हिन्दी तुम बिन अधूरी मैं

अपने देश वहाँ की भाषा,सभ्यता और संस्कृति से प्रेम करने वाली लड़की की कहानी।

हिन्दी तुम बिन अधूरी मैं
कितनी खुश हुई थी मैं उस दिन जब मुझे वीजा मिल गया था युनाइटेड स्टेट का। मैं यानि प्रिया। चौबीस घंटो की उड़ान और फिर मैं अपने गन्तव्य पर।आखिर वर्ड डिजिनी ओरलेन्डो मे मेरी इन्ट्र्नशिप थी पूरे छः महीनो के लिये मैं हिन्दुस्तान अपने वतन से दूर थी पर अपने सपनों की उड़ान के बहुत करीब ।
कितनी उमंग से मैने ये जाॅब ज्वाइन की थी,सोंचा था बस मौका मिलना चाहिये एक्सटेंड होगी जाॅब तो करा लूँगी ।आखिर रक्खा भी क्या है भारत में हर जगह गरीबी,घोटाले,सड़कों पर गंदगी,घरों और रिश्तों मे खींचातानी ! कितनी स्वतन्त्रता है यहां(अमेरिकामें)।कोई बंधन नही।सब स्वतन्त्र, न कोई बंधन न कोई टीकाटिप्पणी।सब जगह  सबके लिये एक नियम और सब मानते हैं। पर ये क्या ,,,,,कुछ ही दिनों मे ये क्या महसूस कर रही हूँ मैं  !!! कोई आनन्द नही आता मुझे इंगलिश गानों की धुन पर,मुझे तो जगजीत जी की गजलों से प्यार है,पैर तो जरूर थिरकते हैं अंग्रेजी बीट पर ,पर जो गिद्दा और भंगढे मे  मन झूम उठता है वह मन की उमंग यहां नही है।अरे तंग आ गयी हूँ मै अंग्रेजी बोल बोलकर ,कोई चाइनीज,कोई ब्राजील से,कोई बट्रेन से तो  कोई ईरान ईराक से कोई कहीं और से ! तरस गये मेरे कान सुनने के लिये,,,,चल यार कहीं चलते हैं।कैसी है तू,,,वगैरह ,,वगैरह।मेरी हिन्दी , ,प्यारी हिन्दी ,,मेरी वाणी हिन्दी, हर रात जब तक माँ से,सहेलियों से हिन्दी में गिटपिट न कर लूँ चैन ही नही आता था सारा दिन दूसरी भाषा बोल-बोलकर ऐसा लगता था जैसे कल फिर खुद को व्यक्त करने के लिये अभिनय करना है ,,शब्दों मे अभिनय।  
अगस्त का महीना मतलब त्योहारों और पकवानों  का महीना ।पर मैं तो अपने वतन से कोसों दूर ! आज माँ का फोन बार बार आ रहा था ।मैं अपनी जॉब पर थी।मेरी रात की ड्यूटी मतलब हिन्दुस्तान की सुबह। काम के समय फोन उठाना मना था ।माँ को भी पता था ,,,फिर आज क्यों,,,?   स्टॉफ वहीं का था पर रिक्वैस्ट करने पर स्पीकर पे बात करने की परमीशन  दे दी। माँ के बस दो शब्द कानों को सुनाई दिये -बेटा कल रक्षाबंधन है पर हर साल की तरह इस साल खीर नही बना रही।तू जो नही है। माँ मैं भी खा लूँगी आप जरूर बनाना।उनसे तो कह दिया पर सच माँ को भी पता था मुझे खाना बनाना नही आता था तब तक।पर तभी एक सर आये  और मुझे अपना कार्ड देते हुए कहा - मैं भी भारतीय हूँ पच्चीस तीस सालों से यहीं हूँ , आपकी माँ की  भावनाओं को समझ पा रहा हूँ आप अपने मित्रों के साथ  इस एडरस पर आ जाना फ्लैग हॉस्टिंग और राखी सैलीब्रेशन एक साथ करेंगें। आज मेरी हिन्दी ने  पराये और अनजाने देश मे मुझे किसी अपने से मिला दिया था ।वह सज्जन किसी स्टॉफ मेम्बर के फ्रैंड थे।मैं सोंचने लगी अगर माँ हिन्दी में न बोलती तो शायद उन सर के अन्दर वह जज्बात नही आते और मैं अपने देश का त्योहार नही मना पाती।
अचानक जैसे मैं नींद से जागी ! नही -नही मुझे कोई जाॅब एक्सटेंड नही करानी मै कुछ सीखने आई हूँ  बस ठीक है।मेरे देश को भी होनहारों की बहुत जरूरत है।
आज मुझे अपने वतन वापस आना था।कितनी उत्साहित थी मैं ! दो चार शब्द सिखा दिये थे अपनी रूम मेटस को ,कितनी बार उनके मुँह से सुना मैने" जय भारत",नमस्ते।डेलही एयर पोर्ट पर "स्वागतम" पढकर आँखो को सुकून मिला,,कितने सुन्दर शब्द ,, सुआगतम !
छोटा भाई जो मुझे यू एस से आई है दीदी  सोंचकर 'हाउ वाज योर जरनी दी?'करके बात कर रहा था हांथ जोड़कर मैने कहा-भाई अपनी भाषा में बोल ले प्यार से - दीदी कैसी हो आप।औरों का तो पता नही पर सच हिन्दी तुम बिन बहुत अधूरी थी मैं।

स्वरचित-सारिका रस्तोगी
अम्बाला कैंट

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