90 के दशक की याद दिलाती दम लगा के हईशा

90 के दशक की याद दिलाती दम लगा के हईशा

भूमि पेडनेकर ने जिस फिल्म से  अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी उस फिल्म को पांच साल पूरे हो गये है ।
आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की फिल्म 'दम लगा के हईशा' ने  अपने पांच साल पूरे कर लिए हैं।

इस मौके पर फिल्म के दोनों ही मुख्य कलाकारों ने इंस्टाग्राम पर अपनी खुशी अनोखे तरीके से साझा की। जहां आयुष्मान ने लिखा, 'दम लगा के हईशा के पांच साल पूरे। मेरी खास फिल्मों में से एक।' वहीं भूमि ने लिखा, 'प्रेम और संध्या, मेरी लाइफ बदलने के लिए शुक्रिया। मुझे ऐसी फिल्म देने के लिए शुक्रिया जो मुझे उम्र भर याद रहेगी और उसका किरदार जो हमेशा मेरा हिस्सा बना रहेगा।'इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था।


फिल्म उस दौर की याद दिलाती है  जहां अरेंज मैरिज सामान्य बात हुआ करती थी। एक बार परिवार वालों ने जो रिश्ता तय कर दिया उसे निभाना होता था।
इसकी कहानी  हमें 90 के उस दशक तक ले जाती है. जब दुकान पर बैठे लड़को को ये हकीकत थी कि  सानू के गाने सुनकर शाहरुख के सपने कितना भी देख लो शादी माँ बाप की मरजी से ही होनी है ।

फिल्म उस दौर की याद दिलाएगी जहां अरेंज मैरिज सामान्य बात हुआ करती थी। एक बार परिवार वालों ने जो रिश्ता तय कर दिया उसे निभाना होता था।
फिल्म पति पत्नी के रिश्ते की, प्यार की पड़ताल करती है. ये नए सिरे से इस बात को जमाती है कि शादी सिर्फ दो शरीरों और दो दिलों का भी मिलन है ।

फ़िल्म ‘दम लगाके हईशा’ में एक मोटी लड़की को पति का प्यार हासिल करने की जद्दोजेहद, एक युवा लड़के को मोटी पत्नी के साथ दोस्तों के बीच या बाजार में साथ लेकर चलने की कशमकश, एक परिवार को जोड़े रखने की कोशिश को बहुत ही अच्छे से परदे पर पेश किया गया है। फ़िल्म देखते समय एक छोटा शहर, वहां की भाषा, वहां की उलझनें, वहां की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी परदे पर एक दम रियल लगती है।


अनु गुप्ता

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