एक था नाम विकास .

एक था नाम विकास .

एक था नाम विकास .....  

80 और ९० के दशक का ये मशहूर नाम था | विजय , राज, राजू जहाँ मूवीज में हावी थे वही पर  माध्यम वर्गीय परिवार अपने बालकों का नाम विकास और विशाल रखकर खुद को विकसित और  विशाल मानने का झूठा दिखावा करता था | चाहे मुन्ना की लम्बाई ज्यादा न हो लेकिन नाम विशाल | सब कुछ ठीक चलता रहा जब तक इस विडम्बना पर ध्यान नहीं गया | फिर आया साल 2014 | 

इस साल, भारत की मासूम और भोली जनता को बताया गया की  विकास तो कभी था ही नहीं , जितना विकास हुआ है वो केवल एक पार्टी , एक परिवार का हुआ हैं | विपक्ष तो बिलकुल अविकसित हैं, भारतीय जनता के जैसे |

विकास के साथ जनता को ये भी बोला गया के यदि विकास आया तो हर किसी के खाते मैं एक अच्छी रकम आएगी | काला धन वापस देश आएगा और यहाँ आकर उसे सफ़ेद रंग से पोता जाएगा | लोगों को पेशा उनके अपने घर में ही मिलेगा और उन्हें कही दूर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी |  

विकास की लोरी ऐसी सुनाई गई के जनता जाग गई और विपक्ष को सत्ता देकर , अपने अविकास के लिए जिम्मेदार एक पार्टी को बुरी तरह हरा दिया | देश विकसित होने वाला था और सोने की चिड़िया फिर से सोने की चिड़िया बनने वाला था | 2014 से 2019 तक विकास का इंतजार चालू था |

विकास का तो पता नहीं लेकिन जिन अभागो का नाम विकास था, उनकी समस्या बड़ी भारी हो गई| विपक्ष पूछे कब पैदा होंगे तुम विकास और  पक्ष बोले तुम तो बस चुनावी जुमला थे | शयद इसी  से २०१९ के बाद से बहुत लोगों ने अपने बालको का नाम विकास रखना  बंद कर दिया हैं | 

क्या जनता को विकास शब्द से नाराजगी हैं | विकास , उम्मीदों से भरा शब्द जो  चुनावी वादों में बहुत बार आता हैं और चुनाव के बाद साला कहा भाग जाता हैं , कोण को पता ही नहीं | विपक्ष , जनता , गरीब और किसान ये सब मिलकर विकास को ही  ढूंढ रहे हैं | मैं भी विकास को ढूंढ रहा हूँ | 

कमैंट्स सेक्शन मैं अपना आस पास की विकास को टैग कर उन्हें भी उनके नाम के महिमा का ज्ञान कराइये |

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