जब उसने मां कहा था

जब उसने मां कहा था

 14 साल हो गये लेकिन मां बनने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ था रोहिणी को |हर तरह के डॉक्टर और वैद्य को दिखा लिया था लेकिन उसकी किस्मत उसका साथ नहीं दे रही थी |पति मनोज से बच्चे के लिए तड़पती अपनी पत्नी की हालत देखना बहुत मुश्किल हो रहा था और उसने फैसला किया कि वह एक बच्चा गोद लेगा और अपनी रोहिणी की सूनी गोद को भर देगा |

यद्यपि मनोज की माता जी बच्चा गोद लेने के सख्त खिलाफ थी और चाहती थी कि उनके बेटे की दूसरी शादी हो जाये |मनोज रोहिणी से इतना प्रेम करता था कि उसने अपनी माँ से दूसरे विवाह के लिए साफ इन्कार कर दिया और अपनी बात पर अटल भी रहा |
मनोज शहर के अनाथालय में गया और एक बच्चे को गोद लेने के लिए बात कर आया |

बेटे के फैसले से मां तो नाराज हुई थी क्योंकि वह चाहती थी कि उनके वंश की बेल बढाने के लिए उनके बेटे का अपना बच्चा होना चाहिए लेकिन जब रोहिणी को मनोज ने बच्चे गोद लेने वाली बात बताई तो खुशी से उसकी आंख भर आई और मन में ममता जाग उठी |

अगले दिन मनोज और रोहिणी अनाथालय पहुँचे |वहां उन्हें 4 साल के नन्हें विराज से मिलवाया गया |बहुत ही प्यारा बच्चा |उसकी आंखों में एक अलग सी चमक थी |उसे देखकर रोहिणी के अन्दर छुपी मां उसे अपना बनाना चाहती थी |उस बच्चे को पहले ही सिखा दिया गया था शायद इसलिए उसने रोहिणी को मां कहकर बुलाया |जैसे ही रोहिणी के कानों में मां शब्द गया उसके अन्दर छुपा बैठा मातृत्व आंखों से बहने लगा और उसने उस प्यारे से छोटे से विराज को गोद में उठा लिया |


रोहिणी की ममता उस बच्चे को अपने सीने से लगाकर तृप्त हो गई और उसके जीवन में ढेर सारी खुशियां आ गई |विराज को गोद में बिठाकर घर लाते हुये रोहिणी ने चेहरे पर मुस्कराहट और आंखों में आँसू लिये अपने पति मनोज को नजरों से ही धन्यवाद किया और विराज को सीने से लगा लिया |इसी लम्हे के लिए तो उसका हदय सालों से तड़प रहा था | उदासी से घिरी रोहिणी को हंसता खिलखिलाता देख मनोज को अपना बच्चा गोद लेने का फैसला बिल्कुल सही लगा |

रोहिणी और मनोज जब विराज को घर लेकर पहुंचे तो उनके मन में यही डर था कि मां की न जाने प्रतिक्रिया होगी फिर भी उन दोनों ने ठान लिया था कि वे दोनों विराज को बहुत सारा प्यार देगें और नन्हे विराज की घर में चहल पहल से और प्यारी प्यारी बातों को सुनकर मांजी का दिल भी पसीज जायेगा और वह भी उसे अपना लेगी |


रोहिणी ने गाड़ी में ही विराज को समझा दिया था कि घर में दादी मां मिलेगीं |घर पहुंचकर जैसे ही विराज को दादी  मां के पास ले जाया गया तो वह बिना उससे मिले अपने कमरे में चली गई |रोहिणी समझ गई कि मां इतनी आसानी से विराज को नहीं अपनायेगी लेकिन उसे विश्वास था कि एक न एक दिन अपना ही लेगीं |


रोहिणी और विराज पूरा दिन मस्ती करते हंसते खेलते |विराज के आते ही उस घर में जान आ गई थी |रोहिणी का जीवन रंगमय हो गया था |एक दिन रोहिणी अपने प्यारे बेटे विराज के साथ चोर पुलिस खेल रही थी जिसमें विराज पुलिस बना था और रोहिणी चोर |रोहिणी जानबूझकर अपनी सासु माँ रामवती जी के बैड के पीछे छुप गई |मां को ढूढ़ता नन्हा विराज जब दादी के कमरे में आया तो रामवती जी ने इशारों से विराज को रोहिणी के बारे में बता दिया और रोहिणी के पकड़े जाने पर दोनों दादी नाती जोर जोर से हंसने लगे |


आज रामवती जी ने विराज को गोद में उठा लिया और बहुत सारा प्यार किया |उस नन्हे से फरिश्ते की भोली सूरत और चंचलता  ने रामवती जी के मन में अपनी जगह बना ली और उन्होने उसे अपना लिया |रोहिणी भी नम आंखों से दादी पोते को बातें करती निहारने लगी और आज पूरी तरह से विराज उस घर ने विराज को अपना लिया |

मेरी नयी कहानी... उम्मीद है आपको पसन्द आयेगी |

#MyFirstPregnancy

धन्यवाद |
आपकी सखी 
सीमा शर्मा पाठक 

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
1
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0