फेयर एंड लवली अब नही रहेगी फेयर

गोरे लोग बेहतर, अक्लमंद और श्रेष्ठ होते हैं और काले लोग उनसे कमतर होते हैं. भारत में काले रंग को लेकर लोगों में हीनताबोध इतना कूट-कूट कर भर दिया गया है कि भारत गोरेपन की क्रीम और अन्य फेयरनेस प्रोडक्ट्स का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन गया है इनमें से एक क्रीम है फेयर एंड  लवली।

फेयर एंड लवली अब नही रहेगी फेयर

भारत अपनी चमड़ी और खासकर चेहरे के रंग के लेकर बेहद शर्मिंदा मुल्क है।  यह भारतीय समाज का प्रभावी विचार है कि काला असुंदर है और गोरा होना सुंदर होना है।

गोरे लोग बेहतर, अक्लमंद और श्रेष्ठ होते हैं और काले लोग उनसे कमतर होते हैं. भारत में काले रंग को लेकर लोगों में हीनताबोध इतना कूट-कूट कर भर दिया गया है कि भारत गोरेपन की क्रीम और अन्य फेयरनेस प्रोडक्ट्स का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन गया है इनमें से एक क्रीम है फेयर एंड  लवली।

देश  में करोड़ो महिलाओं को गोरा और खूबसूरत बनाने का दावा करने वाली क्रीम फेयर एंड लवली (Fair & Lovely ) अपना नाम बदलेगी. कंपनी ने इस क्रीम के नाम से `फेयर` शब्द हटाने का फैसला कर लिया है. पिछले कई सालों में इस क्रीम पर रंगभेदी होने आरोप लगता रहा है.आखिरकार तमाम दबावों के बाद इस क्रीम को बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान यूनिलिवर (Hindustan Unilever) ने नाम बदलने का फैसला कर लिया है।

कंपनी ने अपने ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि हम त्वचा को सुदंर बनाने के लिए उत्पाद बनाते रहे हैं।  कंपनी ने फैसला किया है कि अपने ब्रैंड से गोरापन शब्द का इस्तेमाल नहीं करेगी।  साथ ही अपने किसी भी प्रचार में कंपनी ने Fairness, Whitening और Lightening जैसे शब्दों को कभी इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया है।

पिछले कई  सालों से खूबसूरती और गोरापन मामले में कंपनी के इस प्रोडक्ट का विरोध होता रहा है।कई महिला संगठनों ने विरोध में कहा था कि किसी महिला की खूबसूरती उसके रंग से नहीं होना चाहिए. संगठनों का आरोप रहा है कि क्रीम में गोरापन शब्द को जिस तरह से इस्तेमाल किया जाता है उससे ये प्रतीत होता है कि सिर्फ गोरी महिलाएं ही खूबसूरत होती हैं।

फेयर एंड लवली ब्रैंड 1975 में लॉन्च किया गया था. तब से कंपनी अपने प्रचार में कई मशहूर मॉडल्स को अपने विज्ञापन में सांवले रंग से गोरा होते दिखाते रहे हैं. विज्ञापन में हमेशा यही कहा जाता है कि गोरापन चाहिए तो इस क्रीम का इस्तेमाल करें।

लेकिन सवाल आज भी वही है क्या क्रीम का नाम बदल देने से लोगों की मानसिकता और रवैया बदल जाएगा ?

अनु गुप्ता

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