गुलाबी एहसास

गुलाबी एहसास

प्रिय पिंक मंच,

जिक्र-ए-गुलाबी आते ही रंगत गुलाबी हो जाती है,
तुम्हारे नाम ये मेरी पहली पाती है.....

'हैल्लो दी आपको मैंने एक ग्रुप का इन्वाइट भेजा है ज्वाईन कर लो' ...बहन के कहने पर मै पिंक मंच से जुड़ गई कोई खास उत्साह नहीं था। उस  समय दिल में क्योंकि इस आभासी दुनिया से थोड़ा दूर-दूर ही रहती थी। लेकिन यह तो एक अलग ही ग्रुप था,नवीनता और अपनापन महसूस हुआ, कभी अंताक्षरी, कभी पकवानों की सुगंध, तो कभी नृत्य और संगीत की महफिल थकान छू मंतर, कुछ ऐसी शुरुआत थी तुम्हारे साध मेरी इस गुलाबी नगरी में।

मुझे आज भी याद है होली के अवसर पर एक विड़ियो प्रतियोगिता हुई थी उसमें भाग लेना मेरे जैसी कैमरा शाई के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था और यह सम्भव हुआ इस मंच के अपनेपन के कारण। उसके बाद एक और खुशी मेरी प्रतीक्षा कर रही थी लाईव सैशन जो कि पिंक मंच और मेरा पहला लाईव था आज भी याद है हम जितने नर्वस थे बाद में उससे कहीं ज्यादा खुश ..क्यूँ न हों हमने इतिहास जो रचा था पहले और सफल लाईव का सबने बहुत सराहा । 

शादी से पहले लिखती थी लेकिन बाद में सब छूट गया पर कहीँ न कहीं एक बीज बचा हुआ था जो पनपने के लिए उपयुक्त भूमि तलाश रहा था प्रिय मंच तुमने मुझे वह  भूमि दी सखियों की सराहना ने खाद -पानी का काम किया और मेरे लेखन की लता खूबसूरत लेखों और कविताओं से सज गई।दिल की गहराइयों से बहुत-बहुत प्यार मेरे गुलाबी परिवार मुझे एक गुलाबी आकाश देने के लिए जहाँ से शुरुआत करके मैंने और मंचो से भी सम्मान पाया। ढैर सारा प्यार प्यारी वाणी को जो अपनेपन से टोक देती है कि आजकल आप लिख नहीं रहे हो।मेरे सतरंगी दोस्त तुम मेरे लिए विशेष हो क्योंकि तुम पहले ग्रुप हो जिसके साथ में जुड़ी ...मेरा पहला प्यार और पहले प्यार की खूशबू ताउम्र रहती है..... तुम्हारे लिए----
नूतन वर्ष नूतन अभिनंदन करे,
भाल तेरे उपलब्धियों का चंदन सजे,
सार्थक प्रयासों का चंहुमुखी गुणगान हो,
एक दिन ऐसा आये सर्वोच्च तेरा स्थान हो।

सस्नेह, सुमेधा।

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