धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का

धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का

#दादी नानी की कहावतें मुहावरे
 
धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का


सोनू  एक बहुत ही अच्छा हाॅकी प्लेयर था । वह इतना अच्छा खिलाड़ी था कि उसमे भारतीय हाॅकी टीम में होने की योग्यता थी । 
वह हाॅकी तो खेलता पर उसे दूसरो के कामों में दखल अन्दाजी करना बहुत पसंद था । वह दृढ़ निश्चयी नहीं था । जो दूसरे लोग करते थे वह भी वही करता था । यह देखकर उसकी माँ ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की कि यह आदत उसे जीवन में कितनी भारी पड़ सकती है पर वह नहीं समझा । 
समय बीतता गया और उसका अपने काम के बजाय दूसरो के काम में दखल अन्दाजी करने की आदत ज्यादा हो गयी । वह कभी हाॅकी का अभ्यास करता कभी दूसरे खेलो का अभ्यास करता था । उसका मन चंचल होने के कारण वह हाॅकी के अभ्यास के लिए नहीं जाता ,बल्कि दूसरे दोस्तों के साथ अन्य अलग-अलग खेल खेलने लग जाता था।
 कुछ ही दिनों के बाद शहर में ऐलान किया गया कि नगर में सभी खेलों के लिए एक चयन होगा । जिसमे जो भी चुना जाएगा उसे भारत के राष्ट्रीय दल में खेलने को मिल सकता है । सभी यह सुनकर बहुत ही खुश हुए ओर वहीं दिन से सभी अपने खेल में चुनने के लिए जी-जान से मेहनत करने लगे , सभी के पास सिर्फ दो दिन थे । 
सोनू ने भी अपना अभ्यास शुरू किया पर पिछले कुछ दिनों से अपने खेल के अभ्यास में जाने की बजाय दूसरो के खेल के अभ्यास में जाने के कारण उसने अपना शानदार प्रदर्शन खो दिया था । दो दिन के बाद चयन का समय आया ।सोनू ने खूब कोशिश की पर अभ्यास की कमी के कारण वह अपना शानदार प्रदर्शन नहीं दिखा पाया और उसका चयन नहीं हुआ , वह दूसरे खेलों में भी चयनित न हुआ, क्योंकि व़े सब खेल उसे सिर्फ थोड़ा आते थे ओर किसी भी खेल में वह माहिर नहीं था । जिसके कारण वह कोई भी खेल में चयन नहीं हुआ और उसके जो सभी दूसरे दोस्त थे उनका कोई न कोई खेल में चयन हो गया क्योंकि वे दिन रात मेहनत करते थे ।अंत में सोनू को अपने सिर पर हाथ रखकर बैठना पड़ा और वह धोबी के कुत्ते की तरह बन गया जो न घर का होता है न घाट का ।
इससे हमें पता चलता है कि जीवन में जो कुछ भी करे सिर्फ उसी में ध्यान दे और दूसरो से विचिलित न हो वरना वह धोबी के कुत्ते की तरह बन जाएगे जो न घर का न घाट का होता है ।

#दादी नानी की कहावतें मुहावरे
                         Seema Praveen Garg

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