देश के पहले राष्ट्रपति - जिनकी कॉपी देखकर कहा गया ...परीक्षक से परीक्षार्थी बेहतर है

देश के पहले राष्ट्रपति - जिनकी कॉपी देखकर  कहा गया ...परीक्षक से परीक्षार्थी बेहतर है

भारत की भूमि वीरपुत्रों, स्वतंत्रता सेनानियों एवं कई ऐसे राजनेताओं से सुसज्जित है जिन्होंने अपना पूरा जीवन केवल देश की सेवा के लिए न्यौछावर कर दिया है।

 इन्हीं में से एक देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी भी है। राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सबसे बड़े पुरस्कार भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। 

डॉ. राजेंद्र प्रसाद वह शख्सियत थे जिनकी योग्‍यता के कायल महात्‍मा गांधी भी थे।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद पढ़ाई-लिखाई में बचपन से ही अव्‍वल राजेंद्र प्रसाद की कॉपी देखकर एक परीक्षक ने लिखा था, 'परीक्षार्थी परीक्षक से बेहतर है.' (The Examinee is better than Examiner)

डॉ. प्रसाद वैचारिक रूप से जितने उच्‍च थे, जीवन उन्‍होंने उतनी ही सादगी के साथ जिया. जल्‍दी सोना और जल्‍दी जागना उनकी आदतों में शुमार रहा. 1915 में उन्होंने स्वर्णपदक के साथ लॉ में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और बाद में फिर शोध भी किया।

आइए उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके प्रेरणादायक विचार-

*जो बात सिद्धांत में गलत है, वह बात व्यवहार में भी सही नहीं है।

*खुद पर उम्र को कभी हावी नहीं होने देना चाहिए।

*कोई भी किसी को एक तरह धक्का नहीं दे सकता |

*जो मैं करता हूँ, मैं उन भूमिकाओं के बारे में सावधान रहता हूं।

डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर शत-शत नमन!

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