दीदी, स्कूटर सिखा दूं

दीदी, स्कूटर सिखा दूं

दूबे जी की छह बेटियां थी उनकी छोटी सी नौकरी थी सो अपनी हैसियत के अनुसार अपने बच्चों को पाल रहे थे |अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दी | धीरे -धीरे करके अपनी चार बेटियों की अच्छे घर में शादी कर दी | बेटियां भी अपने घर गृहस्थी में रम गयी | पांचवे नंबर वाली बेटी एक स्कूल में अध्यापिका हो गयी|

कहते हैं न सभी एक जैसे नहीं होते उनकी भी बेटियों के नेचर अलग - अलग थे | जिसमें तीसरे नंबर वाली बेटी कभी खुश ही नहीं रहती थी उसको लगता था कि पापा ने उनके लिए कुछ किया ही नहीं है जल्दी शादी कर दी आगे पढाया भी नहीं और जब उसको ये पता चला कि बहन नौकरी कर रही है  तो उसे बहुत बुरा लगा अपनी और बहिनों को फोन करके भडकाया " देखा हमारी तो शादी कर दी और उसको नौकरी करने दे रहे हैं " तब बड़ी बहिन ने कहा पिता जी ने हमें कभी कुछ मना नहीं किया वो तो जैसा हमने किया वैसा हमें फल मिला वो तो रीता हम सभी में पढने में होशियार है और उसकी नौकरी लग गयी तुम्हे तो खुश होना चाहिए |

फिर कुछ समय बाद उसकी भी शादी हो गयी अब सिर्फ उनकी छोटी बेटी बची थी अब खरचा भी इतना नहीं था | उनकी छोटी बेटी ने उनसे कहा " पापा में क्रिकेट में अपना कैरियर बनाना चाहती हूँ " उन्होने कहा बेटा देख लो तुम कर पाओगी उसने कहा पापा आप एक बार हां तो कहो मैं  आपको करके दिखाउगी| पापा आप जानते हैं न मुझे स्कूल के टाइम में भी गेम्स में प्राइज मिलते ही रहे और अभी में कालेज की टीम में सेलेक्ट हो गयी हूँ | उन्होंने हां कर दिया और उनकी छोटी बेटी खेलने जाने लगी और उसका सेलेक्शन स्टेट की टीम में हो गया|

एक बार उनकी तीसरे नंबर की बेटी अपने मायके आयी तब उसे पता चला कि उसकी बहिन खेलने जाती है और स्कूटर भी चलाती है जलन के मारे अपनी माँ से अपने पापा की बुराई शुरू कर दी|अब पापा ने बडी़ छूट दे रखी है शहर से बाहर जाती है स्कूटर भी चलाती है "|अब पापा कुछ नहीं कहते उसकी बात छोटी ने सुन ली

उसने कहा दीदी आप क्या भडका रही है मम्मी को मेरा कैरियर है मेरा फैसला है कि मैं क्या करूगीं ऐसा नहीं पापा ने आप लोगो को पढाया नहीं अपनी हैसियत से ज्यादा ही किया आपके लिए इतनी अच्छी शादी की और आपने जाब नहीं की या यूँ कहें आपको जाब मिली नहीं इसमें आप पापा मम्मी को दोष क्यों देती हैं

और रही बात स्कूटर चलाने की चलिये अभी सिखाती हूँ आपको उसकी दीदी खिशिया कर बोली रहने दो हमें नहीं अपनी हड्डी तुडवानी|

स्वरचित

श्रुति त्रिपाठी

#my life my choice

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