बात आपसे कहे तो बस सुनिए ,बिना कोई सुझाव या राय दिए। 

ज़िंदगी रहेगी तो सब गुलज़ार रहेगा। 

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