ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार के बेहतरीन डायलॉग, जो हमेशा रहेंगे यादगार

ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार के बेहतरीन  डायलॉग, जो हमेशा रहेंगे यादगार

हिंदी सिनेमा के ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं,लेकिन अपने डायलॉग के जरिये वो लोगों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहेंगे ।

यहां हम उनके 10 सदाबहार डायलॉग के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें शायद कभी भी कोई भूलना नहीं चाहेगा।

मुगल-ए-आजम -

जो लोग सच्चाई की तरफदारी की कसम खाते हैं, जिंदगी उनके बड़े कठिन इम्तिहान लेती है।

मुगल-ए-आजम-

तकदीरें बदल जाती हैं, जमाना बदल जाता है, मुल्कों की तारीख बदल जाती है, शहंशाह बदल जाते हैं, मगर इस बदलती हुई दुनिया में मोहब्बत जिस इंसान का दामन थाम लेती है वो इंसान नहीं बदलता।


नया दौर -
जिस धन के लिए आप दुनिया से धोखा कर रहे हैं, अपने अजीजों से, अपने दोस्तों से धोखा कर रहे हैं, अपने साथियों से धोखा कर रहे हैं, उसी धन के हाथों आप खुद भी धोखा खाएंगे।


शक्ति-
शेर को अपने बच्चों की हिफाजत के लिए शिकारी कुत्तों की जरूरत नहीं है।

मजदूर -
 साहब मैंने अपने हाथों की मेहनत बेची है।

नया दौर-
 जब अमीर का दिल खराब होता है न.. तो गरीब का दिमाग खराब हो जाता है।

क्रांति-
कुल्हाड़ी में लकड़ी का दस्ता ना होता, तो लकड़ी के काटने का रास्ता ना होता। 


विधाता-
बड़ा आदमी अगर बनना हो तो छोटी हरकतें मत करना। 

बैराग-
प्यार देवताओं का वरदान हैं जो केवल भाग्यशालियों को मिलता हैं। 


संगदिल-
मैं किसी से नहीं डरता, मैं जिंदगी से नहीं डरता, मौत से नहीं डरता, अंधेरों से नहीं डरता, डरता हूं तो सिर्फ खूबसूरती से।


दिलीप कुुुमार ने अपने अंदाज में ये डायॅलाग बोलकर इन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया है ।

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0