अलवर के प्रमुख मेले

अलवर के प्रमुख मेले

अलवर में प्रमुख रूप से पांडुपोल, भर्तृहरि, जगन्नाथ जी और करणी माता का मेला भरता है। ये मेले ना केवल हमारी आस्था का प्रतीक है वरन् हमारी संस्कृतिक विरासत का भी हमें एहसास कराते हैं और सामाजिक एकता और पारस्परिक स्नेह संदेश भी देते हैं।
पांडुपोल मेला   
   ‌‌                 पांडुपोल मेला भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को भरता है। यह जिले का सबसे प्रमुख मेला है। लाखों की संख्या में देशी और विदेशी भक्त हनुमान जी के दर्शनों के लिए यहां आते हैं।
                  श्रद्धालु हनुमान जी की प्रतिमा को ढोक लगाते हैं, श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं तथा मन्नत मांगते हैं। कई श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर तक की डंढोती लगाकर मंदिर परिसर में पहुंचते हैं।
                ज्यादातर घरों में उस दिन चूरमा, दाल , बाटी बनाया जाता है और हनुमान जी की जोत देखी जाती है। इस दिन कलेक्टर के आदेश अनुसार सरकारी अवकाश भी घोषित किया जाता है
भर्तृहरि मेला
              भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मेरे शहर में भर्तृहरि धाम में विशाल मेले का आयोजन होता है। अलवर शहर के जयकारों में सर्वप्रथम 'भरतरी बाबा की जय' का ही जयकारा लगता है। शहरी जनता के साथ ही ग्रामीण अंचलों में रहने वाले श्रद्धालु की भी भर्तृहरि बाबा में असीम आस्था देखी जा सकती है। पशुपालक अपने पशुओं का प्रथम दूध भर्तृहरि बाबा को खिरौडी या खीर के रूप में अर्पित करते हैं उसके बाद ही उसे अपने काम में लेते हैं।मेले में जगह जगह सवामणी और भंडारे भी लगाएं जाते हैं।
जगन्नाथ मेला  
                  जगन्नाथ जी का मेला आषाढ़ सुदी नवमी या भडलिया नवमी से त्रयोदशी तक लगता है। भडलिया नवमी को पुराना कटला सुभाष चौक स्थित जगदीश मंदिर से रूपबास स्थित जगन्नाथ मंदिर तक रथयात्रा निकलती है। मेलों में खाने-पीने, खिलौनों, घरेलू सामानों की दुकानें भी लगाई जाती हैं इसके साथ ही में मनोरंजन के लिए भी विभिन्न प्रकार के झूलों की व्यवस्था की जाती है श्रद्धालु इनका खूब लुफ्त उठाते हैं।
करणी माता मेला
                      यह मेला वर्ष में दो बार लगता है प्रथम बार चैत्र शुक्ल नवरात्रों में तथा दूसरी बार कार्तिक शुक्ल नवरात्रों के नौ दिनों तक यह मेला लगता है । श्रद्धालु 'जय माता दी' के नारे लगाते हुए पहाड़ी के रास्ते नंगे पांव करणी माता के दर्शनों के लिए जाते हैं तथा प्रकृति की सुंदरता का भी लाभ उठाते हैं ।


इसके अतिरिक्त अलवर में राजगढ़ का जगन्नाथ जी का मेला, सकट में चौथ माता का मेला, नाहर सती माता का मेला भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक हैं।  

#मेराशहरमेरीपहचान  

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