हौंसलों की उड़ान

हौंसलों की उड़ान

जगमगाहट के लिए तारों की क्या जरूरत,

एक दिया ही काफ़ी है रोशनी के लिए....

गरीबी और ऊपर से भुखमरी किसी अभिशाप से कम नहीं। न जाने कितने ही लोग इस से हारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते हैं। ऐसा ही एक ख्याल आने पर समर्पण की जगह संघर्ष करने का अटल इरादा किया एक ऐसी शख्सियत ने जिन्होंने हर बाधा पार कर सफलता की इबारत लिख दी।

डर मुझे भी लगता है- गरीबी से,बेरोजगारी से,कुपोषण से,नशे से। लेकिन फिर भी मैंने अपनी बहनों को आवाज लगाई,,, एक संकल्प समाज की सूरत बदलने के लिए,संकल्प कुंठित मानसिकता और रूढ़िवादी परंपराओं को उखाड़ फेंकने का। आज सब कुछ सफल होता दिखता है”... ये शब्द और कहानी है बकरियाँ चराने वाली पाँचवी पास पद्मश्री फूलबासन बाई की....

फूलबासन बाई का जन्म 5 दिसंबर 1969 को छत्तीसगढ़ के राजनांद गाँव जिले में एक दूरस्थ गाँव सुकुलदैहान में हुआ था। एक गरीब घर में पैदा हुई लड़की, बचपन में अपने मां-बाप के साथ चाय के ठेले पर कप धोने का काम करती।

गरीबी का आलम यह था कि एक समय का खाना नसीब हो जाता तो अगले कई दिन फाके में गुजारने होते। महीनों नमक तक नसीब न होता और एक जोड़ी कपड़े में महीने निकल जाते।

 भाग्य की विडंबना देखिए कि महज दस वर्ष की हँसने खेलने की उम्र में उनका विवाह एक चरवाहे के साथ करा बालउम्र में जिम्मेदारियों के बोझ तले धकेल दिया गया।कुछ साल में चार बच्चे भी हो गए। घर की स्थिति बहुत दयनीय थी अपने बच्चों को दो वक्त की रोटी खिलाने के लिए फूलबासन को दर-दर जाकर अनाज माँगना पड़ता...इंतजाम न होने पर भूख से तड़पते बच्चों को देखकर खून के आँसू रोती थी।

यही वह पल था जब बच्चों को तकलीफ में देखकर फूलबासन कमजोर पड़ गई और एक दिन उसने सोच लिया कि मुझे मरना है।

 लेकिन बेटी ने हाथ पकड़ लिया और बोली,“नहीं माँ, हमको नहीं मरना है।उसी समय फूलबासन ने तय कर लिया कि अब यह जिंदगी समाज में व्याप्त गरीबी,कुपोषण,बाल विवाह व नशे के खिलाफ लडूँगी और जीतूँगी।

 उन्होंने दस बहनों का एक ग्रुप बनाया, जिसके तहत दो मुट्ठी चावल और एक हफ्ते दो रूपये जमा करने की योजना बनाई।

परंतु पुरुष प्रधान समाज यह कैसे स्वीकार करता कि स्त्रियाँ अपने अधिकारों को समझें और सशक्त हो जाएँ। संगठन बनाने की यह मुहिम फूलबासन के पति को पसंद ना आई और समाज में भी उसका विरोध होने लगा कि फूलबासन पागल हो गई है महिलाओं का समूह बना परंपरा के खिलाफ काम कर रही है लेकिन फूलबासन ने ठान लिया था कि उसे समाज में छुपी इन बीमारियों और ख़ासकर नशे रूपी आतंकवादी के खिलाफ जंग लड़नी है।उसके इस नेक उद्देश्य के संकल्प के आगे समाज के सब ताने-बाने शून्य पड़ गए।

भर हौंसलों की उड़ान दिल में इतनी,

कि हर दीवार को तोड़ ख़्वाबों को परवाज़ दे।

इसी सोच के साथ आगे बढ़ महिलाओं की मदद से जल्द ही इस समिति ने बम्लेश्वरी ब्रांड नाम से आम और नींबू के अचार तैयार किए और छत्तीसगढ़ के तीन सौ से अधिक स्कूलों में उन्हें बेचा जाने लगा जहाँ बच्चों को गर्मागर्म मध्यान्ह भोजन के साथ घर जैसा स्वादिष्ट अचार मिलने लगा।

इसके अलावा उनकी संस्था अगरबत्ती, वाशिंग पावडर, मोमबत्ती, बड़ी-पापड़ आदि बना रही है जिससे दो लाख महिलाओं को स्वावलम्बन की राह मिली है। फूलबासन के मुताबिक अचार बनाने के इस घरेलू उद्योग में महिला सदस्यों को अतिरिक्त आमदनी का एक बेहतर जरिया मिला।

फूलबासन ने अपने सामाजिक जीवन में कई उल्लेखनीय कार्यों को महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से अंजाम दिया है। महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से गांव की नियमित रूप से साफ-सफाई, वृक्षारोपण, जलसंरक्षण, सिलाई-कढ़ाई सेन्टर का संचालन, बाल भोज, रक्तदान, सूदखोरों के खिलाफ जन-जागरूकता का अभियान, शराबखोरी एवं शराब के अवैध विक्रय का विरोध, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ वातावरण का निर्माण, गरीब एवं अनाथ बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी फूलबासन ने प्रमुख भूमिका अदा की है। आज लाखों महिलाओं का यह समूह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए-नए कीर्तिमान रच रहा है।

भारत सरकार ने फूलबासन बाई को 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया. तो वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने जनाना सुरक्षा योजना नामक प्रसूति कार्यक्रम के लिए उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया था. साल 2014 में महावीर फाउंडेशन पुरस्कार से भी फूलबासन बाई सम्मानित हुईं है.

यही है आत्मविश्वास और नारी सशक्तिकरण की जीती जागती मिसाल... जो कभी दो वक़्त के खाने की भी मोहताज थी और आज लाखों महिलाओं का समूह बनाकर सफलता की इबारत लिख रही है।

फूलबासन बाई के जज़्बे एवं हिम्मत को सलाम, सच कहते हैं एक बड़े बदलाव के लिए पागलपन चाहिए, जुनून चाहिए। गर्व है समस्त देशवासियों को अपने देश की इस छोरी पर... सर उठाकर हरेक हिंदुस्तानी बोलेगा... म्हारी छोरियाँ छोरों से कम नहीं हैं।

... रुचि मित्तल...

#म्हारी छोरियाँ 

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0