दिल की सुंदरता

दिल की सुंदरता

कहते हैं बच्चे वही करते हैं जो वो देखते हैं , सुनते हैं | क्योंकि , उनका मन एक कोरे कागज की तरह होता है हम जैसा लिखेंगे वो वैसे ही बनेगें वही सोच विचार अपनायेंगे इसलिए तो कहा जाता है कि , बच्चों को अच्छी बातें सिखाना हमारा फर्ज है उन्हें सही गलत का ज्ञान कराना हमारा ही फर्ज हैं | ऐसी ही एक कहानी मैं, आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ कि, कैसे बच्चों पर पर देखा देखी और गलत बातों का असर होता है |                                           अनीता जो देखने में सांवली सलोनी सी थी | रंगत भले ही फीकी थी उसकी ! पर, अनीता के चेहरे की बनावट उसके नैन नक्ष बड़े ही सुदंर थे प्यारी सी पलके, लंबे कमर तक बाल उसकी शोभा बढ़ाते पर थे |

एक दिन अनीता के पापा का दूसरे शहर में तबादला हो गया अनीता उस वक्त दसवीं में पढ़ती थी | पापा का तबादला होंने के बाद अनीता और उसकी माँ , पापा के साथ दूसरे शहर जाते हैं वहां जाने के बाद अनीता का एडमिशन नये स्कूल में होता है स्कूल के कुछ बच्चे अनीता के पड़ोस में रहते थे जो करीब सातवीं कक्षा में पढ़ते थे | अनीता अपनी सांवली रगंत की वजह से अन्य बच्चों से कटी - कटी रहती थी | पढ़ने में वह होशियार और हर क्षेत्र में अव्वल आती थी |

एक दिन , अनीता के नये स्कूल में उसे काली लड़की कहकर पुकारा गया वह मन ही मन बहुत दुखी होती है और अनीता के स्कूल में जो बच्चे अनीता को काली लड़की के नाम से पुकारते थे वे अनीता के पड़ोस में ही रहते थे उन बच्चों की बातों को सुनकर पड़ोस के अन्य बच्चे भी यही कहकर पुकारते थे अरे काली लड़की आ गयी |  किसी ने कहा अरे ! वही दीदी है न् जिसे हमारे स्कूल में काली कहकर पुकारते हैं अनीता, अब स्कूल जाने से कतराने लगती है | अनीता के पापा ने जब अनीता से स्कूल न जाने का कारण पूँछा तब अनीता ने स्कूल का सारा वृतांत पापा से बताया | अनीता के पापा ने , अनीता को समझाते हुए कहा मेरी प्यारी गुड़िया रानी , कितनी होशियार है दिल की कितनी प्यारी है कहने दो जिसे जो कहना हो ! एक दिन सभी को समझ आ जायेगा कि मेरी गुड़िया जैसी सुंदरता किसी के पास नहीं ? पापा की बात सुनकर अनीता के चेहरे की खुशी वापस लौट आई और अनीता फिर स्कूल जाना शुरू करती है अनीता सबकी बातों को नजरअंदाज करके खूब मन लगाकर पढ़ती है और दसवीं कक्षा में टॉप करती है सभी बच्चे अपने घर पर अब अपने अपने मा पापा से कहते कि, वो जो अपने पड़ोस में काली सी दिखने वाली दीदी हैं न उन्हीं ने टॉप किया हैं हमारे स्कूल में ! एक दिन ऐसे ही सातवी कक्षा में पढ़ने वाले आरव ने बड़े ही आश्चर्यजनक तरीके से अपने पापा से कहा पापा , पापा वो अपने पड़ोस में दीदी आई हैं न् अरे जो काली हैं उन्होंने ही टॉप किया है हमारे स्कूल में ! आपको पता है पापा, हमारे स्कूल में सब उन्हें काली लड़की के नाम से बुलाते हैं | आरव के पापा , आरव की बातें बड़े ध्यान से सुन रहे थे उन्हें अच्छी तरह से मालूम हो चुका था कि मेरा बेटा वही कहता है जो और बच्चों से सुनता है यह गलत है अनीता क्या सोचती होगी ? आरव के पापा ने , आरव को समझाते हुए कहा बेटा आरव वो दीदी हैं आपकी ! उन्हें मान देना सीखो | वो बहुत होशियार और अव्वल हैं उनकी सूरत पर क्यों जाते हो उनकी सीरत देखो अर्थात् मन | सूरत से ज्यादा सुदंर मन होंना चाहिये और वो दीदी के पास है | सुदंर मन देखो न् ! स्कूल में दीदी ने कभी किसी से कुछ कहा ? कभी किसी से झगड़ा किया ?  नहीं न् ? जो कि, तुम सारे बच्चे कितने गलत नाम से पुकारते हो उन्हें ? एक बार उनसे दोस्ती करो और सॉरी कहो उनसे !  फिर देखना तुम्हें खुद समझ आ जायेगा कि दीदी कितनी अच्छी हैं | बेटा बड़ी हैं वो आपसे |आप उन्हें ऐसे कहते हो,  उन्हें ……कितना दुख होता होगा | आज के बाद उन्हें इस नाम से कभी मत पुकारना ? तुमने कभी सोचा है यदि तुम ऐसे होते और सारे स्कूल व पड़ोस के बच्चे तुम्हें यूँ चिढ़ाते तब क्या करते तुम ? पापा की बात सुनने के बाद आरव के पास कोई जवाब नहीं था वो पापा की सारी बात समझ चुका था कि , वह कितना गलत था पापा के कहने के मुताबिक वह अनीता के पास गया और अनीता से कहा सॉरी दीदी माफ कर दो मुझे आप मेरी बड़ी दीदी हो ! आरव की बात सुनकर अनीता बेहद खुश होती है और वह आरव को खुद पढ़ाती है अब आरव , अनीता की सीरत को समझने लगता है और स्कूल जाने के बाद सभी से कहता है मैं अनीता दीदी से पढ़ता हूँ बहुत अच्छी हैं दीदी अब कोई उन्हें कुछ मत कहना मैंने तो दीदी से दोस्ती कर ली है तुम सब भी दीदी से दोस्ती करों न् दीदी बहुत अच्छी हैं | आरव की बातों से आरव के दोस्तों ने भी अनीता से माफी मांग ली और धीरे धीरे अनीता के हुनर से पूरे स्कूल में एक नया नाम मिल गया हमारे स्कूल का गौरव हैं दीदी !

सभी बच्चे अनीता को प्यार से दीदी कहने लगे और अनीता के सहपाठी भी अऩीता के हुनर पर तालियां बजाने लगे सबने अनीता से माफी मांग ली और अनीता की खोई हुई खुशी फिर फिर से वापस मिल गयी | वक्त रहते सभी को एहसास हो गया था कि चेहरे की रंगत से ज्यादा दिल की सुदंरता मायने रखती है सुदंर और गोरे रंग का क्या फायदा जब दिल की सुदंरता न हो |

धन्यवाद !! रिंकी प्रीति पांडेय                                                                      #NoMoreBodyShaming

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