दीघा-प.बंगाल का गोवा

दीघा-प.बंगाल का गोवा

घूमने का नाम सुनकर चेहरे पर एक अलग तरह की रौनक आ जाती है।मन प्रफुल्लित हो उठता है,हम तरोताज़ा महसूस करने लगते हैं।हो भी क्यों न,हम डेली लाइफ में इतने व्यस्त होते हैं,एक मशीन की तरह काम करते रहते हैं जैसे एक मशीन को बंद करने की जरुरत होती है वैसे ही मनुष्य को भी कुछ दिन आराम,प्रकृति के सानिध्य की जरुरत होती है।कुछ दिन प्रकृति के सानिध्य में रहने के बाद मनुष्य दुगुनी ऊर्जा से अपने काम को बेहतरीन तरीके से करता है।

इसी साल जनवरी में हम दोनों पति-पत्नी ने दो दिन के घूमने का प्लान बनाया।इसके लिए वीकेंड चुना।सबसे पहले सोचा शिलांग जाया जायेंं पर फिर सोचा पुरी जाया जाये पर अंततः दीघा का प्लान फाइनल हो गया।मेरे पति अश्वनी ने दस दिन पहले ही ऑनलाइन होटल और ट्रेन बुक करवा ली थी।हम लोगों को 12 जनवरी को जाना था और 14 की वापिसी थी।घूमने के लिए हम लोग इतने एक्साइटेड थे कि हम लोगों ने पैकिंग चार-पाँच दिन पहले ही शुरू कर दी।

अगले दिन 12 जनवरी को हम लोग ट्रेन पकड़ने के लिए सुबह साढ़े नौ बजे घर से हाबड़ा जंक्शन के लिए निकल लिए।हमलोगों को हाबड़ा स्टेशन से हाबड़ा दीघा ए.सी.सुपर एक्सप्रेस ट्रेन पकड़नी थी।यह ट्रेन हाबड़ा से दीघा प्रतिदिन सुबह 11:10 छूटती है और 14:20 को दीघा पहुंचा देती है।हम लोगों ने ट्रेन पकड़ी ली और चल दिए सफर की ओर।रास्तों में सुंदर सुंदर धान के खेत,नारियल और ताड़ के पेड़,ब्रिज और गंगा नदी ने मनमोह लिया।ट्रेन पूरी तरह से एसी चेयर कार थी।हम लोग आराम से सफर तय कर करीब दस मिनट देरी से ढ़ाई बजे दीघा स्टेशन पहुंच चुके थे।

दीघा का स्टेशन बहुत छोटा मगर बहुत साफ और खूबसूरत था।  स्टेशन से बाहर निकलते ही ऑटो और रिक्शा वालों ने सवारियों को घेर लिया।हमारा होटल पहले से बुक था अतः हमने ई-रिक्शा किया और अपने होटल पहुंच गए।

दीघा पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लोगों के लिए भी एक लोकप्रिय वीकेंड टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। कोलकाता से 187 किलोमीटर पूर्वी मिदनापुर जिले में स्थित प्रसिद्ध सी बीच है।
हम लोग तैयार होकर होटल मैनेजर से सलाह लेकर घूमने निकले।रात में बीच मे पाबंदी के कारण हम लोगों ने आस-पास पार्क और टूरिस्ट स्पॉट तथा थोड़ी सी शॉपिंग करने का सोचा।
हालांकि दीघा बहुत छोटा सी बीच है और यह ओल्ड दीघा और न्यू दीघा के नाम से बंटा हुआ है।ज्यादातर लोग न्यू दीघा ही रुकते हैं।न्यू दीघा में चारों तरफ आपको होटल ही होटल मिलेंगे।सबसे पहले हम लोग अमरावती पार्क गये,यहां आप परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।50 रुपये देकर आप 20 मिनट तक पैडल बोटिंग कर सकते है,केबल कार में सफर कर सकते हैं।वहां से निकलकर आप झालमूड़ी,चाट पापड़ी, गोलगप्पे जिसे बंगाल पुचका कहा जाता है का आनंद ले सकते है।इसके बाद हम वंडरलैंड गये।ठंड होने के कारण अंधेरा जल्दी घिर गया था।सात बजे ही रात हो गई थी।थोड़ा शॉपिंग करने के बाद हम होटल वापिस आ गये।
यहां का प्रसिद्द मंदिर है चंदनेश्वर मंदिर।इसके अलावा मरीन म्यूजियम है।यहां बहुत सारे सी बीचेस हैं जहां जाकर आप आनंद उठा सकते हैं।जैसे न्यू दीघा बीच,तालसारी बीच,उदयपुर बीच, दीघा बीच प्रमुख है।हम होटल के नजदीक स्थित न्यू दीघा बीच गये।उस वक्त ज्वार(हाई टाइड) था इस कारण समुद्र में जाना प्रतिबंधित था।हम लोगों विचार करके उदयपुर बीच जाना उचित समझा। हम लोग रिक्शा पफड़ कर उदयपुरबीच पहुंच गए।जो लोग सी-फूड के दीवाने हैंं या मधुशाला के दीवाने हैं उनके लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं। बीच के बाहर सड़कों पर लगी टोपी-चश्मों की दुकान,कपड़ो की दुकान दिखाई देंगी।हम लोग सुबह ग्यारह बजे उदयपुर बीच पहुंच चुके थे पर उस वक्त हाई टाइड था इस कारण समुद्र में जाने की इजाजत नहीं थी।हम लोग समुद्र किनारे ही एक टेबल बुक कर समुद्र का नजारा लेने लगे।जनवरी की ठंड में गुनगुनी धूप और पैरों से टकराती सागर की लहरें मन मोह रही थीं।
करीब ढेड दो घंटे बाद सागर का पानी नीचे उतरने के बाद सभी को सागर में जाने की इजाजत दे दी गई।यहां आप नारियल पानी,भेलपूड़ी,चिप्स,मसाले वाला कमरख और अमरूद जो की बंगाल में विशेष प्रकार से बनाया जाता है का आनंद ले सकते हैं।करीब तीन-चार घंटे बिताने के बाद हम होटल आ गये।
शाम को साइंस सिटी घूमने गये।यहां साइंस से सम्बंधित प्रयोग व जानकारी आप ले सकते हैं।उपकरण भी देख सकते हैं।इसके पश्चात हम ओल्ड दीघा गये।ओल्ड दीघा न्यू दीघा से साढ़े तीन किलोमीटर दूर है।ओल्ड दीघा के बीच का नाम भी ओल्ड दीघा है।यहां का बीच बहुत सुंदर है हालंकि साढ़े सात बजे ही अंधेरा हो गया था पर सागर की लहरों का शोर मन को मोह रहा था।यहां पर भी आपको खाने पीने का सामन और शंख आदि से बने हस्तशिल्प ले सकते हैं।यहां आप जूट का सामान बार्गेनिंग करके खरीद सकते है।वहां समय बिताने के बाद हम अपने होटल आ गये।अगले दिन हम लोगों को कोलकाता के ट्रेन पकड़नी थी।मैं और अश्विन अपने मन में ढेरों यादे लिए आ रहे थे और वादा कर रहे थे......दीघा हम फिर आयेंगे।
धन्यवाद
राधा गुप्ता 'वृन्दावनी'
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