इतिहास के पन्नों से अमृता प्रीतम

इतिहास के पन्नों से अमृता प्रीतम

दोस्तों! इतिहास के पन्नों से आज मैं आपके लिए लाई हूँ अमृता प्रीतम के बारे में -

प्यार अगर इंसान की शक्ल लेता तो उसका चेहरा अमृता प्रीतम जैसा होता। जैसा अमृता प्रीतम ने अपने लिए चुना, वैसा ही प्यार और आजादी के मेल से बना चटख रंग वे हर स्त्री के जीवन में चाहती थीं। 

अमृता पर लिखना कुछ ऐसे ही है जैसे आग को शब्द देना, हवा को छूकर आना और चांदनी को अपनी हथेलियों के बीच बांध लेना,प्रेम में सिर से पांव तक डूबी यह स्त्री आजाद बला की थी और खुद्दार भी उतनी ही, यूं ही नहीं   एक दौर की पढ़ी लिखी लड़कियों के सिरहाने अमृता की रसीदी टिकट हुआ करती थी. यही नहीं, उनके जीने-रहने के तौर-तरीके भी  कॉपी किए जाते रहे,अमृता आजाद ख्याल इन लड़कियों का रोल मॉडल रही हैं ।

अमृता का यह आकर्षण उन्हें खास बनाता है जिसने भाषा की दीवारों के परे भी उनके शब्दों के पंखों को खुला आकाश दे दिया था।
अमृता प्रीतम 20 सदीं की एक महान कवियत्री औरउपन्यासकार ही नहीं बल्कि एक प्रख्यात निबंधकार भी थी, जिन्होंने पंजाबी कविता एवं साहित्य को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलवाई है। वे पंजाबी भाषा की सर्वश्रेष्ठ कवियित्री थी, जिनकी रचनाओं का विश्व की कई अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

अपने जीवन में करीब 100 किताबें लिखने वाली महान कवियित्री अमृता प्रीतम जी को उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं के लिए कई बड़े पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।अद्भुत प्रतिभा की धनी अमृता प्रीतम जी उन महान साहित्यकारों में से एक थीं, जिनका महज 16 साल की उम्र में ही पहला संकलन प्रकाशित हो गया था।

अमृता प्रीतम जी के दिए गए पुरस्कारों की सूची निम्नलिखित है

साहित्य अकादमी पुरस्कार (1956)

पद्मश्री (1969)

पद्म विभूषण (2004)

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982)

बल्गारिया वैरोव पुरस्कार (बुल्गारिया – 1988)

डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (दिल्ली युनिवर्सिटी- 1973)

डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (जबलपुर युनिवर्सिटी- 1973)

अमृता प्रीतम ने तलाकशुदा महिलाओं की पीड़ा एवं वैवाहिक जीवन के कटु सत्य को बेहद भावनात्मक तरीके  से बताया है। पंजाबी साहित्य में 60 साल से भी ज्यादा समय तक राज करने वाली महान कवियित्री अमृता प्रीतम जी की लोकप्रियता भारत में हीं नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी है।

अमृता प्रीतम के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने ही लिव-इन-रिलेशनशिप की शुरुआत की। जिस जमाने में महिला लेखिकाओं  में बेबाकी कहीं नहीं थी, उस समय उन्होंने स्पष्टवादिता दिखाई, जो अन्य महिलाओं के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था। 

अमृता प्रीतम जनवरी 2002 में अपने ही घर में गिर पड़ी थीं और तब से बिस्तर से नहीं उठ पाईं। उनकी मौत 31 अक्टूबर, 2005 को नई दिल्ली में हुई। इस तरह महान कवियित्री अमृता प्रीतम जी की कलम हमेशा के लिए रुक गई।

आज अमृता प्रीतम भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन आज भी उनके द्धारा लिखित उनके उपन्यास, कविताएं, संस्मरण, निबंध, उनकी मौजूदगी का एहसास करवाते हैं।


अनु गुप्ता

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