राजस्थान की आईएएस अधिकारी मोनिका यादव अपने देसी लुक की वजह से छा रही है सोशल मीडिया पर

मोनिका का ग्रामीण परिवेश के साथ वहां की संस्कृति को अपनाना और ऐसे रीति रिवाजों में हिस्सा लेना सोशल मीडिया में एक्टिव रहने वाले यूजर्स को काफी पसंद आ रहा है।

राजस्थान की आईएएस अधिकारी मोनिका यादव अपने देसी लुक की वजह से छा रही है सोशल मीडिया पर

अक्सर  लोग किसी बड़े पद पर पहुंचने के बाद आधुनिकता की चकाचौंध में सबसे पहले किनारा अपनी परंपराओं से करते हैं। लेकिन राजस्थान की यह महिला अधिकारी  अपनी परंपराओं से बेहद प्रेम करती है. यही कारण है कि अपनी बेटी के जन्म के बाद जब इस अधिकारी ने परंपराओं को निभाया तो उसकी एक फोटो सोशल मीडिया की सुर्खियां बन गई।
 इस फोटो पर अब इस अधिकारी की जमकर प्रशंसा हो रही है। मोनिका की देसी अंदाज की यह फोटो इतनी वायरल हो जायेगी इसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी ।
आज सोशल मीडिया पर मोनिका की सराहना की जा रही है. इसकी वजह सिर्फ यह फोटो ना होकर उनका ग्रामीण संस्कृति के प्रति प्रेम भी है।
मोनिका का ग्रामीण परिवेश के साथ वहां की संस्कृति को अपनाना और ऐसे रीति रिवाजों में हिस्सा लेना सोशल मीडिया में एक्टिव रहने वाले यूजर्स को काफी पसंद आ रहा है।
 मोनिका ने उच्च सरकारी सेवा में आने के बाद भी परंपराओं को अपने से दूर नहीं होनेदिया।सोशल मीडिया पर मोनिका का ग्रामीण प्रेम जमकर शेयर किया जा रहा है और इसमें उनकी तारीफ भी हो रही है. सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही पोस्ट में मोनिका की सादगी की भी प्रशंसा की जा रही है। 
अपनी बच्ची  को लेकर ठेठ राजस्थानी ग्रामीण वेशभूषा में उनका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
 सीकर जिले के श्रीमाधोपुर तहसील के लिसाडिय़ा गांव के वरिष्ठ आरएएस अधिकारी हरफूलसिंह यादव की बेटी मोनिका ने भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2017 में 403 वीं रैंक हासिल की और भारतीय रेल यातायात सेवा के लिए चयनित हुई। पिता के अधिकारी होने के बाद और  खुद के भी उच्च सरकारी सेवा में आने के बावजूद मोनिका ने राजस्थानी परम्परा को नहीं छोड़ा और आज भी बखूबी उसे निभाती आ रही हैं। 
इसी के चलते वह वह अब सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी बन चुकी हैं।

सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना से ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जो अच्छी बात है। 
वह बताती  हैं कि जब वह अपने गांव जाती है तो देसी अंदाज में ही रहती है। इससे परिवार वाले ही नहीं, ग्रामीणों को भी उन पर गर्व होता है। वह कहती है कि भले कोई पढ़-लिखकर या पैसा कमाकर कितना भी बड़ा आदमी बन जाए लेकिन अपनी संस्कृति को छोडना नहीं चाहिए। 
बल्कि वह तो यह भी मानती है कि यह उसके जैसे लोगों की ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।

अनु गुप्ता

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