एक अदृश्य योद्धा- शिक्षक

एक अदृश्य योद्धा- शिक्षक

एक अदृश्य योद्धा-  शिक्षक

ब्च्चों के कोरे मन पर ज्ञान अमिट लिख जाते,
अपने यकीन से बच्चों को ,खुद पर भरोसा ,करवा जाते,
महफ़ूज रखते, अपनापन देकर,
खुद के कदम वहीं रखते,पर,
बच्चों को , उनकी मंजिल तक पहुँचा देते ,
ये गुण है उस योद्धा के,जो कहलाते हैं शिक्षक।

प्रकाशपुंज का आधार बनकर, कर्तव्य अपना करते,
निष्ठा का भाव और जुनून लिये,
छात्रों के जीवन, को रंग जाते,
क्या सोचें ,के बदले ,कैसे सोचें ,ये सिखला जाते,
इसलिए,यह समाज के अभिन्न अंग कहलाते
उस सदगुण के धारक, हैं यह शिक्षक।

ये वो सेतु हैं ,जिनके संग्रहित विद्या से,
बच्चे सफलता के पुल बाँधते,
ये वो निर्माता हैं ,सृजनकर्ता हैं
हर उस ज्ञान के भंडार की,
हर एक रोज़गार की,
ये माध्यम हैं, वह सर्वोच्च अधिकार हैं,
बच्चों के लिये,एक आशीर्वाद हैं,
प्रबलता के धारक हैं,
अदृश्य योद्धा हैं शिक्षक।
                  
                सुषमा त्रिपाठी

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0