फैसला

फैसला

तलाक के बाद से ही मालिनी परिवार और समाज के टी टाईम चर्चा का मुद्दा बन गई। हालाँकि काम-धाम में व्यस्त मालिनी को इस चर्चा पर ध्यान देने की फुरसत नहीं, लेकिन जब घर की चार दिवारी में हर दूसरे दिन उसकी दूसरी शादी का दवाब बनाया जाता, तब वह बिफर जाती। "क्या स्त्री का जीवन पुरुष के बिना कभी पूर्ण नहीं होता?" वह हर बार यह सवाल करती और जवाब मिलता "अभी मना कर रही हो, जब उम्र ढ़लेगी तब साथी की जरूरत का एहसास होगा। एक बार धोखा मिला, तो क्या इंसान जीना ही छोड़ दे? बेटियाँ मायके में नहीं ससुराल में अच्छी लगती हैं। भाई की शादी के बाद क्या करोगी?"

"इसी घर में रहूँगी!.... भाई के शादी के बाद भी!! जानती हो ना कानून यह घर मेरा भी है। और आत्मनिर्भर हूँ मैं, यह घर नहीं भी रहा तो अपना ठिकाना खोज लूँगी। लेकिन दुबारा आपसबके दबाव में शादी का फैसला कतई नहीं लूँगी। कोई सच्चा और अच्छा साथी मिला तभी सोचूँगी, इस बार अपनी उम्र की गिनती देख गलत फैसला नहीं लेना।"

माँ मायूस रह जाती, बेटी के सुखद भविष्य की चाह में उसे मानने का हर हथकंडा अपनाती है। लेकिन मालिनी ने अब रिश्तों के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होकर निर्णय न लेने की कसम खाई है।

अपने बत्तीसवें जन्म दिन पर उसने अचानक घर वालों पर विस्फोटक प्रहार किया "मैंने माँ बनने का निर्णय लिया है!"

"क्या...! माँ.... और तुम....पागल हो गई हो क्या?" सब एक साथ चीखे।

"हाँ क्यों नहीं? माँ बनने केलिए मातृत्व का बोध होना चाहिए, वह है मुझमें। मुझे विश्वास है, मैं एक अच्छी माँ बनूँगी। दो वर्ष पहले अडॉप्शन की अर्जी डाली थी, इतनी मशक्कत के बाद जब उन्हें यकीन हुआ है कि मेरे साथ बच्चे का भविष्य पूर्णतः सुरक्षित है, तब जाकर अनुमति मिली है। संयोग से परसों मेरा जन्मदिन भी है, और एक प्यारी सी बिटिया मेरे जीवन में शामिल होने जा रही है।"

"इतना सब निर्णय ले लिया, और किसी को कानोकान खबर तक नहीं होने दी! इतना बड़ा निर्णय अकेले कैसे ले सकती हो तुम? समाज में तरह तरह की बातें होगी, शादी....शादी कैसे होगी तुम्हारी? और जहाँ पिता का नाम पूछा जाएगा.... क्या कहोगी?" माँ परेशान होकर बहुत ज्यादा आक्रामक हो गई।

"अनुमति माँगती, तब हाँ कह देते आप? यह मेरे स्वयं का निर्णय है...अटल निर्णय। अब तो शादी उसी से करूँगी माँ जो मेरे लिए नहीं मेरी बेटी केलिए भी सही होगा। और समाज का क्या है? ऑफ़िस के काम से कुछ महीनों केलिए जर्मनी गई थी, तब इसी समाज से तुम्हें खबर मिली थी कि मैंने किसी से शादी कर ली है! तब भी तुमने सवाल पूछा, घुमा-फिरा कर पूछा। अपनी बेटी से अधिक समाज की सुनती रहोगी, तब तक बी.पी. की बीमारी बनी रहेगी। एकल अभिभावक होना कतई गलत नहीं। जरूरत होगी तब सबके सवाल का ज़वाब दूँगी। अभी तो तुम मिठाइयाँ बनाओ.... बेटी का जन्मदिन आने वाला है और उसी दिन नानी भी बन रही हो... बधाई हो नानी जी...!"
#मातृत्व
✍ रागिनी प्रीत

What's Your Reaction?

like
4
dislike
0
love
1
funny
0
angry
0
sad
0
wow
3