जीजाजी के जूते मैं ही चुराउंगी....

जीजाजी के जूते मैं ही चुराउंगी....

सुमी, अपनी माँ - पापा की इकलौती लडकी थी | बचपन में एक भाई या बहिन को बहुत मिस करती थी | हमेशा अपनी मम्मी से कहती एक भाई बहिन ला दो | मम्मी उसकी बात को हंसी मे टाल देती | सुमी बड़ी होने लगी | धीरे - धीरे उसके सभी चचेरे भाई बहिन की शादियां होने लगी | सभी दो या तीन भाई बहिन होते तो आपस में बहुत इंसान करते | सुमी बहुत अलग - थलग सा महसूस करती | किसी भी रस्म में उसको शामिल नहीं किया जाता | उसका भी मन करता कि जूते चुराने की रस्म में मजे करे | जीजाजी के जूते चुराये पर उसकी चचेरी बहिन ने अकेले ही सारी रस्म की उसको पूछा भी नहीं | 

सुमी बहुत रोयी मम्मी से आपने मेरे भी एक भाई या बहिन किया होता तो मैं भी उनकी शादियों में मजे करती सारी रस्में करती | आरती को देखो कैसे इतरा इतरा कर दीदी की शादी की रस्में कर रही है मुझे तो एक बार भी नहीं पूछा क्या मै उनकी बहिन नहीं..... 

मम्मी को कोई जबाब देते नहीं बना | अब सुमी खानदान की किसी शादी में नहीं जाती |जाती भी तो उसका मन नहीं लगता | अभी कुछ दिनों में उसकी मौसी की बेटी की शादी होने वाली थी मम्मी ने कहा सुमी चलो शापिंग कर ले, सुमी बोली क्या करना है मम्मी वैसे भी कजिन की ही शादी कौन सा मेरे सगी बहिन है मैं तो मेहमानों की तरह जाउंगी और खाना खाकर चली आंउगी| मम्मी ने कहा तू चल तो सही मौसी के बच्चे तो तुझे कभी अलग मानते ही नहीं है न

सुमी, शादी वाले दिन ही पहुंची उसे देखकर मौसी की बेटी बोली अरे दीदी कितनी लेट आयी हो अभी प्लानिंग भी करनी है जीजाजी के जूते  तो आपको ही चुराने है सुमी बहुत हैरानी से उसे देखने लगी वो  बोली ऐसे क्या देख रही हो दीदी क्या आपकी बहिन नहीं सुमी की आंखों में आंसू आ गये | उसने मम्मी की तरफ देखा | मम्मी मुस्कुरा रही थी | अब तो सुमी को जोश आ गया | उसने दीदी की शादी की सभी रस्मों में बढ़कर हिस्सा लिया | जीजाजी के जूते चुराये उसे जो नेग मिला वो अपनी छोटी कजिन को देने लगी | उसने कहा दीदी ये तो आपका है | सुमी बोली तुम छोटी हो मुझसे तो तुम्हारा है | मुझे तो बस ये रस्म करनी थी मुझे तो बस एक बहिन की शादी में इंजाय करना था तुम्हें थैंक्यू जिसने मुझे भी एक बहिन के होने का एहसास कराया दिया | अरे दीदी आप भी हमारी बहिन हो मौसी की बेटी हो तो क्या हो तो बहिन ही न और उसके गले लगकर बोली " आपकी शादी में जीजाजी के जूते मैं ही चुराउंगी याद रखना "| सुमी हंसने लगी बोली हां और क्या तू ही तो उनकी इकलौती शाली  होगी | और दोनों खिलखिलाकर हंसने लगी |

स्वरचित

श्रुति त्रिपाठी

# पंरपरा

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