क्या आप महिलाओं के अधिकारों के बारे में जानते हैं ?

क्या आप महिलाओं के अधिकारों के बारे में जानते हैं ?

हमारे समाज में महिलाओं के प्रति  सोच और नजरिये में पिछले कुछ दशकों में  सकारात्मक बदलाव आया है। पर इन बदलावों का मलतब यह नहीं है कि पुरुष और महिलाएं बराबरी पर पहुंच गए हैं। समानता की यह लड़ाई अभी काफी लंबी चलनी है। 

दुनिया के कई देशों में आज भी महिलाएं अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं। इनमें अपना देश भारत भी शामिल है। 

आज भी अधिकांश महिलाएं अपने अधिकारों और हक के बारे में सही तरीके से जानती तक नहीं हैं, जबकि होना तो यह चाहिए कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी रहनी चाहिए।

आइए यहां बात करते हैं महिलाओं के कुछ अधिकारों के बारे में जिन्हें हर महिला को पता होना चाहिए-

*गिरफ्तार नहीं होने और पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन न बुलाने का अधिकार-
सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। यदि महिला ने कोई गंभीर अपराध किया है तो पुलिस को मजिस्ट्रेट से यह लिखित में लेना होगा कि रात के दौरान उक्त महिला की गिरफ्तारी क्यों जरूरी है।

*नि:शुल्क कानूनी सहायता का अधिकार-
एक महिला होने के नाते सबको यह पता होना चाहिए कि आपको भी हर प्रकार की कानूनी मदद लेने का अधिकार है और आप इसकी मांग कर सकती है। 

*उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार-
काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है।

*नाम न छापने का अधिकार-
 यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है. अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है।

*घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार-
शादी नहीं टूटनी चाहिए, यह विचार भारतीय महिलाओं के जेहन में इतना जड़ें जमा चुका है कि वे अकसर बिना आवाज उठाए घरेलू हिंसा झेलती रहती हैं। 
ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है. आप या आपकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है।

*जीरो एफआईआर का अधिकार-
एक महिला को ईमेल या पंजीकृत डाक के माध्यम से शिकायत दर्ज करने का विशेष अधिकार है। यदि किसी कारणवश वह पुलिस स्टेशन नहीं जा सकती है, तो वह एक पंजीकृत डाक के माध्यम से लिखित शिकायत भेज सकती है।
कोई भी पुलिस स्टेशन इस बहाने से एफआईआर दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकता है कि वह क्षेत्र उनके दायरे में नहीं आता।


पहचाने अपने अधिकारों को और जरूरत पड़ने पर कीजिए उनका इस्तेमाल।

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