जिंदगी मुस्करा उठी

डॉक्टर ने जैसे ही नेहा को यह खुशखबरी दी कि उसकी प्रेगनेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव है, सुनकर नेहा व उसके पति पवन की आंखों में खुशी के मारे आंसू आ गए| 7 साल से दोनों के कान इस

जिंदगी मुस्करा उठी

डॉक्टर ने जैसे ही नेहा को यह खुशखबरी दी कि उसकी प्रेगनेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव है, सुनकर नेहा व उसके पति पवन की आंखों में खुशी के मारे आंसू आ गए| 7 साल से दोनों के कान इस खुशखबरी को सुनने के लिए तरस रहे थे| समाज व परिवार की बातें सुन, जब जब नेहा टूटने लगी थी, पवन ने ही आगे बढ़ उसको संभाला था| पवन हमेशा उसे समझाते हुए कहता "नेहा दुनिया चाहे कुछ भी कहे तुम मेरे लिए सबसे बढ़कर हो और देखना एक दिन भगवान हमारी प्रार्थना जरूर सुनेगा| "

नेहा जब छोटे बच्चों को देखती तो उसका बड़ा मन करता था कि उसका भी एक बच्चा हो| वह भी मां बन औरत की संपूर्णता चाहती थी| चाहती थी, कोई हो जो उन्हें मां पिता कहकर पुकारे| उसके सहारे वह भी फिर से अपना बचपन  जीना चाहते थी|

प्रेगनेंसी के बाद नेहा की तबीयत अक्सर खराब रहती|   डॉक्टर ने उसे बेड रेस्ट के लिए बोल दिया था| जब से नेहा की शादी हुई थी| उसकी सास ने घर की सारी जिम्मेदारी उस पर ही सौंप दी थी| पवन ने डॉक्टर की बात अपनी मां को बताई और नेहा की मदद करने को कहा| यह सुन उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि आजकल के डॉक्टर हर किसी को यही कहते हैं| काम करने से तो जच्चगी आसानी से होती है और भाई मुझसे इस बुढ़ापे में काम नहीं होगा| उसे अपनी मां से इस तरह की उम्मीद नहीं थी|

1 दिन नेहा की मम्मी उसे देखने आई| उस दिन नेहा की तबीयत ज्यादा ही खराब थी| उसे उल्टियां लगी हुई थी| | उसकी हालत देख वह बोली " बेटा तुम बुरा ना मानो तो मैं इसे अपने साथ ले जाती हूं| उसकी तबीयत सही नहीं है| समधन जी कैसे घर और इसे अकेले संभालेंगी| इतने सालों बाद यह खुशखबरी आई है तो मैं नहीं चाहती किसी तरह की चूक हो|"

पवन को पता था कि वह यहां रहेगी तो काम में लगी ही रहेगी इसलिए उसने भी हामी भर दी| आखिर वह दिन भी आ गया जिस दिन नेहा की डिलीवरी थी| सभी बड़ी बेचैनी से उस पल का इंतजार कर रहे थे| थोड़ी ही देर में नर्स ने आकर बताया की बेटी हुई है| सुनकर पवन के चेहरे पर खुशी छा गई| उसकी सास ने भी पवन को बधाई दी| लेकिन पवन की मम्मी के चेहरे पर लड़की सुन उदासी छा गई|

कुछ ही देर बाद डॉक्टर ने पवन को अंदर बुलाया और बच्ची को दिखाया| अपनी बच्ची को जैसे ही उसने गोद में उठाया तो उसके ऊपर का होंठ कटा देख वह थोड़ा परेशान हो गया| उसकी मनोदशा समझ, डॉक्टर ने पवन को समझाते हुए कहा " इसमें घबराने व चिंता करने की कोई बात नहीं| जब यह चार पांच साल की‌ होगी तो एक छोटे-से ऑपरेशन से यह सही हो जाएगा| " उनकी बात से पवन को तसल्ली हो गई|

इतनी देर में उसकी मां व सास भी अंदर आ गई| पवन ने जैसे ही बच्ची को अपनी मां की गोद में दिया तो उसे देखते ही वह धक से रह गई और आंसू बहाते हुए बोली " हे भगवान इतने सालों बाद दी, वह भी लड़की और ऊपर से होंठ कटी| इससे अच्छा तो बेऔलाद ही सही था मेरा बेटा|"

उनकी बात सुनकर पवन को बहुत गुस्सा आया| वह बोला "मां यह क्या कह रही हो आप| इतने वर्षों बाद भगवान ने हमें यह दिन दिखाया है| यह सुख देखने के लिए हम कितना तरसे हैं, इसका अंदाजा शायद आपको नहीं| आज मेरी इस बेटी ने हमें माता-पिता बनने का सौभाग्य दिया है| मेरी बेटी जैसी भी है हमारे दिल का टुकड़ा है और हमें दिलो जान से प्यारी है| मेरी बेटी दुनिया की सबसे खूबसूरत बच्ची है| इसे मैं जीवन की सब खुशियां दूंगा| यह एक पिता का वादा है, अपनी बच्ची से| आज के बाद मैं अपनी बेटी के बारे में इस तरह की कोई बात आपके मुंह से ना सुनूं| "

उसने अपनी बेटी को उनकी गोद से ले लिया और प्यार से उसका माथा चूम लिया| वह नन्ही सी जान अपने पिता का आशीर्वाद रूपी स्पर्श पा मुस्कुरा उठी| उसे यूं मुस्कुराता देख पवन व नेहा की आंखों में खुशियों के आंसू छलक पड़े|

दोस्तों, कैसी लगी आपको मेरी यह रचना, पढ़कर इस विषय में अपने अमूल्य विचार जरूर दें| पसंद आने पर लाइक और फॉलो करना ना भूले।

#Antima singh

Kavita Singh

Prabha jitender kumar

Radha Gupta patwari

Anu Gupta

आपकी सखी,

सरोज

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0